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Jind News: दबलैन और सच्चा खेड़ा में किसानों ने धान की फसल पर चलाया ट्रैक्टर
Sun, 20 Jul 2025 11:59 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sun, 20 Jul 2025 11:59 PM IST
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20जेएनडी18- ट्रैक्टर से खराब हुई धान की फसल को नष्ट करते हुए किसान। संवाद
नरवाना। खेतों में इस समय धान की फसल लहलहानी चाहिए थी लेकिन नरवाना के गांव दबलैन और सच्चाखेड़ा के किसान बेबसी और आंसुओं से भीग चुके हैं। खराब बीज ने उनकी महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया। दबलैन में करीब 4 एकड़ धान की फसल खराब होने के कारण किसानों को खुद ही इस पर ट्रैक्टर चलाना पड़ा।
गांव दबलैन निवासी किसान नवीन ने बताया कि उसने अपने खेत में धान की फसल लगाई थी लेकिन बीज खराब क्वालिटी का होने की वजह से पौधे नहीं बढ़े। वह सूख गई। इसलिए पांच किले में खड़ी फसल पर ट्रैक्टर चलाना पड़ा। अब तो आत्महत्या की नौबत आ गई है।
किसान की यह मार्मिक पुकार पूरे तंत्र को झकझोरने के लिए काफी है। सिर्फ दबलैन ही नहीं, बीते शुक्रवार को सच्चा खेड़ा गांव में भी किसानों को इसी तरह की मुसीबत का सामना करना पड़ा था। वहां भी खराब बीज ने फसल को बर्बाद कर दिया।
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कई किसानों ने आरोप लगाया कि बीज कंपनी की ओर से दिए गए बीज नकली या खराब गुणवत्ता के थे। किसानों ने कहा फसल बर्बाद होने के बाद अब किसान कर्जे में डूबने लगे हैं। खेत खाली हैं, जेब खाली हैं और आंखों में आंसू हैं।
दबलैन गांव में खराब हुई फसल नष्ट कर रहे किसानों का कहना है कि जब अपने-अपने खेतों में धान लगवाई थी तो करीब 25 हजार रुपये का खर्च आया था।
उन्होंने बताया कि 4000 हजार तो धान लगाने वाले ले जाते हैं। प्रति एकड़ के हिसाब से और उससे पहले जब खेत को धान लगाने के लिए तैयार किया जाता है। 2000 रुपये ट्रैक्टर वाले ले जाते हैं।
इसके बाद खाद, दवाइयां और स्प्रे आदि लगाकर 25 हजार कुल खर्चा आ जाता है लेकिन कंपनी के इस खराब बीज से फसल तो नष्ट हो गई है। दोबारा फसल लगानी पड़ेगी तो उतना ख ही खर्च होगा।
किसान राजकुमार, नवीन और कृष्ण ने बताया कि उन्होंने ठेका पर लेकर फसल लगाई हुई है। अब इतना खर्च हो चुका है कि किसान क्या बचाएगा और अपने बच्चों को क्या खिलाएगा, क्योंकि किसान की जेब खाली हो चुकी है।
सरकार किसानों की ओर से ध्यान नहीं दे रही और बीज कंपनियां नकली बीज बनाकर किसानों को बेच रहे हैं और किसानों को कर्ज में डूबने का काम कर रहे हैं इसलिए किसान आत्महत्या करने को भी मजबूर हैं।
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गांव दबलैन निवासी किसान नवीन ने बताया कि उसने अपने खेत में धान की फसल लगाई थी लेकिन बीज खराब क्वालिटी का होने की वजह से पौधे नहीं बढ़े। वह सूख गई। इसलिए पांच किले में खड़ी फसल पर ट्रैक्टर चलाना पड़ा। अब तो आत्महत्या की नौबत आ गई है।
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किसान की यह मार्मिक पुकार पूरे तंत्र को झकझोरने के लिए काफी है। सिर्फ दबलैन ही नहीं, बीते शुक्रवार को सच्चा खेड़ा गांव में भी किसानों को इसी तरह की मुसीबत का सामना करना पड़ा था। वहां भी खराब बीज ने फसल को बर्बाद कर दिया।
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कई किसानों ने आरोप लगाया कि बीज कंपनी की ओर से दिए गए बीज नकली या खराब गुणवत्ता के थे। किसानों ने कहा फसल बर्बाद होने के बाद अब किसान कर्जे में डूबने लगे हैं। खेत खाली हैं, जेब खाली हैं और आंखों में आंसू हैं।
दबलैन गांव में खराब हुई फसल नष्ट कर रहे किसानों का कहना है कि जब अपने-अपने खेतों में धान लगवाई थी तो करीब 25 हजार रुपये का खर्च आया था।
उन्होंने बताया कि 4000 हजार तो धान लगाने वाले ले जाते हैं। प्रति एकड़ के हिसाब से और उससे पहले जब खेत को धान लगाने के लिए तैयार किया जाता है। 2000 रुपये ट्रैक्टर वाले ले जाते हैं।
इसके बाद खाद, दवाइयां और स्प्रे आदि लगाकर 25 हजार कुल खर्चा आ जाता है लेकिन कंपनी के इस खराब बीज से फसल तो नष्ट हो गई है। दोबारा फसल लगानी पड़ेगी तो उतना ख ही खर्च होगा।
किसान राजकुमार, नवीन और कृष्ण ने बताया कि उन्होंने ठेका पर लेकर फसल लगाई हुई है। अब इतना खर्च हो चुका है कि किसान क्या बचाएगा और अपने बच्चों को क्या खिलाएगा, क्योंकि किसान की जेब खाली हो चुकी है।
सरकार किसानों की ओर से ध्यान नहीं दे रही और बीज कंपनियां नकली बीज बनाकर किसानों को बेच रहे हैं और किसानों को कर्ज में डूबने का काम कर रहे हैं इसलिए किसान आत्महत्या करने को भी मजबूर हैं।

20जेएनडी18- ट्रैक्टर से खराब हुई धान की फसल को नष्ट करते हुए किसान। संवाद