फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Jind News ›   Burning of crop residues is a serious health hazard: Dr. Rana

फसल अवशेष जलाने से स्वास्थ्य को गंभीर खतरा : डॉ. राणा

Mon, 22 Nov 2021 11:24 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 22 Nov 2021 11:24 PM IST
विज्ञापन
Burning of crop residues is a serious health hazard: Dr. Rana
जागरूकता कार्यक्रम में फसल अवेशष नहीं जलाने की शपथ लेते किसान। विज्ञप्ति - फोटो : Jind
जींद। कृषि विज्ञान केंद्र पांडु पिंडारा ने फसल अवशेष प्रबंधन विषय पर खंड स्तरीय जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। केंद्र प्रभारी डॉ. ब्रह्म प्रकाश राणा ने कहा कि खाद्यान्न उत्पादन में धान व गेहूं का करीब 75 फीसदी योगदान है। आंकड़ों के अनुसार भूमिगत जल, जैविक कार्बन और पोषक तत्वों की कमी हो रही है और उपजाऊ भूमि बंजर में तबदील हो रही है।
विज्ञापन

उन्होंने कहा कि फसल अवशेष जलाने से हानिकारक गैसें निकली हैं, जो मनुष्य और पशुओं के लिए गंभीर खतरा हैं। फसल धुएं से पैदा कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड व मीथेन गैस वातावरण में कई तरह के बदलाव करती हैं। गेहूं की पकाई के समय यह गैस तापमान बढ़ाती हैं, जिससे पैदावार में कमी आती है। फानों में आग लगाने से भूमि की ऊपरी परत करीब दो इंच तक कठोर हो जाती है। इससे वायु व जल का संचार नहीं हो पाता और मित्र कीट भी नष्ट हो जाते हैं। इस तरह से पशु चारे की भी समस्या होती है और धुएं से कई बार दुर्घटनाएं भी होती हैं। फानों अर्थात फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाने से कार्बनिक पदार्थ व अन्य पोषक तत्वों के कारण सूक्ष्म जीवों की सक्रियता बढ़ती है। वहीं मिट्टी के भौतिक गुण जैसे संरचना, जल व पोषक तत्वों को धारण करने की क्षमता बढ़ती है। इसके अलावा भूमि व वायु प्रदूषण नहीं होता और तापमान भी नहीं बढ़ता। बागवानी विशेषज्ञ डॉ. रामदयाल पंवार ने कहा कि गेहूं व धान के अवशेषों का प्रबंधन आसानी से किया जा सकता है। कंबाइन से कटाई करने और स्ट्रा रीपर से भूसा बनाने के बाद खेत में हैरो से बचे हुए अवशेषों को आसानी से मिलाया जा सकता है। फसल अवशेषों से कंपोस्ट तैयार कर खुंब का उत्पादन भी किया जा सकता है। फसल अवशेषों से विशेष रूप से गत्ता भी तैयार किया जा सकता है। मौसम वैज्ञानिक डॉ. राजेश ने कहा कि मौसम की जानकारी प्राप्त कर ही फसलों की सिंचाई का शेड्यूल तैयार करें, ताकि पानी की अनावश्यक बर्बादी को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि हम जिस वातावरण में रहते हैं, उसे साफ व सही रखना हमारा नैतिक कर्तव्य है। थोड़े लालच के चक्कर में बहुमूल्य धरोहर को नष्ट नहीं करना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed