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Jind News: कभी छिपकर खेलती थीं कबड्डी, अब एशियन गेम्स में बनीं गोल्डन गर्ल

Sun, 27 Sep 2026 02:33 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 27 Sep 2026 02:33 AM IST
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Once played Kabaddi in secret; now, the 'Golden Girl' of the Asian Games.

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सुशील टुर्ण
जींद। कभी कबड्डी खेलने के लिए परिवार से छिपना पड़ता था, आज उसी खेल ने पूजा हथवाला को गोल्डन गर्ल बना दिया है। 13 साल की उम्र में लड़की होने की बात कहकर परिवार ने उन्हें कबड्डी खेलने से रोक दिया था लेकिन पूजा ने हार नहीं मानी और बंदिशों को पीछे छोड़ते हुए मैदान में अपना सफर जारी रखा।
मेहनत के दम पर उन्होंने 25 राष्ट्रीय और चार अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण अपने नाम किए। अब एशियन गेम्स में भारतीय महिला कबड्डी टीम की स्वर्णिम जीत में भी पूजा ने अहम भूमिका निभाई है। उनकी इस कामयाबी से जींद के हथवाला गांव में खुशी का माहौल है।
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भाई साहिल ने बताया कि पूजा ने गांव के स्कूल में लड़कियों को कबड्डी खेलते देखा तो उनका मन भी मैदान में उतरने का हुआ। शुरुआत में वह घर पर बिना बताए लड़कियों के साथ खेलने लगीं। जब परिजनों को पता चला तो उन्होंने लड़की होने की बात कहकर कबड्डी खेलने से रोक दिया। इसी दौरान स्कूल के कोच ने उनके घर पहुंचकर परिजनों को समझाया कि पूजा अच्छा खेलती है और उसे खेलने का मौका मिलना चाहिए। हालांकि इसके बावजूद परिवार तैयार नहीं हुआ।
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दादा ने देखा खेल तो बदल गया परिवार का नजरिया
भाई साहिल ने बताया कि उनके दादा जापान सिंह काजल ने खुद मैदान पर जाकर पोती का खेल देखने का फैसला किया। मैदान में पूजा का प्रदर्शन देखकर उनका नजरिया बदल गया। उन्होंने पिता धर्मेंद्र और मां नीलम को भी समझाया। इसके बाद दादा रोज पूजा को मैदान तक ले जाने लगे। गांव से बाहर होने वाले मुकाबलों में भी वह पूजा के साथ जाते रहे। दसवीं कक्षा में पूजा का दाखिला मोर माजरा गुरुकुल में कराया गया जहां उन्होंने कबड्डी का अभ्यास जारी रखा। राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर शुरुआती सफलताओं के बाद परिवार को पूजा से बड़ी उम्मीदें होने लगीं। मेहनत रंग लाई और पदकों का सिलसिला शुरू हो गया।


एशियन गेम्स के फाइनल में ईरान को हराकर भारत को दिलाया स्वर्ण
एशियन गेम्स में भारतीय महिला कबड्डी टीम ने फाइनल में ईरान को 37-34 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। पूरे टूर्नामेंट में पूजा ने रेडिंग के दौरान टीम को महत्वपूर्ण अंक दिलाए। ग्रुप चरण में ईरान के खिलाफ भारत की 37-23 की जीत में उनकी सुपर रेड भी चर्चा में रही। भारत ने बांग्लादेश को 42-21 और जापान को 50-25 से हराया जबकि सेमीफाइनल में नेपाल को मात देकर फाइनल में जगह बनाई। फाइनल में आखिरी क्षणों तक मुकाबला बराबरी का रहा लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने दबाव में संयम बनाए रखा। तीन अंकों की जीत के साथ भारत ने महिला कबड्डी का स्वर्ण बरकरार रखा। पूजा की इस उपलब्धि पर हथवाला गांव और उनका परिवार गर्व महसूस कर रहा है। जिस कबड्डी के मैदान में उतरने के लिए कभी उन्हें परिवार से छिपना पड़ता था आज वही मैदान उन्हें देश के लिए स्वर्ण जीतने वाली खिलाड़ियों की कतार में खड़ा कर चुका है।
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