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पाकिस्तान के मुलतान से किया सफर जींद में हुआ पूरा

Mon, 27 Aug 2018 12:17 AM IST
Updated Mon, 27 Aug 2018 12:17 AM IST
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पाकिस्तान के मुलतान से किया सफर जींद में हुआ पूरा
डॉ. मिढ़ा ने पाकिस्तान के मुलतान से शुरू किया सफर, जींद में हुआ पूरा
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। 48 साल तक जींद की जनता के दिलों में बतौर चिकित्सक व राजनेता राज करने वाले विधायक डॉ. हरिचंद मिढ़ा के जीवन का सफर पाकिस्तान के मुलतान से शुरू हुआ और जींद में इस सफर को पूरा किया। डॉ. हरिचंद मिढ़ा 1947 में विभाजन के समय पाकिस्तान से भारत आए थे । उनके परिवार ने समालखा में आश्रय लिया। इसके बाद डॉ. मिढ़ा ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
डॉ. हरिचंद मिढ़ा ने महज आठ साल की उम्र में भारत आकर उन्होंने नए जीवन की शुरूआत की और प्रारंभिक शिक्षा समालखा में हुई। इसके बाद उन्होंने 1959 में पंजाब विश्वविद्यालय से मैट्रिक पास की। 1961 में डॉ. हरिचंद मिढ़ा सेना में चले गए और यहां उन्होंने आर्मी मेडिकल कोर में रहते हुए आरएमपी की। 1962 की लड़ाई में दुश्मनों के साथ लड़ाई लड़ने के बाद वे आर्मी मेडिकल कोर में चले गए। इसके बाद वे 1969 में वे सेना से सेवानिवृत्त हो गए । इसके बाद 1970 में जींद में प्रैक्टिस शुरू की। इसके बाद डॉ. हरिचंद जींद शहर व आसपास के हर व्यक्ति के लिए खास बन गए। उस समय चिकित्सा सुविधाएं अधिक नहीं होती थी और डॉ. हरिचंद मिढ़ा लोगों को सस्ता और अच्छा इलाज मुहैया करवा रहे थे। शहरभर में और हर गांव से लोग उनके पास इलाज के लिए आने लगे। यही लोकप्रियता उनके राजनेता बनने में मददगार साबित हुई।
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आम आदमी के प्रचार से बने हीरो
डॉ. हरिचंद मिढ़ा आम आदमी के प्रचार से ही हीरो बने। उन्होंने मरीज को उसके परिधान व हावभाव से ही पहचाना। बतौर चिकित्सक यदि उनके पास कोई व्यक्ति गया और व तंगहाल दिखाई दिया तो कभी मरीज से दवाई के पैसे नहीं लिए। आज के जमाने में भी डॉ. हरिचंद मिढ़ा अधिकतम 50 रुपये की दवा देते थे। डॉ. हरिचंद मिढ़ा प्रतिदिन करीब 200 मरीजों को देखते थे।
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राजनीति में आने के बाद भी नहीं हुए विरोधी
यह विधायक डॉ. हरिचंद मिढ़ा का स्वभाव ही है कि राजनीति में आने के बाद भी कोई उनका विरोधी नहीं हुआ। राजनीतिक लोग हालांकि बतौर विधायक उन पर निशाना साधते रहे, लेकिन उन पर कभी कोई आरोप नहीं लगे।

1986 में बने एमसी
डॉ. हरिचंद मिढ़ा का सियासी सफर 1986 में शुरू हुआ था। वह पहली बार 1986 में एमसी बने। एमसी में भी उनकी जीत का कारण उनका स्वभाव ही माना जाता है। उन्होंने अपने इस सियासी सफर में एमसी पद पर रहते हुए वार्ड की समस्याओं को बखूबी पूरा किया। उनके लिए एमसी पद से लेकर विधायक तक खास बात यह रही की कार्यकर्ताओं को डॉ. हरिचंद मिढ़ा हर समय क्लीनिक पर ही मरीजों का इलाज करवाते मिल जाते थे। जहां से वह कार्यकर्ताओं की हर समस्या का समाधान विपक्ष में होने के कारण अधिकारियों के साथ मेलजोल के तरीके से ही करवाता था।
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