{"_id":"61df21b56693e54c1e5898f6","slug":"jind-district-is-at-the-fore-in-the-state-in-getting-the-children-treated-under-rbsk-scheme-jind-news-rtk635569761","type":"story","status":"publish","title_hn":"आरबीएसके योजना के तहत बच्चों का इलाज करवाने में जींद जिला प्रदेश में सबसे आगे --बच्चों के इलाज पर खर्च किए 33 लाख 22 हजार 146 रु","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आरबीएसके योजना के तहत बच्चों का इलाज करवाने में जींद जिला प्रदेश में सबसे आगे --बच्चों के इलाज पर खर्च किए 33 लाख 22 हजार 146 रु
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जींद। जिला स्वास्थ्य विभाग आरबीएसके (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) योजना के तहत बच्चों का इलाज करवाने में प्रदेश में पहले नंबर पर आया है। स्वास्थ्य विभाग अप्रैल 2021 से अब तक बच्चों के इलाज पर 33 लाख 22 हजार 146 रुपये खर्च कर चुका है जबकि बजट के अनुसार दो लाख रुपये प्रति तिमाही के अनुसार प्रत्येक जिले को रुपये मिलते हैं। जिला स्वास्थ्य विभाग ने चार लाख रुपये और बजट की मांग स्वास्थ्य निदेशालय से की है।
आरबीएसके योजना के तहत 14 वर्ष से नीचे आयु के बच्चों का इलाज स्वास्थ्य विभाग निशुल्क में करता है। इसके लिए यदि सुविधाएं सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध नहीं हो तो निजी अस्पतालों में स्वास्थ्य विभाग बच्चों का इलाज करवाता है। इसके लिए जो खर्च आता है, वह स्वास्थ्य विभाग द्वारा वहन किया जाता है। इसके लिए बच्चे का सरकारी स्कूल या आंगनबाड़ी में दाखिला होना जरूरी है। जिन बच्चों को दिल में छेद होता है, उनका मोहाली में, आंखों के लिए भिवानी में तथा होट कटे या तलुओं में दिक्कत होती है उनका करनाल के निजी अस्पताल में इलाज करवाया जाता है। यह सभी अस्पताल स्वास्थ्य विभाग के पैनल पर हैं। इतने बच्चों का इलाज करवाने वाला जींद प्रदेश में पहला जिला है। इसके लिए आरबीएसके के प्रभारी डॉ. रमेश पांचाल को स्वास्थ्य निदेशक डॉ. जेएस पूनिया, पीएमओ डॉ. अनिल बिरला समेत अन्य चिकित्सकों ने बधाई दी है।
अब तक इन बच्चों का हुआ इलाज
आरबीएसके के डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. रमेश पांचाल ने बताया कि इस वर्ष जिला स्वास्थ्य विभाग 29 बच्चों के दिल के छेद के ऑपरेशन करवा चुका है। इन पर 2888096 रुपये खर्च आया है। 16 बच्चों की आंखों के टेढ़ेपन का इलाज करवा चुका है। इन पर 209000 रुपये खर्च हुए हैं। 10 बच्चों के पैरों के डेढ़ेपन, तीन बच्चों के कमर के फोड़े के ऑपरेशन करवाए गए। यह नागरिक अस्पताल में हुए, जिन पर 35 हजार रुपये खर्च हुए। चार बच्चों के मोतियाबिंद के ऑपरेशन करवाए गए, जिन पर एक लाख 20 हजार रुपये खर्च हुए। अन्य बीमारियों के इलाज पर स्वास्थ्य विभाग ने 70050 रुपये खर्च किए। इतनी राशि खर्च करने में जींद जिला प्रदेश में पहले नंबर पर आया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
आरबीएसके योजना के तहत 14 वर्ष से नीचे आयु के बच्चों का इलाज स्वास्थ्य विभाग निशुल्क में करता है। इसके लिए यदि सुविधाएं सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध नहीं हो तो निजी अस्पतालों में स्वास्थ्य विभाग बच्चों का इलाज करवाता है। इसके लिए जो खर्च आता है, वह स्वास्थ्य विभाग द्वारा वहन किया जाता है। इसके लिए बच्चे का सरकारी स्कूल या आंगनबाड़ी में दाखिला होना जरूरी है। जिन बच्चों को दिल में छेद होता है, उनका मोहाली में, आंखों के लिए भिवानी में तथा होट कटे या तलुओं में दिक्कत होती है उनका करनाल के निजी अस्पताल में इलाज करवाया जाता है। यह सभी अस्पताल स्वास्थ्य विभाग के पैनल पर हैं। इतने बच्चों का इलाज करवाने वाला जींद प्रदेश में पहला जिला है। इसके लिए आरबीएसके के प्रभारी डॉ. रमेश पांचाल को स्वास्थ्य निदेशक डॉ. जेएस पूनिया, पीएमओ डॉ. अनिल बिरला समेत अन्य चिकित्सकों ने बधाई दी है।
विज्ञापन
अब तक इन बच्चों का हुआ इलाज
आरबीएसके के डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. रमेश पांचाल ने बताया कि इस वर्ष जिला स्वास्थ्य विभाग 29 बच्चों के दिल के छेद के ऑपरेशन करवा चुका है। इन पर 2888096 रुपये खर्च आया है। 16 बच्चों की आंखों के टेढ़ेपन का इलाज करवा चुका है। इन पर 209000 रुपये खर्च हुए हैं। 10 बच्चों के पैरों के डेढ़ेपन, तीन बच्चों के कमर के फोड़े के ऑपरेशन करवाए गए। यह नागरिक अस्पताल में हुए, जिन पर 35 हजार रुपये खर्च हुए। चार बच्चों के मोतियाबिंद के ऑपरेशन करवाए गए, जिन पर एक लाख 20 हजार रुपये खर्च हुए। अन्य बीमारियों के इलाज पर स्वास्थ्य विभाग ने 70050 रुपये खर्च किए। इतनी राशि खर्च करने में जींद जिला प्रदेश में पहले नंबर पर आया है।
विज्ञापन