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Jind News: मिट्टी के बर्तन बनाने के लिए जमीन उपलब्ध करवाने की मांग
Sun, 08 Feb 2026 11:53 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sun, 08 Feb 2026 11:53 PM IST
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08जेएनडी17- बैठक में भाग लेते कुम्हार समाज के लोग। स्रोत ग्रामीण
जुलाना। कुम्हार समाज की बैठक रविवार को कुम्हार धर्मशाला में हुई। अध्यक्षता राजेंद्र ने की। बैठक में समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
राजेंद्र ने कहा कि सरकार द्वारा मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कुम्हारों को जमीन उपलब्ध करवाने की जो घोषणा की गई थी वह आज तक केवल कागज तक ही सीमित होकर रह गई है। सरकार ने कई कुम्हार परिवारों को स्वामित्व प्रमाण पत्र तो जारी कर दिए लेकिन जमीन पर वास्तविक कब्जा आज तक नहीं दिलाया गया। इससे कुम्हार समाज के लोग अपने पारंपरिक व्यवसाय को आगे बढ़ाने में असमर्थ हैं और उन्हें आर्थिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
राजेंद्र ने कहा कि मिट्टी के बर्तन बनाना कुम्हार समाज का पारंपरिक व्यवसाय है लेकिन जमीन और संसाधनों की कमी के कारण यह कला धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही है। यदि सरकार ने जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए इस पारंपरिक रोजगार को बचा पाना मुश्किल हो जाएगा।
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मांग है कि जिन कुम्हारों को स्वामित्व प्रमाण पत्र दिए जा चुके हैं उन्हें शीघ्र जमीन पर कब्जा दिलाया जाए, ताकि वे सम्मानपूर्वक अपने व्यवसाय को कर सकें। इन्हीं मांगों को लेकर 22 फरवरी को जुलाना में एक जनसभा करने का निर्णय लिया गया। इस मौके पर रामकुमार घोड़ेला, महेंद्रपाल, राज सिंह, कपिल, महेंद्र प्रजापति, नरेंद्र मौजूद रहे।
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राजेंद्र ने कहा कि सरकार द्वारा मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कुम्हारों को जमीन उपलब्ध करवाने की जो घोषणा की गई थी वह आज तक केवल कागज तक ही सीमित होकर रह गई है। सरकार ने कई कुम्हार परिवारों को स्वामित्व प्रमाण पत्र तो जारी कर दिए लेकिन जमीन पर वास्तविक कब्जा आज तक नहीं दिलाया गया। इससे कुम्हार समाज के लोग अपने पारंपरिक व्यवसाय को आगे बढ़ाने में असमर्थ हैं और उन्हें आर्थिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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राजेंद्र ने कहा कि मिट्टी के बर्तन बनाना कुम्हार समाज का पारंपरिक व्यवसाय है लेकिन जमीन और संसाधनों की कमी के कारण यह कला धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही है। यदि सरकार ने जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए इस पारंपरिक रोजगार को बचा पाना मुश्किल हो जाएगा।
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मांग है कि जिन कुम्हारों को स्वामित्व प्रमाण पत्र दिए जा चुके हैं उन्हें शीघ्र जमीन पर कब्जा दिलाया जाए, ताकि वे सम्मानपूर्वक अपने व्यवसाय को कर सकें। इन्हीं मांगों को लेकर 22 फरवरी को जुलाना में एक जनसभा करने का निर्णय लिया गया। इस मौके पर रामकुमार घोड़ेला, महेंद्रपाल, राज सिंह, कपिल, महेंद्र प्रजापति, नरेंद्र मौजूद रहे।