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घोषणाओं में अटका जींद का विकास, मेडिकल कॉलेज की घोषणा पर घोषणा नतीजा शून्य
Updated Sat, 10 Mar 2018 12:28 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
पिछड़ेपन का ठप्पा उतारने के लिए लगातार प्रयास कर रहे जींद जिला को इस बार भी प्रदेश सरकार के बजट से निराशा ही हाथ लगी है। इस बजट में भी सरकार ने पुरानी योजनाओं का ही जिक्र कर उन्हें नई पैकिंग में परोसने का काम किया है। इससे जिला के लोगों में काफी रोष है। पिछले बजट और सरकार की घोषणाओं पर अभी तक सरकार एक कदम भी आगे नहीं बढ़ पाई है। वहीं वर्षों से सरकारी उपेक्षा झेल कर बदहाल हो चुके जींद के औद्योगिक क्षेत्र के लिए भी प्रदेश के बजट में कोई प्रावधान नहीं किया गया।
प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने तीन साल पहले जींद में मेडिकल कॉलेज की घोषणा की थी। इसके बाद पिछले बजट में भी इस परियोजना को डाला गया। इसके बावजूद यह परियोजना लटकी खड़ी है। अब मेडिकल कॉलेज के लिए जमीन मुहैया करवाने वाली पंचायत भी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रही है। घोषणा के बाद इस परियोजना को लागू करना तो दूर, इसके लिए कोई प्रावधान भी नहीं आया है। पहली बार मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने 2014 में जींद में मेडिकल कॉलेज की घोषणा की थी। इसके बाद एक साल तक जमीन की तलाश चलती रही, लेकिन जमीन मिले हुए भी दो साल हो गए हैं, लेकिन काम आगे नहीं बढ़ा है।
डेढ़ करोड़ का प्रावधान
घोषणा के तीन साल बाद तक सरकार हैबतपुर गांव की पंचायत द्वारा मुहैया करवाए गई 24 एकड़ जमीन की चारदीवारी की योजना ही बना पाई है। इसके लिए एक करोड़ 40 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। चारदीवार काम शुरू करने के लिए अभी तक टेंडर प्रक्रिया भी शुरू नहीं हुई है।
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45 साल से उपेक्षित औद्योगिक क्षेत्र
हांसी रोड पर बना औद्योगिक क्षेत्र पिछले 45 साल से उपेक्षित है। औद्योगिक क्षेत्र के प्रधान उद्योगपति सुधीर गर्ग के अनुसार सरकार ने सिर्फ यहां प्लॉट दिए हैं। 87 प्लॉट धारकों के पैसे फंस गए हैं। आज तक सरकार ने अलग से बिजली का फीडर भी नहीं दिया है। बजट में जींद के उद्योगों के लिए घोषणा की उम्मीद थी, लेकिन उम्मीद ही रह गई।
पॉलीटेक्निक कॉलेज
तीन साल पहले ही मुख्यमंत्री ने जींद में सरकारी पॉलीटेक्निक कॉलेज की घोषणा भी की थी। इसके बाद सरकार ने इस परियोजना को बजट में भी डाला, लेकिन अभी तक इसके लिए जमीन की तलाश भी सरकार नहीं कर पाई है। इसके लिए पहले आईटीआई परिसर में ही साइट तय की गई थी, लेकिन इस पर सहमति नहीं बन पाई।
आरओबी का इंतजार
मुख्यमंत्री ने तीन साल पहले ही हांसी रोड व भिवानी रोड फाटक पर दो आरओबी की घोषणा की थी। इसके बाद सरकार पिछले बजट में इन दोनों आरओबी के लिए राशि का प्रावधान किया, लेकिन अभी तक इन पर भी काम शुरू नहीं हो पाया है। हालांकि रेलवे और प्रदेश सरकार के बीच बजट का संकलन हो चुका है, लेकिन परियोजना शुरू होने का अभी इंतजार है।
शहर की पेयजल व्यवस्था
जींद शहर को नहरी पानी आधारित पेयजल मुहैया करवाने के लिए पिछले करीब पांच साल से योजना बन रही है, लेकिन अभी तक इस पर काम शुरू नहीं हो पाया है। इस परियोजना को प्रशासन ने केंद्र सरकार अमरुत योजना में डाला हुआ है। अब प्रदेश सरकार ने इसी परियोजना का बजट में प्रावधान किया है। इससे उम्मीद है कि जींद शहर की प्यास बुझ सकेगी। फिलहाल हुडा के रिहायसी क्षेत्रों को छोड़ कर शेष शहर की करीब ढाई लाख आबादी को ट्यूबवेलों से भूमिगत पानी ही सप्लाई किया जा रहा है।
जींद के लिए यह है नया
धान की पराली से बिजली बनाने का संयंत्र
शुक्रवार को सरकार द्वारा प्रस्तुत किए गए बजट में चार जिलों में लगभग 50 मेगा वाट क्षमता की धान की पराली आधारित बिजली परियोजनाओं की स्थापना के लिए परियोजना शुरू की है। इसमें जींद भी शामिल है। बजट में वित्तमंत्री ने बताया है कि इसके लिए डेवलपर्स से प्रस्ताव निवेदन आमंत्रित किए हैं। वहीं सरकार ने राज्य में गोबर, पोल्ट्री कचरे, उपयुक्त जैव-कचरे पर आधारित लगभग 20 मेगावाट क्षमता की बायोगैस बिजली परियोजनाएं स्थापित करने के लिए भी प्रस्ताव निवेदन आमंत्रित किए हैं।
घोषणा पर ही रुकी जींद-हांसी रेल
जींद-हांसी रेल परियोजना भी सिर्फ घोषणाओं में ही फंस कर रह गई है। चार साल पहले रेल बजट में इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार ने घोषणा की थी। इसके बाद प्रदेश सरकार ने पिछले साल के बजट में इसके लिए राशि का प्रावधान किया था। एक साल बाद भी इसके लिए रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
पुरानी परियोजना की नई पैकेजिंग
जुलाना विधान सभा के तीन क्लस्टर के लिए प्रशासन ने करीब एक साल पहले नाबार्ड की वित्तीय सहायता से करीब 30 गांवों में पेयजल मुहैया करवाने की योजना बनाई थी। बजट में फिर से इसी योजना की घोषणा की गई है। इस परियोजना पर फिलहाल काम चल रहा है।
सरकार की घोषणा पर ही शक
पंचायत ने गांव में अच्छी परियोजना के लिए महत्वपूर्ण जमीन के 22 एकड़ मेडिकल कॉलेज के लिए दिए हैं, लेकिन अब सरकार घोषणा पर ही शक होने लगा है। इसको लेकर पंचायत हर अधिकारी व नेता के पास जा चुकी है, लेकिन कहीं से भी संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा है। इस परियोजना में हो रही देरी से गांव के लोगों में काफी रोष है।
कबश्मीरो देवी, सरपंच हैबतपुर।
जींद के लिए होनी चाहिए थी खास घोषणा
विधानसभा में श्वेतपत्र में सरकार ने खुद स्वीकारा है कि पिछली सरकारों ने जींद जिला के साथ भेदभाव किया है। मां भी अपने कमजोर बेटे को अधिक खाना देती है। विकास की दौड़ में अन्य जिलों के साथ लाने के लिए जींद को विशेष पैकेज मिलना चाहिए, लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया।
परमेंद्र सिंह ढुल, विधायक, जुलाना।
रोजगार पर नहीं ध्यान
बजट में बेरोजगारी जैसी समस्या को दूर करने के लिए कोई खास प्रावधान नहीं है। आज के दौर में बेरोजगारी सबसे बड़ी समस्या है। भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में इसके लिए वादा भी किया था, लेकिन युवाओं पर बजट में फोकस नहीं है।
पिरथी नंबरदार, विधायक, नरवाना।
जींद के साथ फिर हुई भेदभाव
पिछली सरकारों ने जिस प्रकार जींद जिला विशेषकर जींद विधानसभा के साथ भेदभाव किया, वर्तमान सरकार ने भी उसे ही आगे बढ़ाया है। जींद शहर को पेयजल की बहुत पुरानी मांग है, लेकिन इस पर कोई ठोस घोषणा नहीं की गई।
डॉ. हरिचंद मिढ़ा, विधायक, जींद।
प्रदेश के विकास को मिलेगी गति
बजट में शिक्षा से लेकर कृषि व आधारभूत ढांचा बढ़ाने के लिए खास प्रावधान किए गए हैं। जिस प्रकार हर जिला में आईटीआई खोलने की सरकार ने परियोजना तैयार की है, इससे भविष्य में सक्षम युवा निकलेंगे और रोजगार का संकट कम होगा। इसके अलावा राष्ट्रीय राजमार्ग बनने से विकास को तेजी मिलेगी।
जसबीर देशवाल, विधायक, सफीदों।
कृषि को तबाह करने की योजना
प्रदेश सरकार का बजट कृषि क्षेत्र को तबाह करने की योजना का पुलिंदा है। बजट में किसानों को कर्ज से मुक्ति की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। किसानों को मिलावटी बीज, खाद व दवाइयों से मुक्ति चाहिए, इसके लिए कोई मेकेनिज्म सरकार तैयार नहीं कर रही।
संदीप, सदस्य चौधरी छोटूराम किसान क्लब
महिलाओं को बजट से निराशा
सरकार बेशक महिलाओं के उत्थान के दावे कर रही है, लेकिन बजट में ऐसा कुछ नहीं मिला। न तो गृहणियों को राहत है और न ही कामकाजी महिलाओं के लिए कुछ है। महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए योजना आनी चाहिए थी।
नूतन प्रकाश।
बॉक्स
आधारभूत ढांचे पर है सरकार का फोकस
सरकार ने आधारभूम ढांचा विकसित करने के लिए खास योजनाएं बनाई हैं। इससे आने वाले समय में हर वर्ग को लाभ होगा। बजट में जिस प्रकार से कर संग्रहण पर काम किया गया है, इससे व्यापारियों पर अधिक बोझ नहीं पड़ेगा।
अनिल मंगला, व्यापारी।
बजट को किसी ने निराशा जनक तो किसी बताया लाभदायक
अमर उजाला ब्यूरो
नरवाना। शुक्रवार को प्रदेश के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने भाजपा सरकार का चौथा बजट पेश किया जिसको विपक्ष ने जहां निराशा जनक बताया तो वहीं भाजपा ने सराहना की। वित्त मंत्री द्वारा पेश किया गया बजट से कुछ लोग नाराज है, कुछ ने बजट की सहराना की।
बजट से गरीब, किसान और ग्रामीणों को फायदा होगा। बजट को हर वर्ग के लिए काफी फायदेमंद है, वित्त मंत्री द्वारा पेश किया गया बजट से आम लोगों को काफी राहत मिलेगी।
भारतभूषण गर्ग।
व्यापारियों के लिए कोई राहत नहीं
नप के पूर्व प्रधान कैलाश सिंगला ने कहा कि बजट में व्यापारियों के लिए कोई राहत नहीं दी गई, जबकि सरकार ने व्यापारियों से वायदा खिलाफी करते हुए इ मंडी करने की घोषणा की है।
कैलाश सिंगला।
बॉक्स
बजट बेहद निराशा जनक
एडवोकेट सुशील कौशिक ने कहा कि बजट में युवाओं के लिए रोजगार बढ़ाने का कोई प्रावधान नहीं है। पिछले चार वर्षों से बेरोजगार सरकार की ओर देख रहे है, लेकिन सरकार है कि उनको कोई काम देने को तैयार नहीं है।
सुशील कौशिक।
किसानों को गुमराह कर रही है सरकार
इनेलो के हलका अध्यक्ष सुदेश चौपड़ा ने भाजपा सरकार किसानों की आय दो गुणा करने का दावा करके किसानों को गुमराह करने का काम रही है, जबकि धरातल पर कोई काम नहीं कर रही। बजट में किसानों के लिए कुछ नहीं है।
सुदेश चौपड़ा
नरवाना को महिला राजकीय कॉलेज की सौगात, इस इलाके की पुरानी मांग पूरी
नरवाना। नरवाना में भाजपा सरकार ने अलग से महिला कालेज बनाने का एलान किया है। सरकार ने यह दावा भी किया है कि इसी सत्र से दाखिले शुरू कर दिए जाएंगे। नया कालेज बनने के बाद इस क्षेत्र को शिक्षा के क्षेत्र में एक नया आयाम मिलेगा। गौरतलब है कि नरवाना के इनेलो विधायक पिरथी सिंह नंबरदार ने वीरवार को विधान सभा में नरवाना में अलग से महिला कालेज बनाने की मांग की थी जिस पर प्रदेश के शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा ने कालेज बनाने की घोषणा कर दी। पिरथी सिंह नंबरदार ने विधान सभा में बोलते हुए बताया कि नरवाना के केएम राजकीय कालेज में तीन हजार से ज्यादा बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं जबकि सीटें कम होने के कारण हजारों बच्चे दाखिला लेने से वंचित रह जाते हैं। शिक्षा ग्रहण कर रहे बच्चों में आधे से ज्यादा लड़कियां है और जहां एक हजार से उपर लड़कियां शिक्षा ग्रहण कर रही हो वहां अलग से लड़कियों के लिए कालेज बनाने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि वैसे भी भाजपा सरकार का दावा है कि लड़कियों को शिक्षा ग्रहण करने के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा, जबकि नरवाना क्षेत्र की लड़कियों को टोहाना, कैथल और जींद जाना पड़ता है। इस पर संज्ञान लेते हुए शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा ने केएम राजकीय कालेज के परिसर में नया कन्या/महिला महाविद्यालय बनाने की घोषणा की है। कालेज के अलावा विधायक ने आइटीआइ नरवाना में पार्क बनाने और सड़कें बनाने की मांग भी की। सरकार ने सड़कें बनाने की घोषणा की है।
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जींद।
पिछड़ेपन का ठप्पा उतारने के लिए लगातार प्रयास कर रहे जींद जिला को इस बार भी प्रदेश सरकार के बजट से निराशा ही हाथ लगी है। इस बजट में भी सरकार ने पुरानी योजनाओं का ही जिक्र कर उन्हें नई पैकिंग में परोसने का काम किया है। इससे जिला के लोगों में काफी रोष है। पिछले बजट और सरकार की घोषणाओं पर अभी तक सरकार एक कदम भी आगे नहीं बढ़ पाई है। वहीं वर्षों से सरकारी उपेक्षा झेल कर बदहाल हो चुके जींद के औद्योगिक क्षेत्र के लिए भी प्रदेश के बजट में कोई प्रावधान नहीं किया गया।
प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने तीन साल पहले जींद में मेडिकल कॉलेज की घोषणा की थी। इसके बाद पिछले बजट में भी इस परियोजना को डाला गया। इसके बावजूद यह परियोजना लटकी खड़ी है। अब मेडिकल कॉलेज के लिए जमीन मुहैया करवाने वाली पंचायत भी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रही है। घोषणा के बाद इस परियोजना को लागू करना तो दूर, इसके लिए कोई प्रावधान भी नहीं आया है। पहली बार मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने 2014 में जींद में मेडिकल कॉलेज की घोषणा की थी। इसके बाद एक साल तक जमीन की तलाश चलती रही, लेकिन जमीन मिले हुए भी दो साल हो गए हैं, लेकिन काम आगे नहीं बढ़ा है।
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डेढ़ करोड़ का प्रावधान
घोषणा के तीन साल बाद तक सरकार हैबतपुर गांव की पंचायत द्वारा मुहैया करवाए गई 24 एकड़ जमीन की चारदीवारी की योजना ही बना पाई है। इसके लिए एक करोड़ 40 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। चारदीवार काम शुरू करने के लिए अभी तक टेंडर प्रक्रिया भी शुरू नहीं हुई है।
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45 साल से उपेक्षित औद्योगिक क्षेत्र
हांसी रोड पर बना औद्योगिक क्षेत्र पिछले 45 साल से उपेक्षित है। औद्योगिक क्षेत्र के प्रधान उद्योगपति सुधीर गर्ग के अनुसार सरकार ने सिर्फ यहां प्लॉट दिए हैं। 87 प्लॉट धारकों के पैसे फंस गए हैं। आज तक सरकार ने अलग से बिजली का फीडर भी नहीं दिया है। बजट में जींद के उद्योगों के लिए घोषणा की उम्मीद थी, लेकिन उम्मीद ही रह गई।
पॉलीटेक्निक कॉलेज
तीन साल पहले ही मुख्यमंत्री ने जींद में सरकारी पॉलीटेक्निक कॉलेज की घोषणा भी की थी। इसके बाद सरकार ने इस परियोजना को बजट में भी डाला, लेकिन अभी तक इसके लिए जमीन की तलाश भी सरकार नहीं कर पाई है। इसके लिए पहले आईटीआई परिसर में ही साइट तय की गई थी, लेकिन इस पर सहमति नहीं बन पाई।
आरओबी का इंतजार
मुख्यमंत्री ने तीन साल पहले ही हांसी रोड व भिवानी रोड फाटक पर दो आरओबी की घोषणा की थी। इसके बाद सरकार पिछले बजट में इन दोनों आरओबी के लिए राशि का प्रावधान किया, लेकिन अभी तक इन पर भी काम शुरू नहीं हो पाया है। हालांकि रेलवे और प्रदेश सरकार के बीच बजट का संकलन हो चुका है, लेकिन परियोजना शुरू होने का अभी इंतजार है।
शहर की पेयजल व्यवस्था
जींद शहर को नहरी पानी आधारित पेयजल मुहैया करवाने के लिए पिछले करीब पांच साल से योजना बन रही है, लेकिन अभी तक इस पर काम शुरू नहीं हो पाया है। इस परियोजना को प्रशासन ने केंद्र सरकार अमरुत योजना में डाला हुआ है। अब प्रदेश सरकार ने इसी परियोजना का बजट में प्रावधान किया है। इससे उम्मीद है कि जींद शहर की प्यास बुझ सकेगी। फिलहाल हुडा के रिहायसी क्षेत्रों को छोड़ कर शेष शहर की करीब ढाई लाख आबादी को ट्यूबवेलों से भूमिगत पानी ही सप्लाई किया जा रहा है।
जींद के लिए यह है नया
धान की पराली से बिजली बनाने का संयंत्र
शुक्रवार को सरकार द्वारा प्रस्तुत किए गए बजट में चार जिलों में लगभग 50 मेगा वाट क्षमता की धान की पराली आधारित बिजली परियोजनाओं की स्थापना के लिए परियोजना शुरू की है। इसमें जींद भी शामिल है। बजट में वित्तमंत्री ने बताया है कि इसके लिए डेवलपर्स से प्रस्ताव निवेदन आमंत्रित किए हैं। वहीं सरकार ने राज्य में गोबर, पोल्ट्री कचरे, उपयुक्त जैव-कचरे पर आधारित लगभग 20 मेगावाट क्षमता की बायोगैस बिजली परियोजनाएं स्थापित करने के लिए भी प्रस्ताव निवेदन आमंत्रित किए हैं।
घोषणा पर ही रुकी जींद-हांसी रेल
जींद-हांसी रेल परियोजना भी सिर्फ घोषणाओं में ही फंस कर रह गई है। चार साल पहले रेल बजट में इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार ने घोषणा की थी। इसके बाद प्रदेश सरकार ने पिछले साल के बजट में इसके लिए राशि का प्रावधान किया था। एक साल बाद भी इसके लिए रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
पुरानी परियोजना की नई पैकेजिंग
जुलाना विधान सभा के तीन क्लस्टर के लिए प्रशासन ने करीब एक साल पहले नाबार्ड की वित्तीय सहायता से करीब 30 गांवों में पेयजल मुहैया करवाने की योजना बनाई थी। बजट में फिर से इसी योजना की घोषणा की गई है। इस परियोजना पर फिलहाल काम चल रहा है।
सरकार की घोषणा पर ही शक
पंचायत ने गांव में अच्छी परियोजना के लिए महत्वपूर्ण जमीन के 22 एकड़ मेडिकल कॉलेज के लिए दिए हैं, लेकिन अब सरकार घोषणा पर ही शक होने लगा है। इसको लेकर पंचायत हर अधिकारी व नेता के पास जा चुकी है, लेकिन कहीं से भी संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा है। इस परियोजना में हो रही देरी से गांव के लोगों में काफी रोष है।
कबश्मीरो देवी, सरपंच हैबतपुर।
जींद के लिए होनी चाहिए थी खास घोषणा
विधानसभा में श्वेतपत्र में सरकार ने खुद स्वीकारा है कि पिछली सरकारों ने जींद जिला के साथ भेदभाव किया है। मां भी अपने कमजोर बेटे को अधिक खाना देती है। विकास की दौड़ में अन्य जिलों के साथ लाने के लिए जींद को विशेष पैकेज मिलना चाहिए, लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया।
परमेंद्र सिंह ढुल, विधायक, जुलाना।
रोजगार पर नहीं ध्यान
बजट में बेरोजगारी जैसी समस्या को दूर करने के लिए कोई खास प्रावधान नहीं है। आज के दौर में बेरोजगारी सबसे बड़ी समस्या है। भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में इसके लिए वादा भी किया था, लेकिन युवाओं पर बजट में फोकस नहीं है।
पिरथी नंबरदार, विधायक, नरवाना।
जींद के साथ फिर हुई भेदभाव
पिछली सरकारों ने जिस प्रकार जींद जिला विशेषकर जींद विधानसभा के साथ भेदभाव किया, वर्तमान सरकार ने भी उसे ही आगे बढ़ाया है। जींद शहर को पेयजल की बहुत पुरानी मांग है, लेकिन इस पर कोई ठोस घोषणा नहीं की गई।
डॉ. हरिचंद मिढ़ा, विधायक, जींद।
प्रदेश के विकास को मिलेगी गति
बजट में शिक्षा से लेकर कृषि व आधारभूत ढांचा बढ़ाने के लिए खास प्रावधान किए गए हैं। जिस प्रकार हर जिला में आईटीआई खोलने की सरकार ने परियोजना तैयार की है, इससे भविष्य में सक्षम युवा निकलेंगे और रोजगार का संकट कम होगा। इसके अलावा राष्ट्रीय राजमार्ग बनने से विकास को तेजी मिलेगी।
जसबीर देशवाल, विधायक, सफीदों।
कृषि को तबाह करने की योजना
प्रदेश सरकार का बजट कृषि क्षेत्र को तबाह करने की योजना का पुलिंदा है। बजट में किसानों को कर्ज से मुक्ति की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। किसानों को मिलावटी बीज, खाद व दवाइयों से मुक्ति चाहिए, इसके लिए कोई मेकेनिज्म सरकार तैयार नहीं कर रही।
संदीप, सदस्य चौधरी छोटूराम किसान क्लब
महिलाओं को बजट से निराशा
सरकार बेशक महिलाओं के उत्थान के दावे कर रही है, लेकिन बजट में ऐसा कुछ नहीं मिला। न तो गृहणियों को राहत है और न ही कामकाजी महिलाओं के लिए कुछ है। महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए योजना आनी चाहिए थी।
नूतन प्रकाश।
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आधारभूत ढांचे पर है सरकार का फोकस
सरकार ने आधारभूम ढांचा विकसित करने के लिए खास योजनाएं बनाई हैं। इससे आने वाले समय में हर वर्ग को लाभ होगा। बजट में जिस प्रकार से कर संग्रहण पर काम किया गया है, इससे व्यापारियों पर अधिक बोझ नहीं पड़ेगा।
अनिल मंगला, व्यापारी।
बजट को किसी ने निराशा जनक तो किसी बताया लाभदायक
अमर उजाला ब्यूरो
नरवाना। शुक्रवार को प्रदेश के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने भाजपा सरकार का चौथा बजट पेश किया जिसको विपक्ष ने जहां निराशा जनक बताया तो वहीं भाजपा ने सराहना की। वित्त मंत्री द्वारा पेश किया गया बजट से कुछ लोग नाराज है, कुछ ने बजट की सहराना की।
बजट से गरीब, किसान और ग्रामीणों को फायदा होगा। बजट को हर वर्ग के लिए काफी फायदेमंद है, वित्त मंत्री द्वारा पेश किया गया बजट से आम लोगों को काफी राहत मिलेगी।
भारतभूषण गर्ग।
व्यापारियों के लिए कोई राहत नहीं
नप के पूर्व प्रधान कैलाश सिंगला ने कहा कि बजट में व्यापारियों के लिए कोई राहत नहीं दी गई, जबकि सरकार ने व्यापारियों से वायदा खिलाफी करते हुए इ मंडी करने की घोषणा की है।
कैलाश सिंगला।
बॉक्स
बजट बेहद निराशा जनक
एडवोकेट सुशील कौशिक ने कहा कि बजट में युवाओं के लिए रोजगार बढ़ाने का कोई प्रावधान नहीं है। पिछले चार वर्षों से बेरोजगार सरकार की ओर देख रहे है, लेकिन सरकार है कि उनको कोई काम देने को तैयार नहीं है।
सुशील कौशिक।
किसानों को गुमराह कर रही है सरकार
इनेलो के हलका अध्यक्ष सुदेश चौपड़ा ने भाजपा सरकार किसानों की आय दो गुणा करने का दावा करके किसानों को गुमराह करने का काम रही है, जबकि धरातल पर कोई काम नहीं कर रही। बजट में किसानों के लिए कुछ नहीं है।
सुदेश चौपड़ा
नरवाना को महिला राजकीय कॉलेज की सौगात, इस इलाके की पुरानी मांग पूरी
नरवाना। नरवाना में भाजपा सरकार ने अलग से महिला कालेज बनाने का एलान किया है। सरकार ने यह दावा भी किया है कि इसी सत्र से दाखिले शुरू कर दिए जाएंगे। नया कालेज बनने के बाद इस क्षेत्र को शिक्षा के क्षेत्र में एक नया आयाम मिलेगा। गौरतलब है कि नरवाना के इनेलो विधायक पिरथी सिंह नंबरदार ने वीरवार को विधान सभा में नरवाना में अलग से महिला कालेज बनाने की मांग की थी जिस पर प्रदेश के शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा ने कालेज बनाने की घोषणा कर दी। पिरथी सिंह नंबरदार ने विधान सभा में बोलते हुए बताया कि नरवाना के केएम राजकीय कालेज में तीन हजार से ज्यादा बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं जबकि सीटें कम होने के कारण हजारों बच्चे दाखिला लेने से वंचित रह जाते हैं। शिक्षा ग्रहण कर रहे बच्चों में आधे से ज्यादा लड़कियां है और जहां एक हजार से उपर लड़कियां शिक्षा ग्रहण कर रही हो वहां अलग से लड़कियों के लिए कालेज बनाने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि वैसे भी भाजपा सरकार का दावा है कि लड़कियों को शिक्षा ग्रहण करने के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा, जबकि नरवाना क्षेत्र की लड़कियों को टोहाना, कैथल और जींद जाना पड़ता है। इस पर संज्ञान लेते हुए शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा ने केएम राजकीय कालेज के परिसर में नया कन्या/महिला महाविद्यालय बनाने की घोषणा की है। कालेज के अलावा विधायक ने आइटीआइ नरवाना में पार्क बनाने और सड़कें बनाने की मांग भी की। सरकार ने सड़कें बनाने की घोषणा की है।