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पूर्व मुख्यमंत्री ने किया अनाज मंडियों और जलभराव के क्षेत्रों का दौरा
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पौली गांव में खेत में घुसकर जलभराव की स्थिति दिखाता किसान। संवाद
- फोटो : Jind
जींद/जुलाना/उचाना। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने शुक्रवार को जिले की अनाज मंडियों व जलभराव वाले क्षेत्रों का दौरा किया। इस दौरान वह खटकड़ टोल पर चल रहे किसानों के धरने पर भी गए। हुड्डा ने कहा कि किसानों को किसी भी प्रकार की राहत देने में प्रदेश सरकार पूरी तरह से विफल रही है।
रोहतक से आते हुए हुड्डा ने सबसे पहले जुलाना क्षेत्र के जलभराव वाले क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने पौली गांव में जलभराव की जानकारी ली। यहां एक किसान ने खेत में घुसकर दिखाया कि कितना पानी है। इस पर किसानों ने कहा कि उनकी धान की फसल तो खराब हो गई, अब आने वाली गेहूं की बिजाई भी नहीं हो पाएगी। हुड्डा ने कहा कि किसानों की इस समस्या को विधानसभा में उठाएंगे। हुड्डा ने कहा कि दो माह पहले हुई बारिश के पानी की निकासी अभी तक नहीं हो पाई है। इसके बाद वह उचाना के लिए निकल गए। यहां उपमंडल कार्यालय में चल रहे धरने पर पहुंचे। हुड्डा ने कहा कि आज प्रदेश सरकार से हर वर्ग के लोग तंग हैं। किसानों को अपनी पीआर धान बेचने के लिए कई-कई दिन मंडी रुकना पड़ रहा है। बाजरे का एमएसपी भाव किसानों को नहीं मिल रहा है। आज व्यापारी, युवा , मजदूर सब सरकार की कार्यप्रणाली से तंग है। इस मौके पर सफीदों से कांग्रेसी विधायक सुभाष गांगोली, पूर्व विधायक परमेंद्र सिंह ढूल, संजय बीबीपुर, सुरेश गोयत झांझ, धर्मेंद्र सिंह ढुल, रोहित दलाल, मनजीत लाठर, मोहित लाठर, प्रदीप लाठर, आजाद पालवां, एडवोकेट मनोज व सिक्किम सफा खेड़ी मौजूद रहे।
किसानों को नहीं मिल रहे बाजरे व धान के सही भाव
भूपेंद्र हुड्डा ने कहा कि मंडियों में किसान को धान का एमएसपी नहीं मिल रहा है। नमी के नाम पर कटौती की जा रही है। इसके अलावा बाजरे पर सरकार ने 600 रुपये प्रति क्विंटल भावांतर देने की बात कही है, लेकिन बाजरा 1100 से 1200 रुपये प्रति क्विंटल तक ही कि रहा है। इसके बावजूद यह 1800 रुपये प्रति क्विंटल हुआ, जबकि बाजरे का एमएसपी 2250 रुपये प्रतिक्विंटल है।
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रोहतक से आते हुए हुड्डा ने सबसे पहले जुलाना क्षेत्र के जलभराव वाले क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने पौली गांव में जलभराव की जानकारी ली। यहां एक किसान ने खेत में घुसकर दिखाया कि कितना पानी है। इस पर किसानों ने कहा कि उनकी धान की फसल तो खराब हो गई, अब आने वाली गेहूं की बिजाई भी नहीं हो पाएगी। हुड्डा ने कहा कि किसानों की इस समस्या को विधानसभा में उठाएंगे। हुड्डा ने कहा कि दो माह पहले हुई बारिश के पानी की निकासी अभी तक नहीं हो पाई है। इसके बाद वह उचाना के लिए निकल गए। यहां उपमंडल कार्यालय में चल रहे धरने पर पहुंचे। हुड्डा ने कहा कि आज प्रदेश सरकार से हर वर्ग के लोग तंग हैं। किसानों को अपनी पीआर धान बेचने के लिए कई-कई दिन मंडी रुकना पड़ रहा है। बाजरे का एमएसपी भाव किसानों को नहीं मिल रहा है। आज व्यापारी, युवा , मजदूर सब सरकार की कार्यप्रणाली से तंग है। इस मौके पर सफीदों से कांग्रेसी विधायक सुभाष गांगोली, पूर्व विधायक परमेंद्र सिंह ढूल, संजय बीबीपुर, सुरेश गोयत झांझ, धर्मेंद्र सिंह ढुल, रोहित दलाल, मनजीत लाठर, मोहित लाठर, प्रदीप लाठर, आजाद पालवां, एडवोकेट मनोज व सिक्किम सफा खेड़ी मौजूद रहे।
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किसानों को नहीं मिल रहे बाजरे व धान के सही भाव
भूपेंद्र हुड्डा ने कहा कि मंडियों में किसान को धान का एमएसपी नहीं मिल रहा है। नमी के नाम पर कटौती की जा रही है। इसके अलावा बाजरे पर सरकार ने 600 रुपये प्रति क्विंटल भावांतर देने की बात कही है, लेकिन बाजरा 1100 से 1200 रुपये प्रति क्विंटल तक ही कि रहा है। इसके बावजूद यह 1800 रुपये प्रति क्विंटल हुआ, जबकि बाजरे का एमएसपी 2250 रुपये प्रतिक्विंटल है।

जलभराव का निरीक्षण करते पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा। संवाद- फोटो : Jind
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