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जींद: पिंडारा तीर्थ पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी, पांडवों ने भी अपने पितरों के तर्पण के लिए यहां किया था स्नान
Wed, 06 Oct 2021 05:06 PM IST
Trainee Trainee
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद (हरियाणा)
Published by: Trainee Trainee
Updated Wed, 06 Oct 2021 05:06 PM IST
सार
अमावस्या के मौके पर पिंडारा तीर्थ में स्नान का खास महत्व माना जाता है। मान्यता है कि महाभारत के युद्ध के बाद खुद पांडवों ने भी अपने पितरों के तर्पण के लिए इसी तीर्थ में स्नान कर पिंडदान किया था।
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पिंडारा तीर्थ पर स्नान करते श्रद्धालु
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
जींद की पूर्व दिशा में बसा हुआ पिंडारा गांव प्रदेश ही नहीं देश में आस्था का बड़ा केंद्र है। यूं तो हर माह अमावस्या के मौके पर यहां श्रद्धालुओं का तांता लगता है, लेकिन श्राद्ध पक्ष की अमावस्या के मौके पर इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। ऐसे में पूरे उत्तर भारत से लोग यहां स्नान कर पिंडदान करने पहुंचते हैं। इस बार भी बुधवार को अमास्या के मौके पर पिंडारा तीर्थ पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी है।
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अमावस्या के मौके पर पिंडारा तीर्थ में स्नान का खास महत्व माना जाता है। मान्यता है कि महाभारत के युद्ध के बाद खुद पांडवों ने भी अपने पितरों के तर्पण के लिए इसी तीर्थ में स्नान कर पिंडदान किया था। ऐसे में रात को ही यहां लोग जुटने शुरू हो गए। अल सुबह ही स्नान व पिंडदान कर अपने घरों को लौट गए। इसके बाद सुबह करीब 7 बजे से जींद व आसपास के लोगों के जत्थे के जत्थे पहुंचने शुरू हो गए। सुबह करीब 9 बजे तक तीर्थ स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ हो गई। यहां व्यवस्था बनाने के लिए पुलिस बल भी तैनात रहा।
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अमावस्या के मौके पर पिंडारा तीर्थ में स्नान का खास महत्व माना जाता है। मान्यता है कि महाभारत के युद्ध के बाद खुद पांडवों ने भी अपने पितरों के तर्पण के लिए इसी तीर्थ में स्नान कर पिंडदान किया था। ऐसे में रात को ही यहां लोग जुटने शुरू हो गए। अल सुबह ही स्नान व पिंडदान कर अपने घरों को लौट गए। इसके बाद सुबह करीब 7 बजे से जींद व आसपास के लोगों के जत्थे के जत्थे पहुंचने शुरू हो गए। सुबह करीब 9 बजे तक तीर्थ स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ हो गई। यहां व्यवस्था बनाने के लिए पुलिस बल भी तैनात रहा।
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