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जिंदगी के गुणा-भाग ने बना दिया गणित टीचर
नरेंद्र कुंडू/अमर उजाला जींद
Updated Sat, 17 Oct 2015 12:14 AM IST
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होश संभालते ही जिंदगी में आई मुसीबतों ने ऐसा उलझाया कि मुसीबतों के गुणा-भाग से प्रेरणा लेकर वह गणित की टीचर बन गईं। यह कहानी है अमरेहड़ी निवासी 23 वर्षीय रितू की। रितू ने विपरीत हालात से जूझकर मैथ से एमएससी की पढ़ाई पूरी की। अब रितू हिंदू कन्या महाविद्यालय में मैथ की प्राध्यापिका के तौर पर अपनी सेवाएं दे छात्राओं का जीवन संवार रही हैं। परिवार का पालन-पोषण भी कर रही हैं।
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मैथ प्राध्यापिका रितू अब दूसरी छात्राओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन गई हैं। रितू का अगला लक्ष्य अब नेट की परीक्षा पास करना है। रितू अपने इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए दिन-रात मेहनत कर रही हैं। रितू की मां कृष्णा देवी तथा उसकी बड़ी बहन संगीता भी उसके सपने को पूरा करने के लिए उसका पूरा सहयोग कर रही हैं।
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अमरेहड़ी निवासी रितू ने बताया कि वह डेढ़ वर्ष की थी जब उसके पिता राजकपूर की मौत हो गई थी। रितू तथा उसकी बड़ी बहन संगीता के पालन-पोषण की जिम्मेदारी उसकी मां कृष्णा देवी के कंधों पर आ गई। परिवार के पास आय का कोई दूसरा साधन नहीं होने से परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया।
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ऐसे हालात में उसकी मां ने आंगनबाड़ी में काम कर परिवार का पालन-पोषण किया। परिवार के पास पूर्वजों की लगभग डेढ़ एकड़ जमीन थी, जिसे ठेके पर देकर जो थोड़ी बहुत आमदनी होती थी, उससे रितू और उसकी बहन संगीता की पढ़ाई का खर्च चलता था। उन्होंने दसवीं कक्षा तक की पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से पूरी की।
इसके बाद रितू ने 12वीं कक्षा जींद के एसडी स्कूल और मैथ ऑनर्स से बीए की पढ़ाई हिंदू कन्या महाविद्यालय से पूरी की। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से बीएड व एमएससी की पढ़ाई पूरी कर रितू अब हिंदू कन्या महाविद्यालय में मैथ प्राध्यापिका के तौर पर अपनी सेवाएं दे रही हैं।
मां से मिली प्रेरणा
रितू का कहना है कि आज वह जो कुछ भी है उसके पीछे उसकी मां कृष्णा देवी का पूरा योगदान है। अपनी मां से प्रेरणा लेकर ही उसने अपनी पढ़ाई का सफर जारी रखा। साथ ही चचेरे भाई दीपक ने भी सहयोग किया।
गांव की सबसे ज्यादा पढ़ी-लिखी बेटी
रितू गांव की सबसे ज्यादा पढ़ी-लिखी बेटी है। इसी कारण उसे गत 15 अगस्त को गांव के स्कूल में तिरंगा लहराने का अवसर हासिल हुआ। रितू ने बताया कि जब सरकार की बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ अभियान के तहत स्कूल में तिरंगा लहराने के लिए निमंत्रण भेजा गया तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।