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देश में एक साथ हों सभी चुनाव : विजयपाल
Fri, 11 Apr 2025 01:49 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Fri, 11 Apr 2025 01:49 AM IST
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10जेएनडी19-लैय्या धर्मशाला में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए एडवोकेट विजयपाल सिंह। संवाद
- फोटो : चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि
सफीदों। भाजपा कार्यकर्ताओं की वीरवार को लैय्या धर्मशाला में बैठक हुई। इसमें मुख्यातिथि भाजपा एक राष्ट्र-एक चुनाव के प्रदेश संयोजक एडवोकेट विजयपाल सिंह ने शिरकत की।
उन्होंने कहा कि देश में अलग-अलग चुनाव कराने को लेकर बार-बार सवाल उठने के बाद मोदी सरकार के संज्ञान में यह विचार आया कि देश में सभी चुनाव एक साथ होने चाहिए। इसको लेकर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया।
पेश की गई रिपोर्ट को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने मान्य किया और देश की संसद में एक राष्ट्र एक चुनाव को लेकर संशोधन बिल पेश हो चुका है। उन्होंने कहा कि देश में एक साथ चुनाव होने से शासन में निरंतरता आएगी। विभिन्न राज्यों में चुनावों के चलते राजनीतिक दल और उनके नेता और सरकारों का ध्यान चुनावों पर ही रहता है। एक साथ चुनाव होगा तो फोकस भी लोगों के लिए जनकल्याणकारी नीतियों को लागू करने पर रहेगा।
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अधिकारी काम पर ध्यान दे पाएंगे। चुनाव की वजहों से पुलिस सहित अनेक विभागों के पर्याप्त संख्या में कर्मियों की तैनाती करनी पड़ती है। एकसाथ चुनाव कराए जाने से बार-बार तैनाती की जरूरत कम हो जाएगी, जिससे सरकारी अधिकारी अपने मूल दायित्वों पर फोकस कर पाएंगे। चुनावों के दौरान आदर्श आचार संहिता के क्रियान्वयन से नियमित प्रशासनिक गतिविधियां रुक जाती हैं। एक साथ चुनाव कराने से आदर्श आचार संहिता के लागू होने का समय कम होगा और इससे पॉलिसी पैरालिसिस कम होगा।
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उन्होंने कहा कि देश में अलग-अलग चुनाव कराने को लेकर बार-बार सवाल उठने के बाद मोदी सरकार के संज्ञान में यह विचार आया कि देश में सभी चुनाव एक साथ होने चाहिए। इसको लेकर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया।
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पेश की गई रिपोर्ट को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने मान्य किया और देश की संसद में एक राष्ट्र एक चुनाव को लेकर संशोधन बिल पेश हो चुका है। उन्होंने कहा कि देश में एक साथ चुनाव होने से शासन में निरंतरता आएगी। विभिन्न राज्यों में चुनावों के चलते राजनीतिक दल और उनके नेता और सरकारों का ध्यान चुनावों पर ही रहता है। एक साथ चुनाव होगा तो फोकस भी लोगों के लिए जनकल्याणकारी नीतियों को लागू करने पर रहेगा।
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अधिकारी काम पर ध्यान दे पाएंगे। चुनाव की वजहों से पुलिस सहित अनेक विभागों के पर्याप्त संख्या में कर्मियों की तैनाती करनी पड़ती है। एकसाथ चुनाव कराए जाने से बार-बार तैनाती की जरूरत कम हो जाएगी, जिससे सरकारी अधिकारी अपने मूल दायित्वों पर फोकस कर पाएंगे। चुनावों के दौरान आदर्श आचार संहिता के क्रियान्वयन से नियमित प्रशासनिक गतिविधियां रुक जाती हैं। एक साथ चुनाव कराने से आदर्श आचार संहिता के लागू होने का समय कम होगा और इससे पॉलिसी पैरालिसिस कम होगा।