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बालिकाएं आज भी बन रही हैं वधू
ब्यूरो/अमर उजाला जींद
Updated Tue, 27 Oct 2015 12:18 AM IST
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21वीं सदी में भी बाल विवाह जैसी कुप्रथा रह-रहकर सिर उठा रही है। बाल विवाह को रोकने के लिए सरकार द्वारा बनाए गए बाल विवाह अधिनियम के बावजूद बाल विवाह के मामले थम नहीं रहे हैं।
जिला महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध कार्यालय से प्राप्त एक वर्ष के आंकड़ों पर अगर नजर डालें तो साल दर साल बाल विवाह के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है।
वर्ष 2014 में जिले में 19 मामले सामने आए थे तो वर्ष 2015 में दस माह में यह आंकड़ा बढ़कर 27 पर पहुंच गया है। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों में जागरूकता के अभाव या परिवार की आर्थिक तंगी बाल विवाह का कारण बन रही है।
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देश में सदियों से चली आ रही बाल विवाह जैसी परंपरा को खत्म करने के लिए सरकार द्वारा सख्त कदम उठाते हुए वर्ष 2006 में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम बनाया गया। समय-समय पर जागरूकता अभियान भी चलाए गए।
वहीं, समाज में लड़कियों को लड़कों के बराबर का दर्जा दिलवाने तथा लड़कियों के प्रति लोगों की सोच बदलने के लिए सामाजिक संस्थाएं भी अभियान चलाती हैं। लेकिन अभी तक सरकार, विभाग तथा संस्थाओं के प्रयास के बाल विवाह रोकने में नाकाफी साबित हुए हैं।
जिला महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी के पास पहुंच रहे बाल विवाह के ज्यादातर मामलों में सामने आया है कि परिवार के लोग लड़की को जिम्मेदारी समझकर बाल अवस्था में ही उसे विवाह बंधन में बांध देते हैं।
दो साल की सजा और एक लाख जुर्माने का प्रावधान
बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत बाल विवाह करवाने के आरोप में दो साल की सजा तथा एक लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। वहीं, बाल विवाहित लड़का या लड़की बालिग होने के दो साल के अंदर अपना विवाह खारिज करवा सकता है।
साल दर साल के मामले
वर्ष मामले
2010 4
2011 6
2012 4
2013 7
2014 19
2015 27
बॉक्स
27 में से 16 शादियां रुकवाईं
जिला महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध कार्यालय में जनवरी से अक्तूबर 2015 तक बाल विवाह की कुल 27 शिकायतें आई हैं। इनमें से विभाग द्वारा 16 शादियां रुकवाई गई हैं। 11 मामलों में से आठ मामलों में वर-वधू बालिग मिले तो तीन शिकायतें झूठी मिलीं।
विभाग के पास आने वाले ज्यादातर मामलों में यह सामने आया है कि परिवार की आर्थिक तंगी के कारण बाल विवाह की घटनाएं हो रही हैं। वहीं, बाल विवाह का दूसरा कारण लोगों में जागरूकता की कमी भी है। लोगों को जागरूक करने के लिए विभाग द्वारा समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं।
रवि लौहान, सहायक, जिला महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध विभाग, जींद।
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जिला महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध कार्यालय से प्राप्त एक वर्ष के आंकड़ों पर अगर नजर डालें तो साल दर साल बाल विवाह के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है।
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वर्ष 2014 में जिले में 19 मामले सामने आए थे तो वर्ष 2015 में दस माह में यह आंकड़ा बढ़कर 27 पर पहुंच गया है। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों में जागरूकता के अभाव या परिवार की आर्थिक तंगी बाल विवाह का कारण बन रही है।
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देश में सदियों से चली आ रही बाल विवाह जैसी परंपरा को खत्म करने के लिए सरकार द्वारा सख्त कदम उठाते हुए वर्ष 2006 में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम बनाया गया। समय-समय पर जागरूकता अभियान भी चलाए गए।
वहीं, समाज में लड़कियों को लड़कों के बराबर का दर्जा दिलवाने तथा लड़कियों के प्रति लोगों की सोच बदलने के लिए सामाजिक संस्थाएं भी अभियान चलाती हैं। लेकिन अभी तक सरकार, विभाग तथा संस्थाओं के प्रयास के बाल विवाह रोकने में नाकाफी साबित हुए हैं।
जिला महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी के पास पहुंच रहे बाल विवाह के ज्यादातर मामलों में सामने आया है कि परिवार के लोग लड़की को जिम्मेदारी समझकर बाल अवस्था में ही उसे विवाह बंधन में बांध देते हैं।
दो साल की सजा और एक लाख जुर्माने का प्रावधान
बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत बाल विवाह करवाने के आरोप में दो साल की सजा तथा एक लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। वहीं, बाल विवाहित लड़का या लड़की बालिग होने के दो साल के अंदर अपना विवाह खारिज करवा सकता है।
साल दर साल के मामले
वर्ष मामले
2010 4
2011 6
2012 4
2013 7
2014 19
2015 27
बॉक्स
27 में से 16 शादियां रुकवाईं
जिला महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध कार्यालय में जनवरी से अक्तूबर 2015 तक बाल विवाह की कुल 27 शिकायतें आई हैं। इनमें से विभाग द्वारा 16 शादियां रुकवाई गई हैं। 11 मामलों में से आठ मामलों में वर-वधू बालिग मिले तो तीन शिकायतें झूठी मिलीं।
विभाग के पास आने वाले ज्यादातर मामलों में यह सामने आया है कि परिवार की आर्थिक तंगी के कारण बाल विवाह की घटनाएं हो रही हैं। वहीं, बाल विवाह का दूसरा कारण लोगों में जागरूकता की कमी भी है। लोगों को जागरूक करने के लिए विभाग द्वारा समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं।
रवि लौहान, सहायक, जिला महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध विभाग, जींद।