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Jind News: शिक्षा विभाग में 233 पदों को समाप्त करने के विरोध में 12 फरवरी को राष्ट्रव्यापी हड़ताल
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16जेएनडी25: बैठक में मौजूद हरियाणा एजुकेशन मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन सदस्य। स्रोत संगठन
जींद। शिक्षा विभाग की ओर से रेशनेलाईजेशन के नाम पर सहायक के पदों को समाप्त करने के विरोध में हरियाणा एजुकेशन मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन ने शुक्रवार को डीईओ कार्यालय में बैठक की। एसोसिएशन के सदस्यों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ रोष जताया।
इस दौरान उन्होंने 11 सूत्रीय मांगों का नोटिस महानिदेशक के नाम सौंपा है। चेतावनी दी कि यदि 5 फरवरी तक मांगों का समाधान नहीं हुआ तो 11 फरवरी को शिक्षा सदन पंचकुला पर प्रदर्शन किया जाएगा और 12 फरवरी को राष्ट्रव्यापी हड़ताल की जाएगी। 19 जनवरी को प्रदेशभर में प्रदर्शन किया जाएगा।
बैठक की अध्यक्षता प्रधान राजपाल दुहन ने की और संचालन सचिव विनीता पटवा ने किया। प्रांतीय अध्यक्ष संदीप सांगवान और महासचिव हितेंद्र सिहाग ने कहा कि सरकार और शिक्षा विभाग फील्ड कर्मचारियों का शोषण कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति और रेशनेलाईजेशन के नाम पर पहले स्कूलों को मर्ज किया गया और अब सहायक के 233 पदों को समाप्त करने की साजिश रची जा रही है।
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वर्तमान में शिक्षा विभाग में लिपिक के 5250, सहायक के 465 और अधीक्षक के 44 पद स्वीकृत हैं। पदोन्नति के अवसर पहले ही कम हैं ऐसे में सहायक के 50 प्रतिशत पदों पर कैंची चलाने से लिपिकों के भविष्य पर संकट मंडरा रहा है।
उन्होंने कहा कि एक लिपिक 32 साल की नौकरी के बाद सहायक बन पाता है लेकिन इन नए फरमानों के लागू होने से वह मजबूरन लिपिक पद से ही सेवानिवृत्ति हो जाएगा। इस अवसर पर राजेश मोर, जयवीर सिवाच, वजीर खरब, सतीश सोलंकी, अजय गोयल, आरजू, सरोज, निर्मला और देवेंद्र हुड्डा और कर्मचारी मौजूद रहे।
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इस दौरान उन्होंने 11 सूत्रीय मांगों का नोटिस महानिदेशक के नाम सौंपा है। चेतावनी दी कि यदि 5 फरवरी तक मांगों का समाधान नहीं हुआ तो 11 फरवरी को शिक्षा सदन पंचकुला पर प्रदर्शन किया जाएगा और 12 फरवरी को राष्ट्रव्यापी हड़ताल की जाएगी। 19 जनवरी को प्रदेशभर में प्रदर्शन किया जाएगा।
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बैठक की अध्यक्षता प्रधान राजपाल दुहन ने की और संचालन सचिव विनीता पटवा ने किया। प्रांतीय अध्यक्ष संदीप सांगवान और महासचिव हितेंद्र सिहाग ने कहा कि सरकार और शिक्षा विभाग फील्ड कर्मचारियों का शोषण कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति और रेशनेलाईजेशन के नाम पर पहले स्कूलों को मर्ज किया गया और अब सहायक के 233 पदों को समाप्त करने की साजिश रची जा रही है।
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वर्तमान में शिक्षा विभाग में लिपिक के 5250, सहायक के 465 और अधीक्षक के 44 पद स्वीकृत हैं। पदोन्नति के अवसर पहले ही कम हैं ऐसे में सहायक के 50 प्रतिशत पदों पर कैंची चलाने से लिपिकों के भविष्य पर संकट मंडरा रहा है।
उन्होंने कहा कि एक लिपिक 32 साल की नौकरी के बाद सहायक बन पाता है लेकिन इन नए फरमानों के लागू होने से वह मजबूरन लिपिक पद से ही सेवानिवृत्ति हो जाएगा। इस अवसर पर राजेश मोर, जयवीर सिवाच, वजीर खरब, सतीश सोलंकी, अजय गोयल, आरजू, सरोज, निर्मला और देवेंद्र हुड्डा और कर्मचारी मौजूद रहे।