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शहर में हादसों को दावत दे रही दर्जन भर खंडर इमारतें
Updated Thu, 19 Jul 2018 12:26 AM IST
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हादसों को दावत दे रहीं खंडहर इमारतें
अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
भले ही देश भर में बारिश के मौसम में इमारतें गिरने से हो रहे जान-माल की हानी के मामले आ रहे हैं, लेकिन जींद नगर परिषद इससे सबक नहीं ले रहा है। हैरानी की बात है कि पिछले करीब छह साल से नगर परिषद ने जर्जर व लोगों के लिए खतरा बन चुकी इमारतों का सर्वे तक नहीं हुआ है। नगर परिषद सूत्रों के अनुसार हालांकि हर साल बारिश से पहले इस प्रकार का सर्वे करना चाहिए और लोगों के खतरा बन चुकी इमारतों को गिराना चाहिए, लेकिन प्रशासन को इस कार्रवाई के लिए शिकायत का इंतजार है।
पुराने शहर में आज भी दर्जन भर ऐसी इमारतें हैं, जो लोगों के लिए खतरा बनी हुई हैं। लोगों का कहना है कि पड़ोस का मामला होने के चलते वे इसकी शिकायत भी नहीं कर सकते, लेकिन प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। इसके चलते उन्हें खतरे के साए में जीना पड़ा रहा है। पुराना किला निवासी कैलाशो देवी के अनुसार वे बच्चों को भी बाहर नहीं खेलने देती। यहां बने जर्जर भवन से मलबा गिरता रहता है। वहीं बारिश के मौसम में यह खतरा और भी बढ़ जाता है। जींद नगर परिषद को इसकी चिंता नहीं है। बारिश का मानसून का मौसम शुरू हो चुका है और नगर परिषद को शहर की जर्जर इमरतों का पता तक नहीं हैं।
पुराने शहर में अधिकतर इमारत
शहर में करीब दर्जन भर ऐसे इमारतें हैं, जो बारिश के मौसम में गिर सकती हैं। हैरानी की बात है कि इनमें से अधिकतर इमारतों में वर्षों से कोई रहता तक नहीं और यह पड़ोसियों के लिए खतरा बनी हुई हैं। कई इमारतें 100 साल पुरानी हैं और वर्षों से खाली पड़ी हैं। इन इमारतों के आसपास रहने वालों की मानें तो अक्सर इन भवनों से ईंट या अन्य मलबा भी गिरता रहता है।
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सैकड़ों वर्ष पुराने हैं भवन
जर्जर भवनों में से दखनिया मोहल्ला, तांगा चौक व पुराने किले के आसपास कुछ भवन तो ऐसे हैं, जो सैकड़ों वर्ष पुराने हैं। इसके इसके बावजूद प्रशासन इन भवनों की सुध नहीं ले रहा है। जहां-जहां ऐसे भवन हैं, वहां गलियां इतनी संकरी हैं कि यदि कोई हादसा होता है तो यहां तक पहुंचना भी मुश्किल हो जाएगा।
छह साल पहले हुई थी कार्रवाई
नगर परिषद के पटवारी सुरेश कुमार के अनुसार छह साल पहले नगर परिषद ने सर्वे कर खतरनाक हो चुकी इमारतों को गिरवाया था। तब करीब दस भवन सुरक्षा में खतरा होने के कारण गिराए गए। इसके बाद से सर्वे नहीं किया गया है।
बच्चे भी नहीं खेल पाते
इमारत बहुत पुरानी और जर्जर हो चुकी हैं। बारिश के मौसम में यहां मलबा गिरता रहता है। ऐसे में बच्चे भी गलियों में नहीं खेत पाते। खंडहर भवनों से जहरीले कीड़े व सांप भी निकलते रहते हैं। इस ओर प्रशासन को ध्यान देना चाहिए।
मोनू, दखनिया मोहल्ला
गिराए जाएं पुराने भवन
पुराने और जर्जर भवन शहर की सुरक्षा के लिए खतरा हैं। बैंक रोड पर कई भवन तो ऐसे हैं, यदि यहां हादसा होता है तो बहुत बड़ा रूप ले सकता है। कई ऐसे भवन तो ठीक नगर परिषद की नाक के नीचे हैं, फिर भी ध्यान नहीं दिया जाता।
प्रमोद, टाउन हॉल निवासी
नगर परिषद इसके इसके लिए कोई सर्वे नहीं करवाता, लेकिन शिकायत आने पर या लोगों के लिए खतरा बने भवन का मामला संज्ञान में आने पर इस पर कार्रवाई की जाती है। इसके लिए नगर परिषद के पास अधिकार हैं। शहर की जर्जर ईमारतों का पता लगाया जाएगा और इस पर कार्रवाई होगी।
विरेंद्र सहरावत, एसडीएम, जींद।
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
भले ही देश भर में बारिश के मौसम में इमारतें गिरने से हो रहे जान-माल की हानी के मामले आ रहे हैं, लेकिन जींद नगर परिषद इससे सबक नहीं ले रहा है। हैरानी की बात है कि पिछले करीब छह साल से नगर परिषद ने जर्जर व लोगों के लिए खतरा बन चुकी इमारतों का सर्वे तक नहीं हुआ है। नगर परिषद सूत्रों के अनुसार हालांकि हर साल बारिश से पहले इस प्रकार का सर्वे करना चाहिए और लोगों के खतरा बन चुकी इमारतों को गिराना चाहिए, लेकिन प्रशासन को इस कार्रवाई के लिए शिकायत का इंतजार है।
पुराने शहर में आज भी दर्जन भर ऐसी इमारतें हैं, जो लोगों के लिए खतरा बनी हुई हैं। लोगों का कहना है कि पड़ोस का मामला होने के चलते वे इसकी शिकायत भी नहीं कर सकते, लेकिन प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। इसके चलते उन्हें खतरे के साए में जीना पड़ा रहा है। पुराना किला निवासी कैलाशो देवी के अनुसार वे बच्चों को भी बाहर नहीं खेलने देती। यहां बने जर्जर भवन से मलबा गिरता रहता है। वहीं बारिश के मौसम में यह खतरा और भी बढ़ जाता है। जींद नगर परिषद को इसकी चिंता नहीं है। बारिश का मानसून का मौसम शुरू हो चुका है और नगर परिषद को शहर की जर्जर इमरतों का पता तक नहीं हैं।
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पुराने शहर में अधिकतर इमारत
शहर में करीब दर्जन भर ऐसे इमारतें हैं, जो बारिश के मौसम में गिर सकती हैं। हैरानी की बात है कि इनमें से अधिकतर इमारतों में वर्षों से कोई रहता तक नहीं और यह पड़ोसियों के लिए खतरा बनी हुई हैं। कई इमारतें 100 साल पुरानी हैं और वर्षों से खाली पड़ी हैं। इन इमारतों के आसपास रहने वालों की मानें तो अक्सर इन भवनों से ईंट या अन्य मलबा भी गिरता रहता है।
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सैकड़ों वर्ष पुराने हैं भवन
जर्जर भवनों में से दखनिया मोहल्ला, तांगा चौक व पुराने किले के आसपास कुछ भवन तो ऐसे हैं, जो सैकड़ों वर्ष पुराने हैं। इसके इसके बावजूद प्रशासन इन भवनों की सुध नहीं ले रहा है। जहां-जहां ऐसे भवन हैं, वहां गलियां इतनी संकरी हैं कि यदि कोई हादसा होता है तो यहां तक पहुंचना भी मुश्किल हो जाएगा।
छह साल पहले हुई थी कार्रवाई
नगर परिषद के पटवारी सुरेश कुमार के अनुसार छह साल पहले नगर परिषद ने सर्वे कर खतरनाक हो चुकी इमारतों को गिरवाया था। तब करीब दस भवन सुरक्षा में खतरा होने के कारण गिराए गए। इसके बाद से सर्वे नहीं किया गया है।
बच्चे भी नहीं खेल पाते
इमारत बहुत पुरानी और जर्जर हो चुकी हैं। बारिश के मौसम में यहां मलबा गिरता रहता है। ऐसे में बच्चे भी गलियों में नहीं खेत पाते। खंडहर भवनों से जहरीले कीड़े व सांप भी निकलते रहते हैं। इस ओर प्रशासन को ध्यान देना चाहिए।
मोनू, दखनिया मोहल्ला
गिराए जाएं पुराने भवन
पुराने और जर्जर भवन शहर की सुरक्षा के लिए खतरा हैं। बैंक रोड पर कई भवन तो ऐसे हैं, यदि यहां हादसा होता है तो बहुत बड़ा रूप ले सकता है। कई ऐसे भवन तो ठीक नगर परिषद की नाक के नीचे हैं, फिर भी ध्यान नहीं दिया जाता।
प्रमोद, टाउन हॉल निवासी
नगर परिषद इसके इसके लिए कोई सर्वे नहीं करवाता, लेकिन शिकायत आने पर या लोगों के लिए खतरा बने भवन का मामला संज्ञान में आने पर इस पर कार्रवाई की जाती है। इसके लिए नगर परिषद के पास अधिकार हैं। शहर की जर्जर ईमारतों का पता लगाया जाएगा और इस पर कार्रवाई होगी।
विरेंद्र सहरावत, एसडीएम, जींद।