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मरीज परेशान, निजी अस्पतालों में सेवा लेने पहुंचे मरीज
अमर उजाला ब्यूरो, जींद
Updated Tue, 06 Sep 2016 11:54 PM IST
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चिकित्सकों की हड़ताल के कारण लगी मरीजों की लाइन।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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चिकित्सकों की संख्या पूरी करने और अन्य मांगों को लेकर नागरिक अस्पताल सहित जिला भर के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों ने दो घंटे पेन डाउन हड़ताल रखी। हालांकि इस दौरान आपातकालीन और लेबर सेवाएं जारी रही। दो घंटे की हड़ताल के चलते मरीजों को भारी परेशानी हुई। सुबह सात बजे से ही जल्दी इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को 10 बजे इलाज मिल सका। हड़ताल का सबसे अधिक असर ओपीडी सेवाओं पर पड़ा। हड़ताल से परेशान होकर कई मरीजों ने प्राइवेट अस्पतालों की ओर रुख कर लिया। कई मरीजों को आशंका थी कि यह हड़ताल दिनभर भी चल सकती है।
इस दौरान चिकित्सक एसोसिएशन के जिला महासचिव डॉ. राजेश भोला ने बताया कि प्रदेश भर में चिकित्सकों के 3150 पद स्वीकृत हैं, जबकि करीब 2000 डॉक्टर ही कार्यरत हैं। पंजाब में हरियाणा के लगभग बराबर आबादी होने के बावजूद वहां 5400 डॉक्टर काम कर रहे हैं। इससे डॉक्टर मरीजों को सही उपचार नहीं दे पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसको लेकर हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेस ऐसोसिएशन कई बार सरकार को अवगत करवा चुकी है, लेकिन कोई सुधार नहीं हो रहा है।
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यह है जींद का हाल
जिला में 180 चिकित्सकों के स्वीकृत पद हैं। इनमें से महज 60 पदों पर ही चिकित्सक हैं। ऐसे में एक-एक चिकित्सक को प्रतिदिन 400 से 500 मरीजों की ओपीडी करनी पड़ती है। इतना ही नहीं जिला मुख्यालय के नागरिक अस्पताल में न तो हड्डी रोग विशेषज्ञ हैं और न ही त्वचा रोग विशेषज्ञ। जिला भर में रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने के कारण मरीजों को बाहर से अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ता है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में हालत दयनीय
जिला के नागरिक अस्पताल में तो जैसे-तैसे काम चल जाता है, लेकिन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तथा पीएचसी व उप स्वास्थ्य केंद्र पर हालात बहुत ही दयनीय हैं। अधिकतर पीएचसी और उप स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सक ही नहीं हैं। ऐसे में स्वास्थ्य केंद्र खोलने कोई मतलब नहीं बचता। जिला के कुछ स्वास्थ्य केंद्रों पर तो एएनएम और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तक मरीजों को दवा दे रहे हैं।
वापस लौटे मरीज
दूर दराज के गांवों से कुछ लोग जल्दी इलाज करवाने के लिए सुबह सात बजे ही अस्पताल पहुंच गए। उनकी पर्ची भी बन गई, लेकिन जब आठ बजे इलाज शुरू नहीं हुआ तो पता चला कि चिकित्सक हड़ताल पर हैं और अब 10 बजे चिकित्सा सेवाएं शुरू होंगी। इससे मरीजों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। कई मरीज बिना इलाज कराए ही वापस लौट गए, तो कुछ प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराने चले गए।
दो घंटे करना पड़ा इंतजार
मुझे दमा की दिक्कत है और इलाज के लिए नागरिक अस्पताल आया हूं। यहां आने के बाद पता चला कि दो घंटे की हड़ताल के बाद चिकित्सक मरीजों को देखेंगे। इसके चलते इंतजार कर रहा हूं। दमा के कारण बहुत दिक्कत हो रही है।
ओमप्रकाश, मरीज
बेटी बीमार है, नहीं मिल रहा इलाज
मेरी बेटी बीमार है और वह खड़ी भी नहीं हो सकती। ऐसे में बहुत परेशानी हो रही है। हड़ताल के कारण अस्पताल में बेंचों पर बैठने तक की जगह नहीं है। चिकित्सकों की हड़ताल के कारण मरीजों को भारी परेशानी हो रही है।
मंजू,
विशेष पैकेज दे सरकार
हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेस एसोसिएशन ने सरकार से कई बार विशेष पैकेज कि मांग की है। इससे नए विशेषज्ञ डॉक्टरों का रुझान बढे़गा। फिलहाल चिकित्सकों पर काम का अधिक बोझ है। इसके चलते वे सही प्रकार से इलाज भी नहीं कर पा रहे हैं। सरकार को चिकित्सकों की मांगों पर ध्यान देना चाहिए। अब 11 सितंबर को करनाल में प्रदेश स्तरीय मीटिंग होगी, जिसमें आगामी रणनीति बनेगी। हड़ताल के कारण मरीजों को हुई परेशानी के लिए खेद है।
डॉ. राजेश भोला, महासचिव हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेस ऐसोसिएशन
चिकित्सकों की दो घंटे की हड़ताल रही है। इस दौरान आपातकालीन और लेबर सेवाएं जारी रही हैं। ओपीडी के लिए आने वाले मरीजों को जरूर परेशानी हुई है। यहां स्टाफ की खासी कमी है। इसके लिए सरकार को लिखा गया है।
डॉ. संजय दहिया, सिविल सर्जन
नागरिक अस्पताल में एम्बुलेंस सेवा की खुली पोल
सीबीआई के सीनियर जज द्वारा रेफरेल सेवा 102 नंबर पर की एक कॉल ने नागरिक अस्पताल की एंबुलेंस सेवा की पोल खोल दी है। अब हालांकि प्रशासन ने मामले की जांच के लिए तीन चिकित्सकों की एक जांच टीम का गठन किया है, जो तीन दिन में अपनी रिपोर्ट सिविल सर्जन को देगा। इस मामले ने रेफरल सेवा की कई खामियों को उजागर कर दिया है।
गौरतलब है कि सोमवार को ईक्कस गांव के पास एक सड़क दुर्घटना हो गई थी। इसके बाद यहां से गुजर रहे सीबीआई के सीनियर जज जगदीप सिंह ने जब एंबुलेंस के लिए 102 नंबर पर कॉल की तो जवाब मिला कि एंबुलेंस उड़ कर नहीं आएगी। इस घटना से नागरिक अस्पताल प्रबंधन की कलई खोल कर रख दी है। अस्पताल सूत्रों के अनुसार एंबुलेंस सेवा में भारी खेल चल रहा है। यहां तैनात कर्मचारियों की हरकतों पर नजर रखने के लिए साउंड रिकार्ड लगाया गया था, जो लंबे समय से काम नहीं कर रहा है। इतना ही नहीं कंट्रोल रूम में एंबुलेंस के चालक भी बैठे रहते हैं। सूत्रों के अनुसार जज जगदीप सिंह को जवाब देने वाला भी यहां तैनात कर्मचारी नहीं था। किसी अन्य ने ही फोन उठाया था। अब इन सभी पहलुओं पर जांच टीम काम करेगी।
अब बदला जाएगा कंट्रोल रूम
एंबुलेंस सेवा के लिए बनाया गया कंट्रोल भी बदला जाएगा। रेफरल सेवा के प्रभारी डॉ. कुलदीप राणा के अनुसार अब सिविल सर्जन के बाहर ही एक कमरे में कंट्रोल रूम चलेगा, ताकि यहां तैनात कर्मचारियों पर नजर रखी जा सके।
तीन दिन में आएगी रिपोर्ट
मामले को हमने गंभीरता से लिया है। इसके चलते रेफरल सेवा के प्रभारी डॉ. कुलदीप राणा, डॉ. मंजुला और डॉ. प्रभुदयाल की जांच टीम बना दी है। यह टीम तीन दिन में रिपोर्ट सौंपेगी, इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. संजय दहिया, सिविल सर्जन