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खाद की कमी के कारण किसानों को उठाना पड़ रहा नुकसान : राजेश
Fri, 08 Aug 2025 11:40 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Fri, 08 Aug 2025 11:40 PM IST
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08जेएनडी04-मांगों को लेकर तहसीलदार शीलिनी लाठर को ज्ञापन सौंपते हुए हरियाणा किसान मजदूर संघर्ष
जींद। किसानों और मजदूरों की समस्याों के समाधान की मांग को लेकर हरियाणा किसान मजदूर संघर्ष मोर्चा ने तहसीलदार शालिनी लाठर को ज्ञापन सौंपा। राजेश मोर, महासिंह मौण, उदयवीर सरपंच, ईश्वर खर्ब और चेयरमैन सतीश ने कहा कि हरियाणा में किसानों को खाद की कमी के कारण नुकसान उठाना पड़ रहा है। खाद की कमी दूर की जाए और खाद वितरण प्रणाली में सुधार किए जाएं।
उन्होंने कहा कि हरियाणा में धान की खरीद 15 सितंबर से शुरू की जाएगी क्योंकि धान की रोपाई 15 जून से शुरू हो जाती है। 90 दिन में फसल पक कर तैयार हो जाती है और पिछले वर्ष की तरह 2000 प्रति एकड़ धान की फसल पर प्रोत्साहन राशि दी जाए। बासमती धान की एमएसपी खरीद को सुनिश्चित किया जाए।
जलभराव से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए प्रदेश में नदी नालों की सफाई, नदियों पर बांध और जहां नदी नाला दूर है, वहां पर ड्रेन और पाइप लाइन की व्यवस्था की जाए। मंडी में किसानों के साथ अनाज की तुलाई में हेराफेरी रोकने के लिए कंप्यूटर काटो का प्रयोग किया जाए।
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ट्यूबवेल कनेक्शन देने की प्रक्रिया सरल की जाए। बिजली बिल 2025 और स्मार्ट मीटर लगाने वाले फैसले को रद्द किया जाए। बेसहारा पशुओं का प्रबंधन किया जाए। धान में फीजी वायरस से हुए भारी नुकसान की भरपाई की जाए और फीजी वायरस से निपटने के लिए सरकार जरूरी कदम उठाए।
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उन्होंने कहा कि हरियाणा में धान की खरीद 15 सितंबर से शुरू की जाएगी क्योंकि धान की रोपाई 15 जून से शुरू हो जाती है। 90 दिन में फसल पक कर तैयार हो जाती है और पिछले वर्ष की तरह 2000 प्रति एकड़ धान की फसल पर प्रोत्साहन राशि दी जाए। बासमती धान की एमएसपी खरीद को सुनिश्चित किया जाए।
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जलभराव से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए प्रदेश में नदी नालों की सफाई, नदियों पर बांध और जहां नदी नाला दूर है, वहां पर ड्रेन और पाइप लाइन की व्यवस्था की जाए। मंडी में किसानों के साथ अनाज की तुलाई में हेराफेरी रोकने के लिए कंप्यूटर काटो का प्रयोग किया जाए।
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ट्यूबवेल कनेक्शन देने की प्रक्रिया सरल की जाए। बिजली बिल 2025 और स्मार्ट मीटर लगाने वाले फैसले को रद्द किया जाए। बेसहारा पशुओं का प्रबंधन किया जाए। धान में फीजी वायरस से हुए भारी नुकसान की भरपाई की जाए और फीजी वायरस से निपटने के लिए सरकार जरूरी कदम उठाए।