{"_id":"5a009ad24f1c1b78548bb429","slug":"171509989074-jind-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"माय सिटी प्रथम पेज की प्रस्तावित लीड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
माय सिटी प्रथम पेज की प्रस्तावित लीड
Updated Mon, 06 Nov 2017 10:54 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जहरीली हुई शहर की फिजा खतरनाक स्तर पर पहुंचा प्रदूषण का स्तर, हवा में कार्बन डाई ऑक्साईड की मात्रा पहुंची 450
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। प्रदेश की सरकार और प्रशासन भले ही धान की पराली जलाने के खिलाफ पूरी सख्ती दिखा रहे हैं, लेकिन इसका असर नहीं दिख रहा है। हवा में घुले धुएं से फिजाएं जहरीली हो गई। प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर तक बढ़ गया। वहीं डीसी ऑफिस में लगे प्रदूषण मापने के यंत्र पर कार्बनडाइऑक्साइड की मात्रा 450 तक दर्शाई गई, जो सामान्यतौर पर महज 150 तक होनी चाहिए। हवा में धुएं का प्रभाव होने से लोगों को दिन भर आंखों में जलन हो रही है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि रोक के बावजूद धान की पराली जलाने का सिलसिला रूक नहीं रहा है। ऐसे में प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ा है। सोमवार को हवा में 2.5 पीएम पार्र्टीकल 310 तक पहुंच गया। जबकि इसकी अधिकतम मात्रा अब तक 291 रही है। इस श्रेणी में हवा में मौजूद बहुत ही सूक्ष्म तत्व आते हैं। वहीं पीएम दस श्रेणी में पार्टीकल की संघनता 119 तक पहुंच गई है, जबकि यह अब तक अधिकतम 109 तक ही दर्ज की गई है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की मानें तो सोमवार को हवा में प्रदूषण का स्तर बहुत ही खतरनाक स्तर पर रहा।
आंखों में रही जलन
प्रदूषण बढ़ने का प्रभाव यह हुआ कि सुबह से ही लोगों को आंखों में जलन महसूस हुई। इसके चलते काफी लोग नागरिक अस्पताल में पहुंचे। वहीं नागरिक अस्पताल के नेत्र चिकित्सक रामकुमार के अनुसार इस मौसम में जलन होना सामान्य है, ऐसे में लोग बार-बार ठंडे पानी से आंखों को साफ करते रहें। वहीं सिविल सर्जन डॉ. संजय दहिया के अनुसार इस मौसम में अस्थमा के मरीजों को भी दिक्कत हो सकती है। जहां तक हो सके अस्थमा के मरीज बाहर नहीं निकले। दिक्कत होने पर तुरंत चिकित्सक को दिखाएं।
विज्ञापन
पराली जला रहे हैं किसान
किसान पराली जला रहे हैं, इसके कारण धूआं काफी बढ़ गया है। इससे हवा में प्रदूषण का स्तर बढ़ा है। अब तक 48 मामले पराली जलाने के आ चुके हैं।
विनय गिल, एसडीओ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
इस बार पराली जलाने के मामले काफी कम हैं। अब तक महज 48 मामले आए हैं। इनको नोटिस भेजा गया है। अब तक करीब कई हजार रुपये की रिकवरी भी हुई है। पिछले साल पराली जलाने के कुल 200 से अधिक मामले थे और चार लाख 70 हजार रुपये जुर्माना वसूल किया गया है। प्रदूषण मौसम में आई गड़बड़ी के कारण खराब हुआ है।
डॉ. सुरेंद्र मलिक, कृषि उप निदेशक।
बीमार हुई नागरिक अस्पताल की व्यवस्थाएं
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। बेशक जिले में डेंगू, वायर व अन्य बीमारियों का प्रकोप है, लेकिन नागरिक अस्पताल की व्यवस्थाएं और अधिक बीमार हो गई हैं। ऐसा ही मामला सोमवार को नागरिक अस्पताल में सामने आया। इसकी शिकायत डीसी कार्यालय को भी की गई, लेकिन मरीज को फिर भी इलाज नहीं मिल पाया।
हुआ यूं कि खेड़ी तलोड़ा निवासी संदीप सोमवार को बुखार की दवा लेने के लिए सुबह आठ बजे नागरिक अस्पताल पहुंच। जल्द इलाज लेने के लिए वह घर से जल्दी आया। लेकिन उसको इलाज नहीं मिल सका। संदीप के अनुसार वह कमरा नंबर 11 के बाहर साढ़े आठ बजे पहुंच गया, लेकिन साढ़े नौ बजे यहां डॉक्टर आए। उस समय यहां आने वाला वह पहला मरीज था। डॉक्टर करीब पांच मिनट ओपीडी में बैठकर चले गए। इसके बाद मरीज उनका इंतजार करते रहे, लेकिन साढ़े 11 बजे तक भी यहां डॉक्टर नहीं पहुंचे। इस पर उन्होंने डीसी ऑफिस में फोन कर इसकी शिकायत की। डीसी ऑफिस से फोन नागरिक अस्पताल के अधिकारियों के पास आया तो साढ़े 12 बजे यहां चिकित्सक पहुंचे।
मरीज को देखने से मना
संदीप के अनुसार डॉक्टर ने यहां आते ही पूछा कि डीसी ऑफिस में फोन किसने किया है। इस पर जब संदीप ने उन्हें बताया तो डॉक्टर ने उन्हें देखने से ही मना कर दिया। संदीप के अनुसार अब उसे डर है कि कहीं डॉक्टर कोई गलत दवा न दे दें। बाद में संदीप ने दोपहर करीब एक बजे चिकित्सका अधीक्षक डॉ. अनिल बिरला के फोन किया तो उन्होंने भी संदीप को ऑपरेशन थियेटर में बुलाया। संदीप के अनुसार यहां डॉ. अनिल बिरला ने उनके कार्ड पर दवा लिखी और टेस्ट भी लिख दिए, लेकिन काफी देर होने के कारण टेस्ट के सैंपल नहीं दिए जा सके। अब उसे दोबारा से इलाज के लिए आना पड़ेगा।
नहीं मिला इलाज
मैं सुबह साढ़े आठ बजे ओपीडी के बाहर पहुंच गया था। संदीप के बाद मेरा दूसरा नंबर था, लेकिन यहां सिर्फ सिफारिशी लोग ही अंदर जाते रहे। मुझे दोपहर एक बजे तक भी इलाज नहीं मिला है। सुबह जल्द आने का कोई फायदा नहीं हुआ। अब टेस्ट नहीं होंगे और फिर से आना पड़ेगा।
सुरेश, मरीज।
नहीं मिली शिकायत
यदि ऐसा हुआ है तो बहुत ही गलत है। मुझे इसकी शिकायत नहीं मिली है। यदि मरीज शिकायत देता है, तो इसकी जांच की जाएगी और दोषी के खिलाफ कार्रवाई होगी।
डॉ. संजय दहिया, सिविल सर्जन।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। प्रदेश की सरकार और प्रशासन भले ही धान की पराली जलाने के खिलाफ पूरी सख्ती दिखा रहे हैं, लेकिन इसका असर नहीं दिख रहा है। हवा में घुले धुएं से फिजाएं जहरीली हो गई। प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर तक बढ़ गया। वहीं डीसी ऑफिस में लगे प्रदूषण मापने के यंत्र पर कार्बनडाइऑक्साइड की मात्रा 450 तक दर्शाई गई, जो सामान्यतौर पर महज 150 तक होनी चाहिए। हवा में धुएं का प्रभाव होने से लोगों को दिन भर आंखों में जलन हो रही है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि रोक के बावजूद धान की पराली जलाने का सिलसिला रूक नहीं रहा है। ऐसे में प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ा है। सोमवार को हवा में 2.5 पीएम पार्र्टीकल 310 तक पहुंच गया। जबकि इसकी अधिकतम मात्रा अब तक 291 रही है। इस श्रेणी में हवा में मौजूद बहुत ही सूक्ष्म तत्व आते हैं। वहीं पीएम दस श्रेणी में पार्टीकल की संघनता 119 तक पहुंच गई है, जबकि यह अब तक अधिकतम 109 तक ही दर्ज की गई है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की मानें तो सोमवार को हवा में प्रदूषण का स्तर बहुत ही खतरनाक स्तर पर रहा।
विज्ञापन
आंखों में रही जलन
प्रदूषण बढ़ने का प्रभाव यह हुआ कि सुबह से ही लोगों को आंखों में जलन महसूस हुई। इसके चलते काफी लोग नागरिक अस्पताल में पहुंचे। वहीं नागरिक अस्पताल के नेत्र चिकित्सक रामकुमार के अनुसार इस मौसम में जलन होना सामान्य है, ऐसे में लोग बार-बार ठंडे पानी से आंखों को साफ करते रहें। वहीं सिविल सर्जन डॉ. संजय दहिया के अनुसार इस मौसम में अस्थमा के मरीजों को भी दिक्कत हो सकती है। जहां तक हो सके अस्थमा के मरीज बाहर नहीं निकले। दिक्कत होने पर तुरंत चिकित्सक को दिखाएं।
विज्ञापन
पराली जला रहे हैं किसान
किसान पराली जला रहे हैं, इसके कारण धूआं काफी बढ़ गया है। इससे हवा में प्रदूषण का स्तर बढ़ा है। अब तक 48 मामले पराली जलाने के आ चुके हैं।
विनय गिल, एसडीओ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
इस बार पराली जलाने के मामले काफी कम हैं। अब तक महज 48 मामले आए हैं। इनको नोटिस भेजा गया है। अब तक करीब कई हजार रुपये की रिकवरी भी हुई है। पिछले साल पराली जलाने के कुल 200 से अधिक मामले थे और चार लाख 70 हजार रुपये जुर्माना वसूल किया गया है। प्रदूषण मौसम में आई गड़बड़ी के कारण खराब हुआ है।
डॉ. सुरेंद्र मलिक, कृषि उप निदेशक।
बीमार हुई नागरिक अस्पताल की व्यवस्थाएं
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। बेशक जिले में डेंगू, वायर व अन्य बीमारियों का प्रकोप है, लेकिन नागरिक अस्पताल की व्यवस्थाएं और अधिक बीमार हो गई हैं। ऐसा ही मामला सोमवार को नागरिक अस्पताल में सामने आया। इसकी शिकायत डीसी कार्यालय को भी की गई, लेकिन मरीज को फिर भी इलाज नहीं मिल पाया।
हुआ यूं कि खेड़ी तलोड़ा निवासी संदीप सोमवार को बुखार की दवा लेने के लिए सुबह आठ बजे नागरिक अस्पताल पहुंच। जल्द इलाज लेने के लिए वह घर से जल्दी आया। लेकिन उसको इलाज नहीं मिल सका। संदीप के अनुसार वह कमरा नंबर 11 के बाहर साढ़े आठ बजे पहुंच गया, लेकिन साढ़े नौ बजे यहां डॉक्टर आए। उस समय यहां आने वाला वह पहला मरीज था। डॉक्टर करीब पांच मिनट ओपीडी में बैठकर चले गए। इसके बाद मरीज उनका इंतजार करते रहे, लेकिन साढ़े 11 बजे तक भी यहां डॉक्टर नहीं पहुंचे। इस पर उन्होंने डीसी ऑफिस में फोन कर इसकी शिकायत की। डीसी ऑफिस से फोन नागरिक अस्पताल के अधिकारियों के पास आया तो साढ़े 12 बजे यहां चिकित्सक पहुंचे।
मरीज को देखने से मना
संदीप के अनुसार डॉक्टर ने यहां आते ही पूछा कि डीसी ऑफिस में फोन किसने किया है। इस पर जब संदीप ने उन्हें बताया तो डॉक्टर ने उन्हें देखने से ही मना कर दिया। संदीप के अनुसार अब उसे डर है कि कहीं डॉक्टर कोई गलत दवा न दे दें। बाद में संदीप ने दोपहर करीब एक बजे चिकित्सका अधीक्षक डॉ. अनिल बिरला के फोन किया तो उन्होंने भी संदीप को ऑपरेशन थियेटर में बुलाया। संदीप के अनुसार यहां डॉ. अनिल बिरला ने उनके कार्ड पर दवा लिखी और टेस्ट भी लिख दिए, लेकिन काफी देर होने के कारण टेस्ट के सैंपल नहीं दिए जा सके। अब उसे दोबारा से इलाज के लिए आना पड़ेगा।
नहीं मिला इलाज
मैं सुबह साढ़े आठ बजे ओपीडी के बाहर पहुंच गया था। संदीप के बाद मेरा दूसरा नंबर था, लेकिन यहां सिर्फ सिफारिशी लोग ही अंदर जाते रहे। मुझे दोपहर एक बजे तक भी इलाज नहीं मिला है। सुबह जल्द आने का कोई फायदा नहीं हुआ। अब टेस्ट नहीं होंगे और फिर से आना पड़ेगा।
सुरेश, मरीज।
नहीं मिली शिकायत
यदि ऐसा हुआ है तो बहुत ही गलत है। मुझे इसकी शिकायत नहीं मिली है। यदि मरीज शिकायत देता है, तो इसकी जांच की जाएगी और दोषी के खिलाफ कार्रवाई होगी।
डॉ. संजय दहिया, सिविल सर्जन।