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फसल अवशेष का प्रबंधन कर उठाएं लाभ : डीसी
Tue, 12 Sep 2023 11:54 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Tue, 12 Sep 2023 11:54 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। बहुत से लोग अब फसलों के अवशेष से लाखों रुपये कमा रहे हैं। अब फसल अवशेष परेशानी का विषय नहीं है। तकनीक के माध्यम से फसलों के अवशेषों का कई प्रकार से प्रयोग किया जा सकता है। किसान खेतों में फसल अवशेष जलाए नहीं बल्कि इसे पशु चारे के प्रयोग में लाएं। ये बातें डीसी मोहम्मद इमरान रजा ने किसानों को जागरूक करते हुए कहीं।
उन्होंने बताया कि पहले किसान फसलों के अवशेष को खेतों में जला देते थे जिससे उस जमीन को नुकसान होता था बल्कि पर्यावरण भी प्रदूषित होता था। सरकार ने फसल अवशेष प्रबंधन की समस्या को गंभीरता से लेते हुए कई योजनाएं चलाईं और किसानों को जागरूक किया। सरकार के इस कदम से फसल अवशेष प्रबंधन को बल मिला और आज कई लोग केवल फसल के अवशेषों से ही लाखों रुपये कमा रहे हैं। फसल अवशेष का प्रयोग अब बिजली और प्लाई बोर्ड बनाने आदि कामों में भी होने लगा है। जिले के किसानों को भी फसल अवशेष प्रबंधन की ओर कदम बढ़ाते हुए काम करना होगा। इससे उनकी आमदनी में भी बढ़ोतरी होगी और वातावरण सहित जमीन को नुकसान होने से भी बचाया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि यदि इसी तरह से किसान फानों को जलाते रहे तो भविष्य में धरती की उपजाऊ क्षमता भी कम होती रहेगी। उन्होंने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय, एनजीटी व हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी इसको लेकर गंभीर है। अवशेष जलाने के मामलों में भारी जुर्माना व सजा का प्रावधान किया गया है। यदि कोई किसान या व्यक्ति खेतों अवशेष जलाता है तो आईपीसी की धारा 188 के तहत छह महीने की जेल व जुर्माना दोनों का प्रावधान है।
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जींद। बहुत से लोग अब फसलों के अवशेष से लाखों रुपये कमा रहे हैं। अब फसल अवशेष परेशानी का विषय नहीं है। तकनीक के माध्यम से फसलों के अवशेषों का कई प्रकार से प्रयोग किया जा सकता है। किसान खेतों में फसल अवशेष जलाए नहीं बल्कि इसे पशु चारे के प्रयोग में लाएं। ये बातें डीसी मोहम्मद इमरान रजा ने किसानों को जागरूक करते हुए कहीं।
उन्होंने बताया कि पहले किसान फसलों के अवशेष को खेतों में जला देते थे जिससे उस जमीन को नुकसान होता था बल्कि पर्यावरण भी प्रदूषित होता था। सरकार ने फसल अवशेष प्रबंधन की समस्या को गंभीरता से लेते हुए कई योजनाएं चलाईं और किसानों को जागरूक किया। सरकार के इस कदम से फसल अवशेष प्रबंधन को बल मिला और आज कई लोग केवल फसल के अवशेषों से ही लाखों रुपये कमा रहे हैं। फसल अवशेष का प्रयोग अब बिजली और प्लाई बोर्ड बनाने आदि कामों में भी होने लगा है। जिले के किसानों को भी फसल अवशेष प्रबंधन की ओर कदम बढ़ाते हुए काम करना होगा। इससे उनकी आमदनी में भी बढ़ोतरी होगी और वातावरण सहित जमीन को नुकसान होने से भी बचाया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि यदि इसी तरह से किसान फानों को जलाते रहे तो भविष्य में धरती की उपजाऊ क्षमता भी कम होती रहेगी। उन्होंने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय, एनजीटी व हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी इसको लेकर गंभीर है। अवशेष जलाने के मामलों में भारी जुर्माना व सजा का प्रावधान किया गया है। यदि कोई किसान या व्यक्ति खेतों अवशेष जलाता है तो आईपीसी की धारा 188 के तहत छह महीने की जेल व जुर्माना दोनों का प्रावधान है।
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