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रोडवेज महाप्रबंधक के समर्थन में उतरे कर्मचारी
Updated Fri, 01 Dec 2017 12:24 AM IST
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‘रोडवेज महाप्रबंधक को बहाल करे सरकार’
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। हरियाणा रोडवेज कर्मचारी तालमेल कमेटी की बैठक बस स्टैंड पर डिपो पर हुई। बैठक में सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने गलत तरीके से चार महा-प्रबंधकों को सस्पेंड किया है। यदि सरकार ने जल्द इन्हें बहाल नहीं किया तो रोडवेज कर्मचारी बड़े आंदोलन की घोषणा कर देंगे। बैठक की अध्यक्षता प्रधान अजीत नेहरा, श्रीभगवान और महिपाल की संयुक्त अध्यक्षता में हुई।
संजय खरैंटी ने कहा कि डिपो में बसों की बहुत कमी है। बसों का बेड़ा सरकार द्वारा बढ़ाया नहीं जा रहा, जिस कारण से आम जनता को समय पर बस सुविधा सही ढंग से नहीं मिल रही। कर्मशाला कार्यालय में कर्मचारियों की बहुत कमी है। सरकार द्वारा नई भर्ती नहीं की जा रही। इससे प्रतीत होता है कि सरकार विभाग का निजीकरण करना चाहती है। आए दिन परिवहन विभाग द्वारा डिपों स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों और अधिकारियों के प्रति कोई न कोई गलत तुगलकी फरमान जारी किए जा रहे हैं, और कर्मचारियों की सुविधाओं को भी छीनने का कार्य किया जा रहा है। 29 नवंबर को सरकार द्वारा आंकड़ों का बहाना बनाकर चार महा-प्रबंधकों को निलंबित करने का फरमान जारी किया गया। इससे पूर्व सिरसा महा-प्रबंधक को गलत ढंग से निलंबित किया गया, जबकि वरिष्ठ नागरिकों को बसों में मुफ्त यात्रा पर रोक लगाने के आदेश मुख्यालय में कार्यरत उच्च अधिकारियों द्वारा ही जारी किए गए थे। बैठक में कहा गया कि तुरंत प्रभाव से सभी महा-प्रबंधकों को बहाल किया जाए, नहीं तो रोडवेज तालमेल कमेटी दो से आठ दिसंबर तक होने वाली बैठकों में बड़े आंदोलन की घोषणा करने पर मजबूर होगी। इस मौके पर बलराज देशवाल, आजाद गिल, संजय खरैंटी, सज्जन सिंह, राजबीर शर्मा, पवन कुमार, सुशील कुमार, राजकपूर, अनिल शर्मा, राजकुमार और जोगिंद्र सिंह उपस्थित रहे।
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। हरियाणा रोडवेज कर्मचारी तालमेल कमेटी की बैठक बस स्टैंड पर डिपो पर हुई। बैठक में सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने गलत तरीके से चार महा-प्रबंधकों को सस्पेंड किया है। यदि सरकार ने जल्द इन्हें बहाल नहीं किया तो रोडवेज कर्मचारी बड़े आंदोलन की घोषणा कर देंगे। बैठक की अध्यक्षता प्रधान अजीत नेहरा, श्रीभगवान और महिपाल की संयुक्त अध्यक्षता में हुई।
संजय खरैंटी ने कहा कि डिपो में बसों की बहुत कमी है। बसों का बेड़ा सरकार द्वारा बढ़ाया नहीं जा रहा, जिस कारण से आम जनता को समय पर बस सुविधा सही ढंग से नहीं मिल रही। कर्मशाला कार्यालय में कर्मचारियों की बहुत कमी है। सरकार द्वारा नई भर्ती नहीं की जा रही। इससे प्रतीत होता है कि सरकार विभाग का निजीकरण करना चाहती है। आए दिन परिवहन विभाग द्वारा डिपों स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों और अधिकारियों के प्रति कोई न कोई गलत तुगलकी फरमान जारी किए जा रहे हैं, और कर्मचारियों की सुविधाओं को भी छीनने का कार्य किया जा रहा है। 29 नवंबर को सरकार द्वारा आंकड़ों का बहाना बनाकर चार महा-प्रबंधकों को निलंबित करने का फरमान जारी किया गया। इससे पूर्व सिरसा महा-प्रबंधक को गलत ढंग से निलंबित किया गया, जबकि वरिष्ठ नागरिकों को बसों में मुफ्त यात्रा पर रोक लगाने के आदेश मुख्यालय में कार्यरत उच्च अधिकारियों द्वारा ही जारी किए गए थे। बैठक में कहा गया कि तुरंत प्रभाव से सभी महा-प्रबंधकों को बहाल किया जाए, नहीं तो रोडवेज तालमेल कमेटी दो से आठ दिसंबर तक होने वाली बैठकों में बड़े आंदोलन की घोषणा करने पर मजबूर होगी। इस मौके पर बलराज देशवाल, आजाद गिल, संजय खरैंटी, सज्जन सिंह, राजबीर शर्मा, पवन कुमार, सुशील कुमार, राजकपूर, अनिल शर्मा, राजकुमार और जोगिंद्र सिंह उपस्थित रहे।
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