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दो विधानसभा चुनाव में बड़ा राजनीतिक चेहरा व किसी दल की लहर भी नहीं तोड़ सकी मिढ़ा का सियासी किला
Updated Mon, 27 Aug 2018 12:16 AM IST
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भाजपा की लहर भी नहीं ढहा सकी मिढ़ा का सियासी किला
अमर उजाला
जींद। जींद विधानसभा के विधायक और शहर के डॉ. साहब (डॉ. हरिचंद मिढ़ा) अब इस दुनिया में नहीं रहे। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2009 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने जींद की राजनीति के धुरंधर रहे पूर्व मंत्री मांगेराम गुप्ता व 2014 में भाजपा की जबरदस्त लहर के बावजूद चुनाव जीता।
2009 के विधानसभा चुनाव में जब इनेलो की तरफ से उन्हें टिकट दिया गया तो किसी को इसका अंदाजा तक नहीं था कि वे जीतेंगे, लेकिन इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला ने जो मोहरा चला, उसे कोई मात नहीं दे पाया। 2009 के चुनाव में डॉ. हरिचंद मिढ़ा ने उस समय में जींद की राजनीति के धुरंधर खिलाड़ी रहे पूर्व मंत्री मांगेराम गुप्ता को 7862 मतों से करारी शिकस्त दी थी। बेशक डॉ. हरिचंद मिढ़ा सत्ता का हिस्सा नहीं रहे, लेकिन उन्होंने जबरदस्त ढंग से जींद विधानसभा क्षेत्र की आवाज उठाते रहे। इसी का असर रहा कि जब 2014 के विधानसभा चुनाव में भाजपा व मोदी लहर के बीच मतदान हुआ तो डॉ. हरिचंद मिढ़ा का मुकाबला इनेलो से ही बागी हुए सुरेंद्र बरवाला से हुआ। सुरेंद्र बरवाला इनेलो के सर्वमान्य नेता रहे, लेकिन डॉ. हरिचंद मिढ़ा के सामने टिक नहीं पाए। चुनाव के दौरान जब यह तय हो चुका था कि प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने वाली है तब भी जींद की जनता ने डॉ. हरिचंद मिढ़ा पर ही भरोसा किया। हालांकि डॉ. हरिचंद का जीत का अंतर कम वोट का रहा, लेकिन दोबारा जींद की जनता ने उन्हें फिर से विधायक चुन लिया। इस बार भाजपा के सुरेंद्र बरवाला को 29374 वोट मिले तो डॉ. हरिचंद मिढ़ा 31631 वोट लेकर विधानसभा चुनाव जीत गए।
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जींद। जींद विधानसभा के विधायक और शहर के डॉ. साहब (डॉ. हरिचंद मिढ़ा) अब इस दुनिया में नहीं रहे। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2009 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने जींद की राजनीति के धुरंधर रहे पूर्व मंत्री मांगेराम गुप्ता व 2014 में भाजपा की जबरदस्त लहर के बावजूद चुनाव जीता।
2009 के विधानसभा चुनाव में जब इनेलो की तरफ से उन्हें टिकट दिया गया तो किसी को इसका अंदाजा तक नहीं था कि वे जीतेंगे, लेकिन इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला ने जो मोहरा चला, उसे कोई मात नहीं दे पाया। 2009 के चुनाव में डॉ. हरिचंद मिढ़ा ने उस समय में जींद की राजनीति के धुरंधर खिलाड़ी रहे पूर्व मंत्री मांगेराम गुप्ता को 7862 मतों से करारी शिकस्त दी थी। बेशक डॉ. हरिचंद मिढ़ा सत्ता का हिस्सा नहीं रहे, लेकिन उन्होंने जबरदस्त ढंग से जींद विधानसभा क्षेत्र की आवाज उठाते रहे। इसी का असर रहा कि जब 2014 के विधानसभा चुनाव में भाजपा व मोदी लहर के बीच मतदान हुआ तो डॉ. हरिचंद मिढ़ा का मुकाबला इनेलो से ही बागी हुए सुरेंद्र बरवाला से हुआ। सुरेंद्र बरवाला इनेलो के सर्वमान्य नेता रहे, लेकिन डॉ. हरिचंद मिढ़ा के सामने टिक नहीं पाए। चुनाव के दौरान जब यह तय हो चुका था कि प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने वाली है तब भी जींद की जनता ने डॉ. हरिचंद मिढ़ा पर ही भरोसा किया। हालांकि डॉ. हरिचंद का जीत का अंतर कम वोट का रहा, लेकिन दोबारा जींद की जनता ने उन्हें फिर से विधायक चुन लिया। इस बार भाजपा के सुरेंद्र बरवाला को 29374 वोट मिले तो डॉ. हरिचंद मिढ़ा 31631 वोट लेकर विधानसभा चुनाव जीत गए।
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