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Jind News: राष्ट्रव्यापी हड़ताल को लेकर कई गांवों में पहुंंचा जत्था
Sun, 08 Feb 2026 11:57 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sun, 08 Feb 2026 11:57 PM IST
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08जेएनडी15-राष्ट्रव्यापी हड़ताल को लेकर घिमाना पहुंचे जत्थे में शामिल ग्रामीण। स्रोत सदस्य
जींद। राष्ट्रव्यापी हड़ताल 12 फरवरी की तैयारियों को लेकर रविवार को सीटू और सर्व कर्मचारी संघ का जत्था रामगढ़, घिमाना, बीबीपुर, ईगराह व गुलकनी पहुंचा। जत्थे में सीटू नेता कपूर सिंह, पवन कुमार, जोगिंद्र ईगराह, सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के ब्लॉक प्रधान मंदीप नेहरा, रामबीर शर्मा, किसान नेता वेद प्रकाश अलेवा शामिल हुए।
कपूर सिंह ने बताया कि केंद्र व राज्य सरकार की नीतियां लगातार मेहनतकश जनता के अधिकारों का हनन कर रही हैं। आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार ने 11 वर्षों में श्रम कानूनों को कमजोर कर पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाया है। नवंबर में पारित चार लेबर कोड को रद्द करवाने, न्यूनतम वेतन 30 हजार रुपये लागू करने, पक्की नौकरी की गारंटी और निर्माण मजदूरों के पंजीकरण की बहाली के लिए 12 फरवरी को ऐतिहासिक चक्का जाम किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत-जी राम जी के नाम पर मनरेगा के मूल ढांचे को खत्म किया जा रहा है। सरकार ने काम मांगने के 15 दिन के भीतर काम देने की गारंटी और बेरोजगारी भत्ते जैसे कानूनी अधिकारों को समाप्त कर दिया है। नेताओं का मानना है कि यह बदलाव ग्रामीण क्षेत्रों में ठेकेदारी प्रथा को बढ़ावा देने की एक बड़ी साजिश है, जिसे मजदूर वर्ग किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेगा।
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उन्होंने कहा कि हरियाणा में बिजली बिल-2025 की नीतियों, फ्यूल सरचार्ज और स्लैब में बदलाव के कारण आम जनता पर भारी आर्थिक बोझ पड़ा है। स्मार्ट मीटर योजना को जबरन थोपना और लोकतांत्रिक आंदोलनों को दबाने के लिए ''शांति बिल'' जैसे कानून लाना सरकार की जन-विरोधी मानसिकता को दर्शाता है।
उन्होंने मांग की है कि पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के 31 दिसंबर 2025 के फैसले को तुरंत लागू किया जाए और सभी काले कानूनों को वापस लिया जाए। उन्होंने आह्वान किया कि 12 फरवरी को देश का हर मजदूर, किसान और छोटा व्यापारी सड़कों पर उतरकर सरकार को अपनी ताकत का अहसास कराएगा। इस अवसर पर कश्मीर ईगराह, रमेश शर्मा मौजूद रहे।
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कपूर सिंह ने बताया कि केंद्र व राज्य सरकार की नीतियां लगातार मेहनतकश जनता के अधिकारों का हनन कर रही हैं। आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार ने 11 वर्षों में श्रम कानूनों को कमजोर कर पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाया है। नवंबर में पारित चार लेबर कोड को रद्द करवाने, न्यूनतम वेतन 30 हजार रुपये लागू करने, पक्की नौकरी की गारंटी और निर्माण मजदूरों के पंजीकरण की बहाली के लिए 12 फरवरी को ऐतिहासिक चक्का जाम किया जाएगा।
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उन्होंने कहा कि विकसित भारत-जी राम जी के नाम पर मनरेगा के मूल ढांचे को खत्म किया जा रहा है। सरकार ने काम मांगने के 15 दिन के भीतर काम देने की गारंटी और बेरोजगारी भत्ते जैसे कानूनी अधिकारों को समाप्त कर दिया है। नेताओं का मानना है कि यह बदलाव ग्रामीण क्षेत्रों में ठेकेदारी प्रथा को बढ़ावा देने की एक बड़ी साजिश है, जिसे मजदूर वर्ग किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेगा।
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उन्होंने कहा कि हरियाणा में बिजली बिल-2025 की नीतियों, फ्यूल सरचार्ज और स्लैब में बदलाव के कारण आम जनता पर भारी आर्थिक बोझ पड़ा है। स्मार्ट मीटर योजना को जबरन थोपना और लोकतांत्रिक आंदोलनों को दबाने के लिए ''शांति बिल'' जैसे कानून लाना सरकार की जन-विरोधी मानसिकता को दर्शाता है।
उन्होंने मांग की है कि पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के 31 दिसंबर 2025 के फैसले को तुरंत लागू किया जाए और सभी काले कानूनों को वापस लिया जाए। उन्होंने आह्वान किया कि 12 फरवरी को देश का हर मजदूर, किसान और छोटा व्यापारी सड़कों पर उतरकर सरकार को अपनी ताकत का अहसास कराएगा। इस अवसर पर कश्मीर ईगराह, रमेश शर्मा मौजूद रहे।