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एंट्री ऑपरेटर काबू
Updated Mon, 06 Nov 2017 10:59 PM IST
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रिश्वत लेते डाटा एंट्री ऑपरेटर गिरफ्तार
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। विजिलेंस टीम ने डीआरडीए में कार्यरत एक डाटा एंट्री ऑपरेटर को तीन हजार रुपये की रिश्वत लेने के आरोप को गिरफ्तार किया है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिलने वाली राशि की एवज में तीन हजार की रिश्वत ले रहा था। विजिलेंस ने जब उसके हाथ धुलवाए तो वह लाल हो गये। पुलिस ने उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। गांव बिघाना निवासी राममेहर ने विजिलेंस को शिकायत दी थी कि उसने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवेदन किया हुआ है। इसके तहत उसे 45 हजार रुपये की पहली किस्त मिल चुकी है। उसकी 60 हजार रुपये की दूसरी किस्त मिलनी थी। जब वह अपनी दूसरी 60 हजार रुपये की किस्त के बारे में पता करने गया। तो डीआरडीए में कार्यरत जींद के होली मोहल्ला निवासी मुनीष वर्मा ने उससे 10 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की। मुनीष वर्मा ने कहा कि उसे 60 हजार रुपये तब मिलेंगे, जब वह उसे दस हजार रुपये की रिश्वत दे देगा। उस समय तो राममेहर ने मना कर दिया। वह अपनी किस्त के लिए तीन महीने से डीआरडीए के चक्कर काट रहा था। इस पर मुनीष वर्मा ने कहा कि वह चाहे किसी से भी मिल ले, जब तक उसे दस हजार रुपये नहीं देगा, उसकी किस्त नहीं मिलेगी। आखिर थक-हारकर राममेहर ने उसके साथ छह हजार रुपये में सौदा कर दिया। इसकी शिकायत राममेहर ने विजिलेंस को दे देगी। सोमवार को राममेहर ने विजिलेंस टीम एक दो हजार रुपये का नोट व दो 500-500 रुपये के नोट थे। राममेहर ने जैसे ही मुनीष वर्मा को तीन हजार रुपये दिए तो मौके की ताक में बैठक विजिलेंस की टीम ने तुरंत राममेहर को काबू कर लिया। और उसके कब्जे से तीन हजार रुपये बरामद कर लिए। विजिलेंस टीम का नेतृत्व कर रहे इंस्पेक्टर भूपेंद्र ने बताया कि राममेहर की शिकायत पर विजिलेंस ने यह कार्रवाई की व मुनीष वर्मा से तीन हजार रुपये रिश्वत की राशि भी बरामद हुई है। मुनीष वर्मा पर भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई की गई है।
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। विजिलेंस टीम ने डीआरडीए में कार्यरत एक डाटा एंट्री ऑपरेटर को तीन हजार रुपये की रिश्वत लेने के आरोप को गिरफ्तार किया है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिलने वाली राशि की एवज में तीन हजार की रिश्वत ले रहा था। विजिलेंस ने जब उसके हाथ धुलवाए तो वह लाल हो गये। पुलिस ने उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। गांव बिघाना निवासी राममेहर ने विजिलेंस को शिकायत दी थी कि उसने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवेदन किया हुआ है। इसके तहत उसे 45 हजार रुपये की पहली किस्त मिल चुकी है। उसकी 60 हजार रुपये की दूसरी किस्त मिलनी थी। जब वह अपनी दूसरी 60 हजार रुपये की किस्त के बारे में पता करने गया। तो डीआरडीए में कार्यरत जींद के होली मोहल्ला निवासी मुनीष वर्मा ने उससे 10 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की। मुनीष वर्मा ने कहा कि उसे 60 हजार रुपये तब मिलेंगे, जब वह उसे दस हजार रुपये की रिश्वत दे देगा। उस समय तो राममेहर ने मना कर दिया। वह अपनी किस्त के लिए तीन महीने से डीआरडीए के चक्कर काट रहा था। इस पर मुनीष वर्मा ने कहा कि वह चाहे किसी से भी मिल ले, जब तक उसे दस हजार रुपये नहीं देगा, उसकी किस्त नहीं मिलेगी। आखिर थक-हारकर राममेहर ने उसके साथ छह हजार रुपये में सौदा कर दिया। इसकी शिकायत राममेहर ने विजिलेंस को दे देगी। सोमवार को राममेहर ने विजिलेंस टीम एक दो हजार रुपये का नोट व दो 500-500 रुपये के नोट थे। राममेहर ने जैसे ही मुनीष वर्मा को तीन हजार रुपये दिए तो मौके की ताक में बैठक विजिलेंस की टीम ने तुरंत राममेहर को काबू कर लिया। और उसके कब्जे से तीन हजार रुपये बरामद कर लिए। विजिलेंस टीम का नेतृत्व कर रहे इंस्पेक्टर भूपेंद्र ने बताया कि राममेहर की शिकायत पर विजिलेंस ने यह कार्रवाई की व मुनीष वर्मा से तीन हजार रुपये रिश्वत की राशि भी बरामद हुई है। मुनीष वर्मा पर भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई की गई है।