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योग से पहचान : रधाना की ज्योति चहल बनीं मरीजों और बच्चों की उम्मीद
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30जेएनडी32: योग के क्षेत्र में सराहनीय कार्य करने पर गणतंत्र दिवस पर जुलाना में मुख्यातिथि चेय
जींद। योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम ही नहीं बल्कि जीवन को नई दिशा देने की शक्ति भी रखता है। इस बात को सच कर दिखाया है गांव रधाना निवासी योग प्रशिक्षिका ज्योति चहल ने। ज्योति ने योग को अपना मिशन बनाकर न सिर्फ खुद पहचान बनाई बल्कि सैंकड़ों बच्चों और मरीजों की जिंदगी भी बदल दी।
योग प्रशिक्षिका ज्योति चहल बताती हैं कि वह अब तक करीब 2000 बच्चों को योग का प्रशिक्षण दे चुकी हैं। उनके मार्गदर्शन में प्रशिक्षित बच्चों ने जिला व प्रदेश स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर कई पदक जीते हैं और जींद जिले का नाम रोशन किया है। वर्तमान में वे चयनित प्रतिभाशाली बच्चों को नेशनल स्तर की प्रतियोगिताओं की तैयारी करवा रही हैं ताकि वह देशभर में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सकें।
उन्होंने योग के माध्यम से पैरालाइज, घुटनों के दर्द, दमा जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे 50 से अधिक मरीजों को स्वस्थ करने में अहम भूमिका निभाई है। नियमित योगाभ्यास, प्राणायाम और सही जीवनशैली के जरिए उन्होंने मरीजों को दवाओं पर निर्भरता से काफी हद तक मुक्त किया है।मरीज भी उनके प्रयासों की खुले दिल से सराहना करते हैं।
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ज्योति प्रदेश स्तर पर गोल्ड मेडल जीत और नेशनल स्तर पर सिल्वर पदक अपने नाम कर चुकी हैं। बीते तीन वर्षों से गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों में उनकी योग टीम लगातार प्रथम स्थान प्राप्त कर रही है जो उनकी मेहनत और समर्पण का प्रमाण है।
खुर्द गांव में बच्चों व युवाओं को योग का प्रशिक्षण देती हैं
ज्योति चहल पिंडारा डिस्पेंसरी में कार्यरत हैं। शाम को वह शामलो खुर्द गांव की व्यायामशाला में बच्चों व युवाओं को योग का प्रशिक्षण देती हैं। उनका कहना है कि योग को यदि जीवन का हिस्सा बना लिया जाए तो बड़ी से बड़ी बीमारी को भी मात दी जा सकती है।
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योग प्रशिक्षिका ज्योति चहल बताती हैं कि वह अब तक करीब 2000 बच्चों को योग का प्रशिक्षण दे चुकी हैं। उनके मार्गदर्शन में प्रशिक्षित बच्चों ने जिला व प्रदेश स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर कई पदक जीते हैं और जींद जिले का नाम रोशन किया है। वर्तमान में वे चयनित प्रतिभाशाली बच्चों को नेशनल स्तर की प्रतियोगिताओं की तैयारी करवा रही हैं ताकि वह देशभर में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सकें।
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उन्होंने योग के माध्यम से पैरालाइज, घुटनों के दर्द, दमा जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे 50 से अधिक मरीजों को स्वस्थ करने में अहम भूमिका निभाई है। नियमित योगाभ्यास, प्राणायाम और सही जीवनशैली के जरिए उन्होंने मरीजों को दवाओं पर निर्भरता से काफी हद तक मुक्त किया है।मरीज भी उनके प्रयासों की खुले दिल से सराहना करते हैं।
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ज्योति प्रदेश स्तर पर गोल्ड मेडल जीत और नेशनल स्तर पर सिल्वर पदक अपने नाम कर चुकी हैं। बीते तीन वर्षों से गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों में उनकी योग टीम लगातार प्रथम स्थान प्राप्त कर रही है जो उनकी मेहनत और समर्पण का प्रमाण है।
खुर्द गांव में बच्चों व युवाओं को योग का प्रशिक्षण देती हैं
ज्योति चहल पिंडारा डिस्पेंसरी में कार्यरत हैं। शाम को वह शामलो खुर्द गांव की व्यायामशाला में बच्चों व युवाओं को योग का प्रशिक्षण देती हैं। उनका कहना है कि योग को यदि जीवन का हिस्सा बना लिया जाए तो बड़ी से बड़ी बीमारी को भी मात दी जा सकती है।