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जल जीवन मिशन समिति में होंगी 50 प्रतिशत महिलाएं
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रणधीर मताना।
- फोटो : Jind
जल जीवन मिशन के तहत गठित की गई ग्राम जल एवं सीवर समिति में महिलाओं की भागदारी बढ़ाई जाएगी। इसके लिए जनस्वास्थ्य विभाग ने समिति में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया है। पहले 80 प्रतिशत समितियों में महिलाओं की संख्या 50 प्रतिशत से कम थी। महिलाओं को बराबर की भागीदारी देने के लिए जनस्वास्थ्य विभाग ने ऐसा कदम उठाया है। जल जीवन मिशन के तहत गठित की गई ग्राम जल एवं सीवर समिति में 50 प्रतिशत महिलाओं की संख्या पूरी करने के लिए जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी को पत्र लिखा गया है। अब महिलाओं की ज्यादा भागीदारी के लिए समितियों का भी गठन करने का काम शुरू कर दिया गया है।
जिले में कुल 297 ग्राम पंचायतें हैं। प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक ग्राम जल एवं सीवर समिति का गठन किया गया है। इन समितियों में कुल 11 सदस्य होते हैं। समिति में ग्राम सरपंच को अध्यक्ष, ग्राम सचिव को संयोजक और जेई को तकनीकी सदस्य बनाया जाता है। इनके अलावा आठ सदस्य होते हैं। इन आठ सदस्यों में अब कम से कम चार महिलाओं का होना अनिवार्य कर दिया गया है। महिला सदस्यों में पंच, आंगनबाड़ी वर्कर, आशा वर्कर, स्कूल अध्यापिका या फिर स्वयं सहायता समूह की किसी महिला को शामिल किया जाएगा।
नल से पानी पहुंचाने और बिल भी एकत्रित करेंगी महिलाएं
ग्राम जल एवं सीवर समिति में शामिल की गई महिलाओं को गांव के हर घर तक नल के माध्यम से जल पहुंचाने की व्यवस्था करनी होगी। जल संरक्षण पर पूरी तरह से काम करना होगा। किस गली में किस मकान तक पाइप लाइन बिछानी है व गांव में पाइप के टूटने या लीक होने पर इसे शीघ्र ठीक करवाने से लेकर पानी के बिल को एकत्रित करने की जिम्मेदारी महिलाओं को दी जाएगी। इसके बाद पेयजल व्यवस्था के रख-रखाव की भी जिम्मेदारी महिलाओं के पास होगी।
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50 प्रतिशत महिलाओं की संख्या निर्धारित कर समितियिों का किया जा रहा गठन : मताना
जल जीवन मिशन के तहत हर घर तक नल के माध्यम से जल पहुंचाने का काम किया जा रहा है। इसमें जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी को हर गांव की समितियों में 50 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए पत्र लिखा गया है। इन महिलाओं को योजना की पूरी जानकारी देने के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
रणधीर मताना, जिला सलाहकार जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग जींद।
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जिले में कुल 297 ग्राम पंचायतें हैं। प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक ग्राम जल एवं सीवर समिति का गठन किया गया है। इन समितियों में कुल 11 सदस्य होते हैं। समिति में ग्राम सरपंच को अध्यक्ष, ग्राम सचिव को संयोजक और जेई को तकनीकी सदस्य बनाया जाता है। इनके अलावा आठ सदस्य होते हैं। इन आठ सदस्यों में अब कम से कम चार महिलाओं का होना अनिवार्य कर दिया गया है। महिला सदस्यों में पंच, आंगनबाड़ी वर्कर, आशा वर्कर, स्कूल अध्यापिका या फिर स्वयं सहायता समूह की किसी महिला को शामिल किया जाएगा।
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नल से पानी पहुंचाने और बिल भी एकत्रित करेंगी महिलाएं
ग्राम जल एवं सीवर समिति में शामिल की गई महिलाओं को गांव के हर घर तक नल के माध्यम से जल पहुंचाने की व्यवस्था करनी होगी। जल संरक्षण पर पूरी तरह से काम करना होगा। किस गली में किस मकान तक पाइप लाइन बिछानी है व गांव में पाइप के टूटने या लीक होने पर इसे शीघ्र ठीक करवाने से लेकर पानी के बिल को एकत्रित करने की जिम्मेदारी महिलाओं को दी जाएगी। इसके बाद पेयजल व्यवस्था के रख-रखाव की भी जिम्मेदारी महिलाओं के पास होगी।
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50 प्रतिशत महिलाओं की संख्या निर्धारित कर समितियिों का किया जा रहा गठन : मताना
जल जीवन मिशन के तहत हर घर तक नल के माध्यम से जल पहुंचाने का काम किया जा रहा है। इसमें जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी को हर गांव की समितियों में 50 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए पत्र लिखा गया है। इन महिलाओं को योजना की पूरी जानकारी देने के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
रणधीर मताना, जिला सलाहकार जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग जींद।