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Jind News: कड़ाके की ठंड पर भारी पड़ी श्रद्धालुओं की आस्था

Mon, 30 Dec 2024 11:32 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 30 Dec 2024 11:32 PM IST
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Faith of devotees outweighed by severe cold
जींद। पांडू पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ पर सोमवार को साल की अंतिम सोमवती अमावस्या पर हजारों श्रद्धालुओं ने सरोवर में स्नान किया और पिंडदान करके तर्पण किया। ऐतिहासिक पिंडतारक तीर्थ पर रविवार शाम से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। कड़ाके की ठंड पर श्रद्धालुओं की आस्था भारी पड़ी। रविवार की पूरी रात धर्मशालाओं में सत्संग और कीर्तन का आयोजन चलता रहा। सोमवार को अल सुबह से ही श्रद्धालुओं ने सरोवर में स्नान और पिंडदान शुरू कर दिया जो दोपहर बाद तक चलता रहा। इस मौके पर दूर दराज से आए श्रद्धालुओं ने अपने पितरोंं की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया और सूर्यदेव को जलार्पण करके सुख समृद्धि की कामना की।
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क्या है महत्व
पिंडतारक तीर्थ के संबंध में किदवंती है कि महाभारत युद्ध के बाद पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पांडवों ने यहां 12 वर्ष तक सोमवती अमावस्या की प्रतीक्षा में तपस्या की। बाद में सोमवती अमावस्या के आने पर युद्ध में मारे गए परिजनों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया। तभी से यह माना जाता है कि पांडू पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ पर पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष मिल जाता है। महाभारत काल से ही पितृ विसर्जन की अमावस्या, विशेषकर सोमवती अमावस्या पर यहां पिंडदान करने का विशेष महत्व है। यहां पिंडदान करने के लिए विभिन्न प्रांतों के लोग आते हैं।
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मेले में श्रद्धालुओं ने जमकर की खरीदारी, पुलिसबल रहा तैनात
पिंडारा तीर्थ पर सोमवती अमावस्या पर पहुंचे श्रद्धालुओं ने जमकर खरीददारी की। तीर्थ पर जगह-जगह लोगों ने सामान बेचने के लिए फड़े लगाई हुई थी। जिस पर बच्चों तथा महिलाओं ने खरीददारी की। बच्चों ने जहां अपने लिए खिलौने खरीदे तो वहीं बड़ों ने भी घर के लिए सामान खरीदे। तीर्थ पर श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए पुलिसबल तैनात किया गया था। सरोवर में नहाते हुए कोई अनहोनी घटना न हो, इसके लिए गोताखोर व किश्ती का विशेष प्रबंध किया गया था। पुलिसकर्मियों ने मेले में उमड़ी भीड़ को व्यवस्थित करने का काम किया। बकायदा पुलिसकर्मी मेले में गश्त करते रहे।
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बाक्स
जयंती देवी मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि सोमवती अमावस्या श्रद्धालुओं के लिए विशेष फलदायी रही। इस दिन स्नान और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। इसके चलते इस दिन पूजा-पाठ व पितृ तर्पण का विशेष महत्व बढ़ गया है।
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