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Jind News: प्राकृतिक खेती अपनाकर घटा सकते हैं खेती का खर्च

Thu, 08 Oct 2026 02:48 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 08 Oct 2026 02:48 AM IST
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Farming costs can be reduced by adopting natural farming.
फोटो 07जेएनडी15-गोसाईं खेड़ा में प्राकृतिक खेती पर लगे ​शिविर में किसानों को जानकारी देते हुए ड
जींद। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के अधीन कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से गांव गोसाईं खेड़ा में प्राकृतिक खेती पर बुधवार को एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर लगाया गया। इसमें किसानों और महिला किसानों को रासायनिक खाद व कीटनाशकों के विकल्प के तौर पर प्राकृतिक खेती की तकनीकों की जानकारी दी गई।
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केवीके की जिला विस्तार विशेषज्ञ डॉ. प्रीति मलिक और डॉ. धीरज ने किसानों को प्राकृतिक खेती के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया। डॉ. धीरज ने मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन पर जानकारी देते हुए कहा कि लंबे समय तक रासायनिक खादों के इस्तेमाल से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है। मिट्टी में जैविक कार्बन और लाभकारी सूक्ष्मजीवों की सक्रियता बढ़ाने पर जोर दिया गया।
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डॉ. प्रीति मलिक ने किसानों को देसी गाय के गोबर और गोमूत्र से जीवामृत, बीजामृत और घनजीवामृत तैयार करने की विधि समझाई। उन्होंने फसल अवशेषों को जलाने के बजाय खेत में मल्चिंग के लिए इस्तेमाल करने की सलाह दी। इससे मिट्टी में नमी बनाए रखने और केंचुओं की सक्रियता बढ़ाने में मदद मिलती है। शिविर के समापन पर किसानों ने विशेषज्ञों से प्राकृतिक खेती से जुड़े सवाल किए। विशेषज्ञों ने पीजीएस-इंडिया जैसे जैविक प्रमाणीकरण और प्राकृतिक उत्पादों के विपणन की जानकारी भी दी।
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