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पराली जलाने से घटती है मिट्टी की उर्वरता : एसडीएम
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22जेएनडी17: किसानों को जागरूक करती एसडीएम डॉ. किरण सिंह।
उचाना। एडीएम डॉ. किरण सिंह ने शुक्रवार को डूमरखा गांव में पराली प्रबंधन को लेकर किसानों को जागरूक किया। इस दौरान उन्होंने किसानों को पराली जलाने के दुष्परिणामों से अवगत करवाया और पराली प्रबंधन के लिए प्रभावी विकल्पों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से न केवल वायु प्रदूषण होता है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी घटती है। यह समस्या स्थानीय पर्यावरण के साथ-साथ पूरे क्षेत्र के जनजीवन पर नकारात्मक प्रभाव डालती है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने पराली प्रबंधन के लिए कई योजनाएं और संसाधन उपलब्ध कराए है। जिनका उपयोग कर किसान इस समस्या का समाधान निकाल सकते हैं। उन्होंने किसानों को पराली के वैकल्पिक उपयोग, जैसे जैविक खाद बनाने और पशु चारे के रूप में उपयोग की जानकारी भी दी। उन्होंने कहा कि पराली को जलाने की बजाय इसका सही उपयोग करने से आर्थिक लाभ भी प्राप्त हो सकता है।
कार्यक्रम में किसानों को पराली प्रबंधन के लिए आधुनिक मशीनरी, जैसे सुपर सीडर, हैप्पी सीडर और स्ट्रॉ रीपर के उपयोग की जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि सरकार इन उपकरणों पर सब्सिडी दे रही है, ताकि छोटे और मझोले किसान भी इनका लाभ उठा सकें। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे पराली जलाने की बजाए इन तकनीकों का इस्तेमाल करें और पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान दें।
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उन्होंने कहा कि सरकार ने पराली प्रबंधन के लिए कई योजनाएं और संसाधन उपलब्ध कराए है। जिनका उपयोग कर किसान इस समस्या का समाधान निकाल सकते हैं। उन्होंने किसानों को पराली के वैकल्पिक उपयोग, जैसे जैविक खाद बनाने और पशु चारे के रूप में उपयोग की जानकारी भी दी। उन्होंने कहा कि पराली को जलाने की बजाय इसका सही उपयोग करने से आर्थिक लाभ भी प्राप्त हो सकता है।
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कार्यक्रम में किसानों को पराली प्रबंधन के लिए आधुनिक मशीनरी, जैसे सुपर सीडर, हैप्पी सीडर और स्ट्रॉ रीपर के उपयोग की जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि सरकार इन उपकरणों पर सब्सिडी दे रही है, ताकि छोटे और मझोले किसान भी इनका लाभ उठा सकें। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे पराली जलाने की बजाए इन तकनीकों का इस्तेमाल करें और पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान दें।
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