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मन में प्रभु के प्रति अटूट विश्वास होना जरूरी : मधुरेश दास महाराज

Tue, 06 Oct 2026 02:50 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 06 Oct 2026 02:50 AM IST
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Unwavering faith in the Lord is essential: Madhuresh Das Maharaj
05जेएनडी14: सफीदों में आयोजित श्रीराम कथा सुनते श्रद्धालु। स्रोत: आयोजक
जींद। सफीदों की गुरुद्वारा गली स्थित श्री शिव शक्ति कृपा मंदिर में वेदाचार्य दंडी स्वामी डॉ. निगमबोध तीर्थ महाराज के परम सानिध्य में चल रहे सामूहिक संगीतमय श्रीरामायण पाठ महोत्सव में श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे हुए हैं। महोत्सव में अयोध्या से पहुंचे व्यास मधुरेश दास महाराज ने श्रीराम कथा के दौरान माता सीता हरण और हनुमान जी के लंका प्रवेश का प्रसंग सुनाया।
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मधुरेश दास महाराज ने कहा कि रावण ने छलपूर्वक माता सीता का हरण कर उन्हें लंका पहुंचा दिया। सीता के वियोग में भगवान श्रीराम और लक्ष्मण ने उनकी खोज शुरू की। इसी क्रम में श्रीराम की भेंट हनुमान जी और सुग्रीव से हुई। हनुमान जी ने प्रभु श्रीराम के प्रति अपनी भक्ति और समर्पण का परिचय देते हुए माता सीता की खोज का दायित्व स्वीकार किया।
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प्रवचन करते हुए मधुरेश दास महाराज ने कहा कि जीवन में परिस्थितियां कितनी भी विपरीत क्यों न हों, मनुष्य को धैर्य और विश्वास बनाए रखना चाहिए। भगवान श्रीराम का जीवन मर्यादा, संयम और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है, जबकि हनुमान जी का चरित्र निस्वार्थ सेवा, समर्पण और प्रभु के प्रति अटूट विश्वास का संदेश देता है।
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उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। अच्छे कर्म करना, जरूरतमंदों की सहायता करना, सत्य और सदाचार को अपनाना भी भक्ति का ही स्वरूप है। मन में प्रभु के प्रति विश्वास हो तो व्यक्ति कठिन से कठिन परिस्थितियों का सामना भी साहस के साथ कर सकता है। इसके बाद उन्होंने हनुमान जी के समुद्र पार कर लंका पहुंचने का प्रसंग सुनाया।

भगवान श्रीराम की आज्ञा पाकर हनुमान जी ने अपनी बुद्धि, साहस और विवेक के बल पर माता सीता की खोज शुरू की। अनेक बाधाओं को पार करने के बाद उन्होंने अशोक वाटिका में माता सीता को खोज लिया। हनुमान जी ने उन्हें भगवान श्रीराम का संदेश दिया और प्रभु की अंगूठी दिखाकर विश्वास दिलाया कि श्रीराम शीघ्र लंका पहुंचकर उन्हें रावण के बंधन से मुक्त कराएंगे।
फोटो कैप्शन
05जेएनडी14: सफीदों में आयोजित श्रीराम कथा सुनते श्रद्धालु। स्रोत: आयोजक
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