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Jind News: मंडियों अब तक आया 14.65 लाख क्विंटल गेहूं, बिका सिर्फ 56 हजार क्विंटल
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09जेएनडी34: रात के समय मंडी में आने वाले किसानों के गेट पास काटते हुए कर्मचारी। संवाद
जींद। जिले की अनाज मंडियों में गेहूं की आवक लगातार बढ़ रही है लेकिन खरीद की रफ्तार बेहद धीमी है। अब तक मंडियों में करीब 14.65 लाख क्विंटल गेहूं पहुंच चुका है जबकि खरीद केवल 56 हजार क्विंटल ही हो पाई है। किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
मंडी प्रशासन ने व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्ती बढ़ा दी है। रात के समय मंडी के तीनों गेटों पर कर्मचारियों की तैनाती की गई है। बिना गेट पास और पंचिंग के किसी भी वाहन को अंदर प्रवेश नहीं दिया जा रहा और न ही गेहूं उतरवाने की अनुमति है। इसके बावजूद मंडियों में अव्यवस्था की स्थिति बनी हुई है।
शहर की अनाज मंडी में पहले से पड़ी गेहूं की ढेरियों पर ही नई फसल उतरवाई जा रही है। किसानों को अपनी फसल की पहचान करना मुश्किल हो रहा है। एक-दूसरे की ढेरी पर गेहूं डालने से उनकी फसल की गुणवत्ता और नमी की सही जानकारी नहीं मिल पा रही।
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सबसे बड़ी समस्या नमी जांच को लेकर सामने आ रही है। रात के समय गेहूं की नमी की जांच नहीं की जाती जबकि दिन में खरीद के दौरान बड़ी ढेरियों में ही नमी मापी जाती है। जब उनकी फसल अलग से पहचान में ही नहीं आएगी तो नमी की सही जांच कैसे संभव होगी।
अव्यवस्था के कारण आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। यदि किसी गेहूं की ढेरी में नमी अधिक पाई जाती है तो पूरी ढेरी को प्रभावित माना जाता है। इससे किसानों को भी नुकसान झेलना पड़ता है।
-ब्रिंद नंबरदार।
वर्जन
व्यवस्था को दुरुस्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं और जल्द ही खरीद प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी। अब मंडी में खरीद शुरू हो चुकी है। ट्रॉली से गेहूं उतारने से पहले ही नमी के सैंपल खरीद एजेंसियों की ओर से लिए जाते हैं। शहर की अनाज मंडी में अब खरीद शुरू हो चुकी है। भविष्य में कोई दिक्कत नहीं रहेगी। -मनीष उर्फ बबलू गोयल मार्केट कमेटी चेयरमैन जींद।
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मंडी प्रशासन ने व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्ती बढ़ा दी है। रात के समय मंडी के तीनों गेटों पर कर्मचारियों की तैनाती की गई है। बिना गेट पास और पंचिंग के किसी भी वाहन को अंदर प्रवेश नहीं दिया जा रहा और न ही गेहूं उतरवाने की अनुमति है। इसके बावजूद मंडियों में अव्यवस्था की स्थिति बनी हुई है।
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शहर की अनाज मंडी में पहले से पड़ी गेहूं की ढेरियों पर ही नई फसल उतरवाई जा रही है। किसानों को अपनी फसल की पहचान करना मुश्किल हो रहा है। एक-दूसरे की ढेरी पर गेहूं डालने से उनकी फसल की गुणवत्ता और नमी की सही जानकारी नहीं मिल पा रही।
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सबसे बड़ी समस्या नमी जांच को लेकर सामने आ रही है। रात के समय गेहूं की नमी की जांच नहीं की जाती जबकि दिन में खरीद के दौरान बड़ी ढेरियों में ही नमी मापी जाती है। जब उनकी फसल अलग से पहचान में ही नहीं आएगी तो नमी की सही जांच कैसे संभव होगी।
अव्यवस्था के कारण आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। यदि किसी गेहूं की ढेरी में नमी अधिक पाई जाती है तो पूरी ढेरी को प्रभावित माना जाता है। इससे किसानों को भी नुकसान झेलना पड़ता है।
-ब्रिंद नंबरदार।
वर्जन
व्यवस्था को दुरुस्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं और जल्द ही खरीद प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी। अब मंडी में खरीद शुरू हो चुकी है। ट्रॉली से गेहूं उतारने से पहले ही नमी के सैंपल खरीद एजेंसियों की ओर से लिए जाते हैं। शहर की अनाज मंडी में अब खरीद शुरू हो चुकी है। भविष्य में कोई दिक्कत नहीं रहेगी। -मनीष उर्फ बबलू गोयल मार्केट कमेटी चेयरमैन जींद।