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Jind News: जिले को एनसीआर से बाहर करने की मांग
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उचाना। जिले को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) से बाहर करने को लेकर व्यापारियों और कारोबारियों ने जिले के जनप्रतिनिधियों से इस मुद्दे को विधानसभा में उठाने की अपील की है। जिले के एनसीआर में शामिल होने से उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में नुकसान उठाना पड़ रहा है।
उचाना मंडी के यूनियन प्रधान राजेश श्योकंद, दीपक कापड़ो, दीपक बंसल, हिमांशु बंसल, सतकुमार, शीशपाल श्योकंद, संजय जैन,जयपाल शर्मा, कृष्ण चहल जींद, अनिल सहरावत, नरवाना से सुभाष चहल, सतीश ठेकेदार ने कहा कि एनसीआर के नियमों का सबसे अधिक असर ईंट-भट्टा उद्योग, छोटे उद्योगों तथा वाहन कारोबार पर पड़ रहा है।
ऑटो, ट्रक और अन्य व्यावसायिक वाहनों की आयु सीमा के कारण कारोबार प्रभावित हो रहा है। जहां पड़ोसी क्षेत्रों में वाहन 15 वर्ष तक संचालित हो सकते हैं, वहीं जिले के एनसीआर क्षेत्र में आने के कारण वाहन अपेक्षाकृत कम समय में ही बाहर हो जाते हैं। इससे वाहन मालिकों और कारोबारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
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एनसीआर के नियमों के कारण गाड़ियों का कारोबार लगभग ठप हो चुका है। सरकार को इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और जींद जिले को एनसीआर से बाहर करने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए। उम्मीद जताई कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधि उनकी समस्याओं को समझते हुए विधानसभा और सरकार के समक्ष इस मुद्दे को मजबूती से उठाएंगे, ताकि जिले के लोगों को राहत मिल सके और स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिले।
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उचाना मंडी के यूनियन प्रधान राजेश श्योकंद, दीपक कापड़ो, दीपक बंसल, हिमांशु बंसल, सतकुमार, शीशपाल श्योकंद, संजय जैन,जयपाल शर्मा, कृष्ण चहल जींद, अनिल सहरावत, नरवाना से सुभाष चहल, सतीश ठेकेदार ने कहा कि एनसीआर के नियमों का सबसे अधिक असर ईंट-भट्टा उद्योग, छोटे उद्योगों तथा वाहन कारोबार पर पड़ रहा है।
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ऑटो, ट्रक और अन्य व्यावसायिक वाहनों की आयु सीमा के कारण कारोबार प्रभावित हो रहा है। जहां पड़ोसी क्षेत्रों में वाहन 15 वर्ष तक संचालित हो सकते हैं, वहीं जिले के एनसीआर क्षेत्र में आने के कारण वाहन अपेक्षाकृत कम समय में ही बाहर हो जाते हैं। इससे वाहन मालिकों और कारोबारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
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एनसीआर के नियमों के कारण गाड़ियों का कारोबार लगभग ठप हो चुका है। सरकार को इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और जींद जिले को एनसीआर से बाहर करने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए। उम्मीद जताई कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधि उनकी समस्याओं को समझते हुए विधानसभा और सरकार के समक्ष इस मुद्दे को मजबूती से उठाएंगे, ताकि जिले के लोगों को राहत मिल सके और स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिले।