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Jind News: भूजल बचाने की मुहिम, किसानों को मिलेगा प्रोत्साहन
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जींद। जिले में गिरते भूजल स्तर को सुधारने और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने फसल विविधीकरण अभियान तेज कर दिया है। विभाग ने चालू वर्ष में जिले के लिए करीब 11 हजार 500 एकड़ भूमि पर फसल विविधीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया है।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. गिरीश नागपाल ने बताया कि राज्य सरकार की फसल विविधीकरण और जल संरक्षण प्रोत्साहन योजना के तहत मेरा पानी-मेरी विरासत योजना को इस वर्ष भी लागू किया गया है। इसका उद्देश्य धान की खेती कम कर पानी की बचत करना है।
उन्होंने बताया कि जो किसान पिछले वर्ष धान वाले खेत में इस बार धान की बजाय मक्का, कपास, अरहर, मूंग, उड़द, ग्वार, सोयाबीन, तिल, मूंगफली, चारा फसलें, खरीफ प्याज, सब्जियां, बागवानी या कृषि वानिकी की फसलें लगाएंगे। उन्हें आठ हजार रुपये प्रति एकड़ आर्थिक सहायता दी जाएगी। यदि किसान खेत खाली छोड़ता है तब भी वह योजना का लाभ लेने का पात्र होगा।
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डॉ. नागपाल ने कहा कि दलहन, तिलहन और कपास की खेती करने वाले किसानों को 8 हजार रुपये के अतिरिक्त दो हजार रुपये प्रति एकड़ बोनस भी मिलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि योजना का लाभ केवल उन्हीं खेतों पर मिलेगा, जहां पिछले वर्ष धान की खेती हुई थी।
उन्होंने बताया कि यदि किसी खेत में पिछले चार वर्षों में किसी भी एक वर्ष धान के अलावा दूसरी फसल बोई गई है, तो वह इस योजना के लिए पात्र नहीं होगा। हालांकि, पिछले वर्ष योजना का लाभ लेने वाले किसान इस बार भी उसी खेत में वैकल्पिक फसल जारी रखते हैं तो वे सहायता पाने के पात्र रहेंगे।
किसानों को योजना का लाभ लेने के लिए मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण करवाना अनिवार्य है। पोर्टल 18 मई से खुल चुका है और खरीफ फसलों के पंजीकरण की अंतिम तिथि तक खुला रहेगा।
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कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. गिरीश नागपाल ने बताया कि राज्य सरकार की फसल विविधीकरण और जल संरक्षण प्रोत्साहन योजना के तहत मेरा पानी-मेरी विरासत योजना को इस वर्ष भी लागू किया गया है। इसका उद्देश्य धान की खेती कम कर पानी की बचत करना है।
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उन्होंने बताया कि जो किसान पिछले वर्ष धान वाले खेत में इस बार धान की बजाय मक्का, कपास, अरहर, मूंग, उड़द, ग्वार, सोयाबीन, तिल, मूंगफली, चारा फसलें, खरीफ प्याज, सब्जियां, बागवानी या कृषि वानिकी की फसलें लगाएंगे। उन्हें आठ हजार रुपये प्रति एकड़ आर्थिक सहायता दी जाएगी। यदि किसान खेत खाली छोड़ता है तब भी वह योजना का लाभ लेने का पात्र होगा।
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डॉ. नागपाल ने कहा कि दलहन, तिलहन और कपास की खेती करने वाले किसानों को 8 हजार रुपये के अतिरिक्त दो हजार रुपये प्रति एकड़ बोनस भी मिलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि योजना का लाभ केवल उन्हीं खेतों पर मिलेगा, जहां पिछले वर्ष धान की खेती हुई थी।
उन्होंने बताया कि यदि किसी खेत में पिछले चार वर्षों में किसी भी एक वर्ष धान के अलावा दूसरी फसल बोई गई है, तो वह इस योजना के लिए पात्र नहीं होगा। हालांकि, पिछले वर्ष योजना का लाभ लेने वाले किसान इस बार भी उसी खेत में वैकल्पिक फसल जारी रखते हैं तो वे सहायता पाने के पात्र रहेंगे।
किसानों को योजना का लाभ लेने के लिए मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण करवाना अनिवार्य है। पोर्टल 18 मई से खुल चुका है और खरीफ फसलों के पंजीकरण की अंतिम तिथि तक खुला रहेगा।