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Jind News: अमावस्या पर नागक्षेत्र पर हुआ हवन और तीर्थ परिक्रमा
Mon, 19 Jan 2026 12:11 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Mon, 19 Jan 2026 12:11 AM IST
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18जेएनडी15:नागक्षेत्र सरोवर मंदिर में हवन करते हुए श्रद्धालुगण। संवाद
जींद। अखिल भारतीय ब्राह्मण संसद के तत्वावधान में नगर के पौराणिक और महाभारतकालीन नागक्षेत्र सरोवर पर अमावस्या के अवसर पर स्नान, हवन और तीर्थ परिक्रमा का आयोजन किया गया।
इस धार्मिक आयोजन में नगर की विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। बतौर मुख्यातिथि समाजसेवी योगेश गर्ग ने शिरकत की। कार्यक्रम की शुरुआत नागक्षेत्र सरोवर में स्नान से हुई। स्नान उपरांत नागक्षेत्र मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ हवन किया गया।
श्रद्धालुओं ने भगवान के नाम का जाप करते हुए नागक्षेत्र सरोवर की परिक्रमा की और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। समाजसेवी योगेश गर्ग ने कहा कि संस्था द्वारा लोगों को पुरातन संस्कृति व धर्म ध्यान से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। जिसकी जितनी प्रशंसा की जाए, उतनी कम है।
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इस प्रयास के माध्यम से ऐतिहासिक नागक्षेत्र तीर्थ अपने पुरातन वैभव को पुन: प्राप्त करेगा। संस्था के अध्यक्ष संजीव गौतम ने कहा कि सफीदों का नागक्षेत्र सरोवर और मंदिर लगभग 5 हजार वर्ष पुराना है जो अपने भीतर एक गौरवशाली और ऐतिहासिक विरासत समेटे हुए है। पुरातन परंपरा को पुनर्जीवित करते हुए अमावस्या पर स्नान की शुरुआत की गई है जो आगे भी निरंतर जारी रहेगी।
मान्यता है कि लगातार 12 अमावस्या पर यहां स्नान करने से पितृ दोष समाप्त होता है। लगातार यहां हो रहे कार्यक्रमों से नागक्षेत्र तीर्थ एक बार फिर आस्था और परंपरा का केंद्र बन रहा है।
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इस धार्मिक आयोजन में नगर की विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। बतौर मुख्यातिथि समाजसेवी योगेश गर्ग ने शिरकत की। कार्यक्रम की शुरुआत नागक्षेत्र सरोवर में स्नान से हुई। स्नान उपरांत नागक्षेत्र मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ हवन किया गया।
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श्रद्धालुओं ने भगवान के नाम का जाप करते हुए नागक्षेत्र सरोवर की परिक्रमा की और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। समाजसेवी योगेश गर्ग ने कहा कि संस्था द्वारा लोगों को पुरातन संस्कृति व धर्म ध्यान से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। जिसकी जितनी प्रशंसा की जाए, उतनी कम है।
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इस प्रयास के माध्यम से ऐतिहासिक नागक्षेत्र तीर्थ अपने पुरातन वैभव को पुन: प्राप्त करेगा। संस्था के अध्यक्ष संजीव गौतम ने कहा कि सफीदों का नागक्षेत्र सरोवर और मंदिर लगभग 5 हजार वर्ष पुराना है जो अपने भीतर एक गौरवशाली और ऐतिहासिक विरासत समेटे हुए है। पुरातन परंपरा को पुनर्जीवित करते हुए अमावस्या पर स्नान की शुरुआत की गई है जो आगे भी निरंतर जारी रहेगी।
मान्यता है कि लगातार 12 अमावस्या पर यहां स्नान करने से पितृ दोष समाप्त होता है। लगातार यहां हो रहे कार्यक्रमों से नागक्षेत्र तीर्थ एक बार फिर आस्था और परंपरा का केंद्र बन रहा है।