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धूमधाम से मनाया गया गोगा नवमी का त्योहार
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भारत सिनेमा के पास स्थित गोगा पीर के मंदिर में पूजा-अर्चना करते श्रद्धालु। संवाद।
- फोटो : Jind
संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। जिले में शनिवार को गोगा नवमी का त्योहार धूमधाम से मनाया गया। जिले के भारी संख्या में लोग राजस्थान में स्थित गोगा पीर की समाधि पर मथा टेकने के लिए गए। इसके अलावा शहर में स्थित गोगा पीर के मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की भीड़ रही।
गोगा नवमी का त्योहार अष्टमी के बाद आने वाले नवमी के दिन मनाया जाता है। इस दिन सुबह ग्रामीण क्षेत्रों के लोग अपने पड़ोसियों को गुड़ का प्रसाद वितरित करते हैं। इस प्रसाद को बाद में गोगा पीर के मंदिरों में चढ़ाया जाता है। जिले में गोगा पीर की काफी मान्यता है। शहर में भारत सिनेमा के पास स्थित गोगा पीर के मंदिर में दिनभर श्रद्धालुओं की पूजा-अर्चना करने के लिए भीड़ रही। इसी प्रकार रेलवे रोड पर स्थित गोगा पीर के मंदिर में भी श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन किए और गोगा पीर की पूजा की।
गोगा नवमी के दिन लोग अपने घरों में खीर बनाते हैं तथा आसपास के लोगों को भी वितरित करते हैं। वैसे तो हर महीने की नवमी को खीर बनाई जाती है लेकिन श्रीकृष्ण जन्माष्टी के बाद आने वाली नवमी के दिन यह गोगा पीर का जन्म बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। दिन भर पीर की छड़ी लेकर डमरू बजाने वाले लोग लोगों से प्रसाद ग्रहण करते हैं। इसमें काफी लोग उनको पैसे, आटा व अन्न का दान करते हैं। यह लोग इस दान को इकट्ठा करके राजस्थान में स्थित गोगा मेड़ी के गोगा पीर के मंदिर पर चढ़ाने जाते हैं। शहर में शनिवार को हो पीर जी हो पीर जी के गाने बजते रहे। शहर में गोगा पीर के केवल दो ही मंदिर हैं। इन मंदिरों में मेला भी लगता है। अश्विन माह की नवमी के दिन इन दोनों मंदिरों के सामने भारी मेला लगता है।
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जींद। जिले में शनिवार को गोगा नवमी का त्योहार धूमधाम से मनाया गया। जिले के भारी संख्या में लोग राजस्थान में स्थित गोगा पीर की समाधि पर मथा टेकने के लिए गए। इसके अलावा शहर में स्थित गोगा पीर के मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की भीड़ रही।
गोगा नवमी का त्योहार अष्टमी के बाद आने वाले नवमी के दिन मनाया जाता है। इस दिन सुबह ग्रामीण क्षेत्रों के लोग अपने पड़ोसियों को गुड़ का प्रसाद वितरित करते हैं। इस प्रसाद को बाद में गोगा पीर के मंदिरों में चढ़ाया जाता है। जिले में गोगा पीर की काफी मान्यता है। शहर में भारत सिनेमा के पास स्थित गोगा पीर के मंदिर में दिनभर श्रद्धालुओं की पूजा-अर्चना करने के लिए भीड़ रही। इसी प्रकार रेलवे रोड पर स्थित गोगा पीर के मंदिर में भी श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन किए और गोगा पीर की पूजा की।
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गोगा नवमी के दिन लोग अपने घरों में खीर बनाते हैं तथा आसपास के लोगों को भी वितरित करते हैं। वैसे तो हर महीने की नवमी को खीर बनाई जाती है लेकिन श्रीकृष्ण जन्माष्टी के बाद आने वाली नवमी के दिन यह गोगा पीर का जन्म बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। दिन भर पीर की छड़ी लेकर डमरू बजाने वाले लोग लोगों से प्रसाद ग्रहण करते हैं। इसमें काफी लोग उनको पैसे, आटा व अन्न का दान करते हैं। यह लोग इस दान को इकट्ठा करके राजस्थान में स्थित गोगा मेड़ी के गोगा पीर के मंदिर पर चढ़ाने जाते हैं। शहर में शनिवार को हो पीर जी हो पीर जी के गाने बजते रहे। शहर में गोगा पीर के केवल दो ही मंदिर हैं। इन मंदिरों में मेला भी लगता है। अश्विन माह की नवमी के दिन इन दोनों मंदिरों के सामने भारी मेला लगता है।
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