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डीईओ कार्यालय में दो घंटे हाई वोल्टेज ड्रामा
अमर उजाला ब्यूरो, जींद
Updated Wed, 26 Oct 2016 12:44 AM IST
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जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में धरने पर बैठी छात्राएं।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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दनौदा के राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल में अध्यापकों की कमी को पूरा करने की मांग को लेकर छात्राओं द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचने पर लगभग दो घंटे हाई वोल्टेज ड्रामा हुआ। स्कूल की लगभग 16 छात्राएं भारत की जनवादी नौजवान सभा की जिला कमेटी के प्रतिनिधियों के साथ पहुंची थीं। जब नौजवान सभा के सदस्यों के साथ छात्राएं जिला शिक्षा अधिकारी वंदना गुप्ता को ज्ञापन देने लगीं तो डीईओ ने छात्राओं से उनके परिजनों के बारे में पूछा। कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर जिला शिक्षा अधिकारी भड़क गईं और उनके साथ आए प्रतिनिधियों पर छात्राओं का गुमराह करने के आरोप लगाए।
इस पर नौजवान सभा के सदस्य भड़क गए और जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के अंदर ही छात्राओं को लेकर धरने पर बैठ गए। मामले बिगड़ता देखकर जिला शिक्षा अधिकारी ने इसकी सूचना एडीसी अमना तास्मीन और चाइल्ड हेल्प सेंटर परदी। सूचना मिलते ही चाइल्ड हेल्प केंद्र के टीम व शहर थाना पुलिस मौके पर पहुंची, जहां पर चाइल्ड हेल्प की टीम के सदस्यों ने जब छात्राओं से उनकी समस्याओं को जानने का प्रयास किया तो नौजवान सभा के सदस्य उन पर भी भड़क गए।
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बाद में जिला शिक्षा अधिकारी ने दनौदा के राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल के प्राचार्य व नरवाना खंड शिक्षा अधिकारी से संपर्क किया और स्कूल टाइम में ड्रेस पहने छात्राओं के आने के कारण पूछा। जहां पर प्राचार्य ने जानकारी दी कि जिला मुख्यालय पर पहुंची छात्राएं सुबह से ही स्कूल में नहीं पहुंचीं।
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इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने अधिकारियों को आदेश दिए कि इन छात्राओं की पहचान करके परिजनों को स्कूल में बुलाया जाए और इसके बारे में अवगत करवाएं। इसके बाद छात्राओं के परिजन स्कूल में पहुंचे, जिसको शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने इसके बारे में अवगत करवाया। लगभग दो घंटे के हंगामे के बाद जिला शिक्षा अधिकारी वंदना गुप्ता को नौजवान सभा के सदस्यों ने अध्यापकों की कमी से संबंधित ज्ञापन सौंपा और छात्राओं को अपने साथ लेकर चले गए। इसके बाद मामला शांत हुआ।
बिना परिजनों को सूचित किए छात्राओं को लेकर आए
जिला शिक्षा अधिकारी वंदना गुप्ता ने बताया कि उनके कार्यालय में 16 छात्राएं पहुंचीं, लेकिन उनके साथ आए लोग उनके परिजन नहीं हैं। स्कूल की छात्राएं होने के कारण उनकी सुरक्षा की जिम्मेवारी उनकी बनती है। लड़कियों को गुमराह करके नरवाना क्षेत्र के गांव दनौदा की छात्राओं को लेकर यहां पर आए हैं। नरवाना के खंड शिक्षा अधिकारी को स्कूल में भेजकर छात्राओं के परिजनों को स्कूल में बुलाया गया है। अगर स्कूल में अध्यापकों की कमी है तो इसके लिए छात्राओं के परिजन उनसे मिल सकते थे या छात्राएं अपने स्कूल के किसी टीचर को लेकर उनसे मिल सकती थीं। अध्यापकों की कमी का ज्ञापन शिक्षा निदेशालय भेज दिया है।
डीईओ ने सही तरीके से नहीं की बात
छात्राओं के साथ पहुंचे नौजवान सभा के सदस्य एवं जिला पार्षद मोनू दनौदा ने बताया कि स्कूल में अध्यापकों की कमी है। इसको लेकर छात्राओं को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी वंदना गुप्ता से मिले थे। जिला शिक्षा अधिकारी उनके साथ सही तरीके से बातचीत करने के बजाए दुर्व्यवहार किया। इसके कारण आक्रोषित होकर छात्राएं जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में धरने पर बैठ गईं। छात्राओं के साथ उनके परिजन आए हुए थे, लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी किसी की भी सुनवाई नहीं कर रही थी। जिला शिक्षा अधिकारी ने अध्यापकों की कमी को पूरा करने की बात करने की बजाए मामले को बढ़ाने का प्रयास किया है।
साइंस विषय का नहीं अध्यापक
मोनू दनौदा ने कहा कि उनके गांव के स्कूल में विज्ञान संकाय में केवल केमिस्ट्री की एक अध्यापिका है, जबकि फिजिक्स, मैथ के दो-दो टीचरों की जरूरत है। इसके कारण छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। अध्यापकों की मांगों को लेकर 23 दिन से गांव दनौदा में धरना जारी है, लेकिन वहां पर कोई सुनवाई नहीं कर रहा है।
छात्राओं की समस्या को सुना
चाइल्ड हेल्प लाइन से पहुंचे विनोद ने बताया कि डीईओ कार्यालय से सूचना मिली थी कि कुछ छात्राएं बिना परिजनों के काफी दूरी से आई हुई हैं, जिसकी सूचना पाकर वहां पहुंचे तो शुरुआत में कुछ लोगों ने छात्राओं से बातचीत नहीं करनी दी। बाद में पुलिस मौके पर पहुंची और उनकी समस्याएं सुनी गईं। इसकी पूरी रिपोर्ट अधिकारियों को दी जाएगी।