{"_id":"5de2b47c8ebc3e54f143b91f","slug":"ambulence-drivers-oppose-the-new-shift-roster-system-jind-news-rtk530151437","type":"story","status":"publish","title_hn":"एंबुलेंस चालकों ने दो शिफ्टों वाली नई रोस्टर प्रणाली का किया विरोध","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एंबुलेंस चालकों ने दो शिफ्टों वाली नई रोस्टर प्रणाली का किया विरोध
विज्ञापन
नागरिक अस्पताल में एंबुलेंस चालकों की कमी के चलते अस्पताल प्रशासन ने दो शिफ्टों में एंबुलेंस चालकों को काम करने की हिदायत देते हुए नई रोस्टर प्रणाली शुरू की थी। अब इसे एंबुलेंस चालकों ने श्रम कानूनों का उल्लंघन बताते हुए फिर से तीन शिफ्टों वाली रोस्टर प्रणाली दोबारा लागू करने का अनुरोध करते हुए नोडल अधिकारी को ज्ञापन सौंपा है। एंबुलेंस चालकों ने अधिक काम के कारण किसी दुर्घटना का अंदेशा जताते हुए इस नई रोस्टर प्रणाली को तुरंत बंद करने की मांग की है।
बताते चलें कि नागरिक अस्पताल में 21 एंबुलेंस व 43 ड्राइवर इस समय कार्यरत हैं। पुरानी रोस्टर प्रणाली के तहत इन चालकों को आठ-आठ घंटे की ड्यूटी दी जाती थी। इस रोस्टर प्रणाली के तहत एक दिन में तीन चालकों की जरूरत होती थी। तीन शिफ्टों में ड्यूटी के कारण कई एंबुलेंस बिना चालकों के खड़ी रहती थीं। इनका स्वास्थ्य विभाग तथा मरीजों को कोई लाभ नहीं मिलता था। इसके बाद स्वास्थ्य निदेशालय ने चालकों की ड्यूटी 12-12 घंटे की करते हुए दो शिफ्टों में काम करने की नई रोस्टर प्रणाली को लागू करवा दिया था। इसके बाद नागरिक अस्पताल की सभी एंबुलेंसों को ड्राइवर मिल गए थे। अब इसका विरोध करते हुए एंबुलेंस चालकों ने कहा कि नई रोस्टर प्रणाली के तहत एंबुलेंस चालकों से 12-12 घंटे का काम लिया जाता है। यह सरकार श्रम कानून अधिनियम 1961 के चैप्टर पांच की अवमानना है। श्रम कानूनों के हिसाब से कर्मचारी से एक सप्ताह में केवल 48 घंटे ही काम लिया जा सकता है।
कर्मचारियों का कहना है कि एंबुलेंस एक आपातकालीन सेवा है, इसलिए एंबुलेंस सेवा का ड्यूटी रोस्टर श्रम कानूनों का पालन करते हुए अन्य आपातकालीन सेवा प्रदाता की तरह बनाएं, ताकि कर्मचारी मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना से बचें। अधिक लंबी ड्यूटी होने तथा निरंतर काम के कारण कोई भी संभावित दुर्घटना हो सकती है। इसलिए दोबारा से पुरानी रोस्टर प्रणाली को लागू किया जाए। ड्राइवर सत्येंद्र, कुलदीप, संजय, रोशनलाल, राजबीर, कर्मबीर ने रेफर ट्रांसपोर्ट के नोडल अधिकारी डॉ. राजेश भोला ज्ञापन सौंपा।
विज्ञापन
एंबुलेंस चालकों ने पुरानी रोस्टर प्रणाली को लागू करने के लिए ज्ञापन सौंपा है। यदि पुरानी रोस्टर प्रणाली लागू हुई तो नागरिक अस्पताल की लगभग सात एंबुलेंस बिना चालकों के खड़ी हो जाएंगी। कर्मचारियों का ज्ञापन पीएमओ डॉ. शशि प्रभा को सौंप दिया है। इस मामले में फैसला उच्च अधिकारियों को लेना है। जैसे भी निर्देश मिलेंगे, उसके हिसाब से ही रोस्टर प्रणाली बनाई जाएगी।
डॉ. राजेश भोला, नोडल अधिकारी रेफरल ट्रांसपोर्टर।
विज्ञापन
बताते चलें कि नागरिक अस्पताल में 21 एंबुलेंस व 43 ड्राइवर इस समय कार्यरत हैं। पुरानी रोस्टर प्रणाली के तहत इन चालकों को आठ-आठ घंटे की ड्यूटी दी जाती थी। इस रोस्टर प्रणाली के तहत एक दिन में तीन चालकों की जरूरत होती थी। तीन शिफ्टों में ड्यूटी के कारण कई एंबुलेंस बिना चालकों के खड़ी रहती थीं। इनका स्वास्थ्य विभाग तथा मरीजों को कोई लाभ नहीं मिलता था। इसके बाद स्वास्थ्य निदेशालय ने चालकों की ड्यूटी 12-12 घंटे की करते हुए दो शिफ्टों में काम करने की नई रोस्टर प्रणाली को लागू करवा दिया था। इसके बाद नागरिक अस्पताल की सभी एंबुलेंसों को ड्राइवर मिल गए थे। अब इसका विरोध करते हुए एंबुलेंस चालकों ने कहा कि नई रोस्टर प्रणाली के तहत एंबुलेंस चालकों से 12-12 घंटे का काम लिया जाता है। यह सरकार श्रम कानून अधिनियम 1961 के चैप्टर पांच की अवमानना है। श्रम कानूनों के हिसाब से कर्मचारी से एक सप्ताह में केवल 48 घंटे ही काम लिया जा सकता है।
विज्ञापन
कर्मचारियों का कहना है कि एंबुलेंस एक आपातकालीन सेवा है, इसलिए एंबुलेंस सेवा का ड्यूटी रोस्टर श्रम कानूनों का पालन करते हुए अन्य आपातकालीन सेवा प्रदाता की तरह बनाएं, ताकि कर्मचारी मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना से बचें। अधिक लंबी ड्यूटी होने तथा निरंतर काम के कारण कोई भी संभावित दुर्घटना हो सकती है। इसलिए दोबारा से पुरानी रोस्टर प्रणाली को लागू किया जाए। ड्राइवर सत्येंद्र, कुलदीप, संजय, रोशनलाल, राजबीर, कर्मबीर ने रेफर ट्रांसपोर्ट के नोडल अधिकारी डॉ. राजेश भोला ज्ञापन सौंपा।
विज्ञापन
एंबुलेंस चालकों ने पुरानी रोस्टर प्रणाली को लागू करने के लिए ज्ञापन सौंपा है। यदि पुरानी रोस्टर प्रणाली लागू हुई तो नागरिक अस्पताल की लगभग सात एंबुलेंस बिना चालकों के खड़ी हो जाएंगी। कर्मचारियों का ज्ञापन पीएमओ डॉ. शशि प्रभा को सौंप दिया है। इस मामले में फैसला उच्च अधिकारियों को लेना है। जैसे भी निर्देश मिलेंगे, उसके हिसाब से ही रोस्टर प्रणाली बनाई जाएगी।
डॉ. राजेश भोला, नोडल अधिकारी रेफरल ट्रांसपोर्टर।