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मृदा की जांच कर आवश्यकता अनुसार डाले खाद : डॉ. धीरज

Tue, 05 Nov 2024 01:09 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद Updated Tue, 05 Nov 2024 01:09 AM IST
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After testing the soil, apply fertilizer as per requirement: Dr. Dheeraj
जींद। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय ने हरियाणा कृषि प्रबंधन एवं विस्तार प्रशिक्षण संस्थान में प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया। इसमें कृषि विज्ञान केंद्र के मृदा वैज्ञानिक डॉ. धीरज पंघाल ने प्रशिक्षकों को जानकारी दी।
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उन्होंने बताया कि अधिक पैदावार के लिए एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन एक महत्वपूर्ण पद्धति है। इसमें रसायनिक उर्वरक, सूक्ष्म पोषक तत्व, जैविक उर्वरक, हरी-नीली शैवाल, गोबर खाद एवं हरी खाद आदि का समुचित उपयोग किया जाता है। फसलों के उत्पादन में मुख्य पोषक तत्व नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, जिंक आदि महत्वपूर्ण हैं। इनकी भरपाई किसान रासायनिक उर्वरक का उपयोग करके करते हैं। एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन सभी प्रकार के आदानों को आवश्यकतानुसार उपयोग करने के लिए बढ़ावा देता है। मृदा के स्वास्थ्य को बनाए रखने, मृदा की उपजाऊ शक्ति को बढ़ाने एवं लाभकारी सूक्ष्म जीवों की संख्या बढ़ाने के लिए एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है।
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उन्होंने बताया की एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन का सबसे पहला सिद्धांत यह है कि फसल लेने के पूर्व मृदा प्रयोगशाला में मृदा की जांच कराई जाए, ताकि जांच की रिपोर्ट के आधार पर मृदा में उपलब्ध पोषक तत्वों की जानकारी प्राप्त हो सके। इसके आधार पर पोषक तत्वों की सही मात्रा खेत में डाली जा सके। सामान्य तौर में किसान अपनी मृदा की जांच नहीं कराते हैं। सामान्यतया फसलों के लिए 80.100 किलो/हेक्टर, नाइट्रोजन, 50-60 किलो प्रति हेक्टेयर फास्फोरस एवं 30-50 किलो प्रति हेक्टेयर पोटाश की मात्रा की सिफारिश की जाती है। खेत तैयार करते समय खेत में सड़ी हुई गोबर खाद अथवा कंपोस्ट खाद का 10-12 टन प्रति हेक्टेयर का प्रयोग किया जाए तो इससे नाइट्रोजन का अधिक उपयोग हो पाता हैं एवं पोषक तत्व प्राप्त होने के साथ-साथ मृदा को भौतिक स्तर में भी सुधार होता है।
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