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खुद की नजर में सही रहें, दुनिया तो भगवान से भी दुखी: सुभद्र मुनि
Thu, 28 Mar 2024 03:06 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Thu, 28 Mar 2024 03:06 AM IST
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उचाना। बड़ौदा जैन स्थानक में प्रवचन करते हुए उत्तर भारतीय प्रवर्तक गुरूदेव सुभद्र मुनि महाराज ने कहा कि परिवार का हर सदस्य धर्म ध्यान जरूर करें। चाहे वो माला के रूप में हो या तप, त्याग के रूप में हो। परिवार को एकत्रित रखने के लिए सभी तालमेल बनाने के लिए रोजाना परिवार के सभी सदस्य संयुक्त प्रार्थना अवश्य करें। प्रार्थना में भी बहुत बड़ी ताकत होती है। जो काम दवा से नहीं होता वो दुआ से हो जाता है।
उन्होंने कहा कि मानव जाति का बंटवारा करने वाला धर्म नहीं बल्कि ये इंसान ही है। धर्म की छाया में बैठकर मन की चिंता व थकावट दूर हो जाती है। चाहे कैसा भी समय क्यों न हो पर बड़ों को प्रणाम करना न भूलें, क्योंकि जो इंसान बड़ों को प्रणाम करता रहता है उसका जीवन संस्कारवान बन जाता है। प्रणाम करने से बड़ों की ऊर्जा भी हमारे जीवन में आ जाती है जो बुराईयों से लड़ने की ताकत देती है।
गुरु की दीवारों पर फोटो लगाने की बजाए अपने ह्दय में गुरुओं का स्थायी फोटो बनाएं। गुरुओं को याद रखने के लिए अपने जीवन की कोई ठोस बुराई को छोड़ने का संकल्प मन में अवश्य लें। उन्होंने कहा कि कभी भी अपने आप को दीन-हीन न मानें। ऐसा इंसान अपराधी न होते हुए भी अपराधी साबित हो जाता है। इंसान खुद की नजर में सही होना चाहिए बाकी दुनिया तो भगवान से भी बड़ी दुखी है।
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उन्होंने कहा कि मानव जाति का बंटवारा करने वाला धर्म नहीं बल्कि ये इंसान ही है। धर्म की छाया में बैठकर मन की चिंता व थकावट दूर हो जाती है। चाहे कैसा भी समय क्यों न हो पर बड़ों को प्रणाम करना न भूलें, क्योंकि जो इंसान बड़ों को प्रणाम करता रहता है उसका जीवन संस्कारवान बन जाता है। प्रणाम करने से बड़ों की ऊर्जा भी हमारे जीवन में आ जाती है जो बुराईयों से लड़ने की ताकत देती है।
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गुरु की दीवारों पर फोटो लगाने की बजाए अपने ह्दय में गुरुओं का स्थायी फोटो बनाएं। गुरुओं को याद रखने के लिए अपने जीवन की कोई ठोस बुराई को छोड़ने का संकल्प मन में अवश्य लें। उन्होंने कहा कि कभी भी अपने आप को दीन-हीन न मानें। ऐसा इंसान अपराधी न होते हुए भी अपराधी साबित हो जाता है। इंसान खुद की नजर में सही होना चाहिए बाकी दुनिया तो भगवान से भी बड़ी दुखी है।
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