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Jind News: ब्रह्मकुमारीज ने निकाली भव्य शोभायात्रा
Thu, 27 Feb 2025 12:22 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Thu, 27 Feb 2025 12:22 AM IST
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26जेएनडी20: कलश यात्रा निकालती हुईं महिलाएं। संवाद
जींद। महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय सफीदों सेंटर के तत्वावधान में बुधवार को नगर में भव्य शोभायात्रा निकाली गई।
शोभायात्रा की अध्यक्षता सफीदों सेंटर इंचार्ज बहन स्नेहलता ने की। यात्रा को नगर के प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय से सब इंस्पेक्टर सुरेश कुंडू ने झंडी दिखाकर रवाना किया गया। यह यात्रा नगर के अनेक बाजारों व मोहल्लों से होकर गुजरी। यात्रा का नगर के अनेक स्थानों पर भव्य स्वागत किया गया।
यात्रा में 108 बहनें कलश उठाए हुई थी। यात्रा में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, केदारनाथ, भीमाशंकर, विश्वनाथ, त्र्यंबकेश्वर, वैद्यनाथ, नागेश्वर, रामेश्वरम व घुश्मेश्वर की झांकियों को विशेष रूप शामिल किया गया। यात्रा में बज रहे भजनों ने माहौल को शिवमय व भक्तिमय बना दिया।
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बहन स्नेहलता ने कहा कि शिवरात्रि का अर्थ है-शिव की रात्रि। यह रात्रि अंधकार का प्रतीक है। वर्तमान समय मानवीय, नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों की घोर अवहेलना हो रही है। मन विकारों से दूषित है। इस समय की अवधि को शास्त्रों में धर्म ग्लानि या अधार्मिकता के रूप में वर्णन किया गया है। प्रश्न यह है कि कौन इस दुनिया में ज्ञान रूपी प्रकाश लाएगा, यह कार्य केवल एक ही सर्वशक्तिमान सत्ता ईश्वर ही कर सकते हैं। वह शिव हैं, जिसका अर्थ है-सबका कल्याणकारी। उनका कोई भौतिक शरीर या भौतिक रूप नहीं है। वह दिव्य प्रकाश और शक्तियों के एक बिंदु हैं।
शिवरात्रि का दिव्य संदेश यह है कि परमपिता परमात्मा शिव अब एक बार फिर घोर अंधियारे की इस लंबी रात्रि में अवतरित हुए हैं। वे इस धरती के दुख और अशांति को मिटाने आए हैं। इस दिन आत्मा को पवित्र बनाने के लिए हर प्रकार की अपवित्रता को त्यागने का संकल्प करना चाहिए। भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाना मन, वचन और कर्म की ओर से भगवान के प्रति समर्पण का प्रतीक है। शिवरात्रि यथार्थ अर्थ को जीवन में धारण करने का समय है। महाशिवरात्रि का पर्व आत्मा और परमात्मा के मिलन का महाकुंभ है।
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शोभायात्रा की अध्यक्षता सफीदों सेंटर इंचार्ज बहन स्नेहलता ने की। यात्रा को नगर के प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय से सब इंस्पेक्टर सुरेश कुंडू ने झंडी दिखाकर रवाना किया गया। यह यात्रा नगर के अनेक बाजारों व मोहल्लों से होकर गुजरी। यात्रा का नगर के अनेक स्थानों पर भव्य स्वागत किया गया।
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यात्रा में 108 बहनें कलश उठाए हुई थी। यात्रा में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, केदारनाथ, भीमाशंकर, विश्वनाथ, त्र्यंबकेश्वर, वैद्यनाथ, नागेश्वर, रामेश्वरम व घुश्मेश्वर की झांकियों को विशेष रूप शामिल किया गया। यात्रा में बज रहे भजनों ने माहौल को शिवमय व भक्तिमय बना दिया।
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बहन स्नेहलता ने कहा कि शिवरात्रि का अर्थ है-शिव की रात्रि। यह रात्रि अंधकार का प्रतीक है। वर्तमान समय मानवीय, नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों की घोर अवहेलना हो रही है। मन विकारों से दूषित है। इस समय की अवधि को शास्त्रों में धर्म ग्लानि या अधार्मिकता के रूप में वर्णन किया गया है। प्रश्न यह है कि कौन इस दुनिया में ज्ञान रूपी प्रकाश लाएगा, यह कार्य केवल एक ही सर्वशक्तिमान सत्ता ईश्वर ही कर सकते हैं। वह शिव हैं, जिसका अर्थ है-सबका कल्याणकारी। उनका कोई भौतिक शरीर या भौतिक रूप नहीं है। वह दिव्य प्रकाश और शक्तियों के एक बिंदु हैं।
शिवरात्रि का दिव्य संदेश यह है कि परमपिता परमात्मा शिव अब एक बार फिर घोर अंधियारे की इस लंबी रात्रि में अवतरित हुए हैं। वे इस धरती के दुख और अशांति को मिटाने आए हैं। इस दिन आत्मा को पवित्र बनाने के लिए हर प्रकार की अपवित्रता को त्यागने का संकल्प करना चाहिए। भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाना मन, वचन और कर्म की ओर से भगवान के प्रति समर्पण का प्रतीक है। शिवरात्रि यथार्थ अर्थ को जीवन में धारण करने का समय है। महाशिवरात्रि का पर्व आत्मा और परमात्मा के मिलन का महाकुंभ है।

26जेएनडी20: कलश यात्रा निकालती हुईं महिलाएं। संवाद

26जेएनडी20: कलश यात्रा निकालती हुईं महिलाएं। संवाद