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साढ़े छह घंटे के लंबे इंतजार के बाद व्यक्ति के शव का हुआ पोस्टमार्टम
Updated Fri, 15 Jun 2018 12:33 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। कालवा गांव निवासी एक व्यक्ति के शव को पोस्टमार्टम के लिए सुबह आठ बजे नागरिक अस्पताल में लाया गया लेकिन साढ़े छह घंटे के लंबे इंतजार के बाद अस्पताल के चिकित्सकों ने शव का पोस्टमार्टम किया। परिजनों को नागरिक अस्पताल में रो-रोकर बुरा हाल हो गया। जिस चिकित्सक की ड्यूटी पोस्टमार्टम के लिए लगाई गई थी, वह ऑपरेशन थिएटर (ओटी) में था। घर पर भी महिलाओं का बुरा हाल रहा। शव के अंतिम संस्कार के लिए पहुंचे रिश्तेदारों, ग्रामीणों ने नागरिक अस्पताल प्रशासन के इस ढीले रवैये के कारण गहरी नाराजगी जाहिर की है।
पिल्लूखेड़ा के सरकारी स्कूल के पास सुबह छह बजे एक व्यक्ति का शव मिला। उसकी पहचान गांव कालवा निवासी नन्हा के रूप में हुई। पिल्लूखेड़ा पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए सुबह आठ बजे नागरिक अस्पताल में पहुंचाया। पुलिस ने कागजी कार्रवाई कर चिकित्सकों का इंतजार करना शुरू कर दिया। मृतक नन्हा के परिजन बिजेंद्र ने कहा कि उन्होंने नागरिक अस्पताल में संपर्क किया तो पता चला कि पोस्टमार्टम के लिए डॉ. भूपेंद्र की ड्यूटी है। उन्होंने डॉ. भूपेंद्र के पास फोन किया लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। इसके बाद पता चला कि डॉ. भूपेंद्र ऑपरेशन थिएटर में हैं। मृतक के परिजनों ने अस्पताल के चिकित्सकों से संपर्क किया तो उन्हें जवाब मिला कि पोस्टमार्टम को डॉ. भूपेंद्र ही करेंगे, दूसरा कोई चिकित्सक नहीं करेगा। अढ़ाई बजे डॉ. भूपेंद्र शवगृह पहुंचे और पोस्टमार्टम किया। इसके बाद परिजन शव को लेकर गांव के लिए रवाना हुए। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन से साढ़े छह घंटे का इंतजार करवाने पर गहरी आपत्ति जताई। परिजनों का कहना था कि यदि एक चिकित्सक ऑपरेशन थिएटर में हो तो दूसरे की ड्यूटी लगानी चाहिए।
पोस्टमार्टम से पहले ऑपरेशन का काम जरूरी
चिकित्सकों की कमी के कारण दिक्कत हो सकती है लेकिन साढ़े छह घंटे का लंबा समय नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन करके किसी की जान बचाना पहला कार्य होता है, पोस्टमार्टम बाद में भी हो सकता है। हो सकता है लोग शव को लेकर देरी से आए हों, और तब तक चिकित्सक ऑपरेशन थिएटर में चला गया हो।
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-डॉ. संजय दहिया, सिविल सर्जन, नागरिक अस्पताल जींद।
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जींद। कालवा गांव निवासी एक व्यक्ति के शव को पोस्टमार्टम के लिए सुबह आठ बजे नागरिक अस्पताल में लाया गया लेकिन साढ़े छह घंटे के लंबे इंतजार के बाद अस्पताल के चिकित्सकों ने शव का पोस्टमार्टम किया। परिजनों को नागरिक अस्पताल में रो-रोकर बुरा हाल हो गया। जिस चिकित्सक की ड्यूटी पोस्टमार्टम के लिए लगाई गई थी, वह ऑपरेशन थिएटर (ओटी) में था। घर पर भी महिलाओं का बुरा हाल रहा। शव के अंतिम संस्कार के लिए पहुंचे रिश्तेदारों, ग्रामीणों ने नागरिक अस्पताल प्रशासन के इस ढीले रवैये के कारण गहरी नाराजगी जाहिर की है।
पिल्लूखेड़ा के सरकारी स्कूल के पास सुबह छह बजे एक व्यक्ति का शव मिला। उसकी पहचान गांव कालवा निवासी नन्हा के रूप में हुई। पिल्लूखेड़ा पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए सुबह आठ बजे नागरिक अस्पताल में पहुंचाया। पुलिस ने कागजी कार्रवाई कर चिकित्सकों का इंतजार करना शुरू कर दिया। मृतक नन्हा के परिजन बिजेंद्र ने कहा कि उन्होंने नागरिक अस्पताल में संपर्क किया तो पता चला कि पोस्टमार्टम के लिए डॉ. भूपेंद्र की ड्यूटी है। उन्होंने डॉ. भूपेंद्र के पास फोन किया लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। इसके बाद पता चला कि डॉ. भूपेंद्र ऑपरेशन थिएटर में हैं। मृतक के परिजनों ने अस्पताल के चिकित्सकों से संपर्क किया तो उन्हें जवाब मिला कि पोस्टमार्टम को डॉ. भूपेंद्र ही करेंगे, दूसरा कोई चिकित्सक नहीं करेगा। अढ़ाई बजे डॉ. भूपेंद्र शवगृह पहुंचे और पोस्टमार्टम किया। इसके बाद परिजन शव को लेकर गांव के लिए रवाना हुए। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन से साढ़े छह घंटे का इंतजार करवाने पर गहरी आपत्ति जताई। परिजनों का कहना था कि यदि एक चिकित्सक ऑपरेशन थिएटर में हो तो दूसरे की ड्यूटी लगानी चाहिए।
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पोस्टमार्टम से पहले ऑपरेशन का काम जरूरी
चिकित्सकों की कमी के कारण दिक्कत हो सकती है लेकिन साढ़े छह घंटे का लंबा समय नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन करके किसी की जान बचाना पहला कार्य होता है, पोस्टमार्टम बाद में भी हो सकता है। हो सकता है लोग शव को लेकर देरी से आए हों, और तब तक चिकित्सक ऑपरेशन थिएटर में चला गया हो।
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-डॉ. संजय दहिया, सिविल सर्जन, नागरिक अस्पताल जींद।