{"_id":"6a3c1f2e4c39f37017004c23","slug":"in-kaliyuga-remembering-the-name-is-the-path-to-salvation-swami-muktananda-maharaj-jind-news-c-199-1-jnd1005-155635-2026-06-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"कलियुग में नाम स्मरण ही मोक्ष का मार्ग : स्वामी मुक्तानंद महाराज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कलियुग में नाम स्मरण ही मोक्ष का मार्ग : स्वामी मुक्तानंद महाराज
विज्ञापन
फोटो 10 नरवाना। सुंदरकांड पाठ का श्रवण करते हुए श्रद्धालु । स्रोत श्रद्धालु
नरवाना। दुर्गा मंदिर में पिछले चार माह से नियमित रूप से आयोजित हनुमान चालीसा और सुंदरकांड पाठ के दौरान बुधवार को स्वामी मुक्तानंद महाराज ने श्रद्धालुओं को रामचरितमानस के सुंदरकांड की महिमा का विस्तार से वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि कलियुग में जैसे-जैसे पाप और अत्याचार बढ़ेंगे, वैसे-वैसे मनुष्य का जीवन कठिन होता जाएगा। ऐसे समय में ईश्वर के नाम का स्मरण ही जीवन को सही दिशा देने और कष्टों से मुक्ति का सबसे सरल उपाय है।
स्वामी मुक्तानंद ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस में स्पष्ट लिखा है कि कलियुग केवल नाम अधारा, सुमिरि सुमिरि नर उतरहिं पारा। इसका अर्थ है कि कलियुग में केवल प्रभु के नाम का स्मरण ही मनुष्य को भवसागर से पार लगाने में सक्षम है।
विज्ञापन
उन्होंने यह भी कहा कि इस युग में कठोर तप, यज्ञ या कठिन साधना की अपेक्षा सच्चे मन से अपने इष्टदेव का स्मरण अधिक फलदायी है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त करने का सबसे सहज माध्यम श्रद्धा और विश्वास के साथ हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का नियमित पाठ करना है।
इससे मनुष्य के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मानसिक शांति के साथ आध्यात्मिक उन्नति भी प्राप्त होती है। प्रवचन के बाद श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से गायन शैली में सुंदरकांड का मधुर पाठ किया। पूरे मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा और श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर दिखाई दिए।
कार्यक्रम में दुर्गा मंदिर ट्रस्ट और गीता परिवार के सदस्यों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। अंत में सुंदरकांड पाठ की पूर्णाहुति के बाद सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
फोटो 10 नरवाना। सुंदरकांड पाठ का श्रवण करते हुए श्रद्धालु । स्रोत श्रद्धालु
फोटो 11 नरवाना। सुंदरकांड का पाठ सुनाते हुए स्वामी मुक्तानंद महाराज। स्रोत श्रद्धालु।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि कलियुग में जैसे-जैसे पाप और अत्याचार बढ़ेंगे, वैसे-वैसे मनुष्य का जीवन कठिन होता जाएगा। ऐसे समय में ईश्वर के नाम का स्मरण ही जीवन को सही दिशा देने और कष्टों से मुक्ति का सबसे सरल उपाय है।
विज्ञापन
स्वामी मुक्तानंद ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस में स्पष्ट लिखा है कि कलियुग केवल नाम अधारा, सुमिरि सुमिरि नर उतरहिं पारा। इसका अर्थ है कि कलियुग में केवल प्रभु के नाम का स्मरण ही मनुष्य को भवसागर से पार लगाने में सक्षम है।
विज्ञापन
उन्होंने यह भी कहा कि इस युग में कठोर तप, यज्ञ या कठिन साधना की अपेक्षा सच्चे मन से अपने इष्टदेव का स्मरण अधिक फलदायी है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त करने का सबसे सहज माध्यम श्रद्धा और विश्वास के साथ हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का नियमित पाठ करना है।
इससे मनुष्य के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मानसिक शांति के साथ आध्यात्मिक उन्नति भी प्राप्त होती है। प्रवचन के बाद श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से गायन शैली में सुंदरकांड का मधुर पाठ किया। पूरे मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा और श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर दिखाई दिए।
कार्यक्रम में दुर्गा मंदिर ट्रस्ट और गीता परिवार के सदस्यों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। अंत में सुंदरकांड पाठ की पूर्णाहुति के बाद सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
फोटो 10 नरवाना। सुंदरकांड पाठ का श्रवण करते हुए श्रद्धालु । स्रोत श्रद्धालु
फोटो 11 नरवाना। सुंदरकांड का पाठ सुनाते हुए स्वामी मुक्तानंद महाराज। स्रोत श्रद्धालु।