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दूध डेयरियां बाहर निकालने की परियोजना 10 साल से अटकी
ब्यूरो/ अमर उजाला, जींद
Updated Fri, 24 Feb 2017 11:53 PM IST
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हैबतपुर रोड पर डेयरी कॉम्पलेक्स के लिए तय की गई जगह।
- फोटो : jind
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शहर की सीवरेज व्यवस्था के लिए आफत बनी पशु डेयरियों को शहर से बाहर निकालने की परियोजना दस साल बाद भी धूल फांक रही है। अब तक इस परियोजना पर प्रशासन एक कदम भी नहीं चला है। इसके कारण आए दिन शहर की सीवरेज व्यवस्था बाधित रहती है। इसको लेकर जन स्वास्थ्य विभाग भी कई बार अधिकारियों को पत्र लिख चुका है, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।
शहर के निरंकारी रोड, पुराना बस स्टैंड, पटियाला चौक क्षेत्र में दूध डेयरियों की भरमार है। हालांकि करीब 300 डेयरियां है, लेकिन शहर में एक-दो भैंस पालने वाले भी काफी लोग हैं। कुल मिलाकर नगर परिषद क्षेत्र के अंदर 20 हजार पशु हैं। इसका खामियाजा शहर के लोगों को सीवर की परेशानी के रूप में भुगतना पड़ रहा है। इसको लेकर 2005-06 में विस्तृत योजना बनाई थी। इसके लिए हैबतपुर रोड पर करीब 20 एकड़ जमीन भी चिह्नित की गई, लेकिन यह परियोजना सिर्फ फाइलों में ही दफन हो कर रह गई। इसके बाद कई बार यह परियोजना चर्चाओं में आई, लेकिन जमीन पर काम शुरू नहीं हो सका। दस साल बाद भी लोगों को परियोजना शुरू होने का इंतजार है।
एक जगह होगा डेयरी कॉम्प्लेक्स
सरकारी योजना के तहत डेयरी कॉम्पलेक्स एक जगह बनाया जाना था। इसके बाद स्क्रिनिंग चैंबर लगाकर यहां से पशुओं के मल को सीवर लाइन में भेजा जा सकता है। बिना स्क्रिनिंग चैंबर के ठोस मल भी सीवर लाइन में जा रहा है, जिससे सीवर लाइन जाम होती है।
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ऐसे काम करता है स्क्रिनिंग चैंबर
विस्तृत स्तर पर पशु मल का सीवर लाइन में जाने से रोकने के लिए यह व्यवस्था बनाई जाती है। इसके तहत तीन-चार बड़े स्टोरेज टैंक बनाए जाते हैं। एक टैंक से मल दूसरे टैंक में जाता है। इससे अंतिम टैंक में सिर्फ तरल मल ही पहुंच पाता है और सीवर लाइन में कोई दिक्कत नहीं होती।
होती है परेशानी
पशुओं का मल सीवर लाइन में जाने से काफी परेशानी होती है। इससे मेन लाइन के साथ-साथ मेन लाइन में आने वाली छोटी लाइन भी बाधित होती हैं। शहर में सीवर के लिए यह सबसे बड़ी समस्या है। इसको लेकर कई बार नगर परिषद के अधिकारियों को पत्र लिखा जा चुका है, लेकिन कोई समाधान नहीं हो रहा है।
-बीपी शर्मा, एक्सईएन, जन स्वास्थ्य विभाग
डेयरियों को शहर से बाहर निकालने के लिए योजना बनाई जा रही है। प्रदेश के कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ की अध्यक्षता में कमेटी बनी है। ऐसे में हैबतपुर से निर्जन के रास्ते पर साइट देखी जा रही है, लेकिन इसके बारे में अभी सरकार से कोई सीधी सूचना नहीं आई है।
-पूनम सैनी, चेयरपर्सन, नगर परिषद, जींद
डेयरी संचालकों को होगी परेशानी
डेयरियां शहर से बाहर निकलाने से डेयरी संचालकों को काफी परेशानी होगी। फिलहाल डेयरी संचालकों के मकान भी डेयरियों के ऊपर ही बने हुए हैं। वहां प्लाट लेकर डेयरी बनाना बहुत महंगा होगा। हां, यदि दूध के दाम अच्छे मिलते हैं तो एक जगह जाने में भी कोई दिक्कत नहीं हैं। गोबर सीवर में नहीं बहाया जाता है।
राजेश पान्नू, प्रधान डेयरी एसोसिएशन
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शहर के निरंकारी रोड, पुराना बस स्टैंड, पटियाला चौक क्षेत्र में दूध डेयरियों की भरमार है। हालांकि करीब 300 डेयरियां है, लेकिन शहर में एक-दो भैंस पालने वाले भी काफी लोग हैं। कुल मिलाकर नगर परिषद क्षेत्र के अंदर 20 हजार पशु हैं। इसका खामियाजा शहर के लोगों को सीवर की परेशानी के रूप में भुगतना पड़ रहा है। इसको लेकर 2005-06 में विस्तृत योजना बनाई थी। इसके लिए हैबतपुर रोड पर करीब 20 एकड़ जमीन भी चिह्नित की गई, लेकिन यह परियोजना सिर्फ फाइलों में ही दफन हो कर रह गई। इसके बाद कई बार यह परियोजना चर्चाओं में आई, लेकिन जमीन पर काम शुरू नहीं हो सका। दस साल बाद भी लोगों को परियोजना शुरू होने का इंतजार है।
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एक जगह होगा डेयरी कॉम्प्लेक्स
सरकारी योजना के तहत डेयरी कॉम्पलेक्स एक जगह बनाया जाना था। इसके बाद स्क्रिनिंग चैंबर लगाकर यहां से पशुओं के मल को सीवर लाइन में भेजा जा सकता है। बिना स्क्रिनिंग चैंबर के ठोस मल भी सीवर लाइन में जा रहा है, जिससे सीवर लाइन जाम होती है।
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ऐसे काम करता है स्क्रिनिंग चैंबर
विस्तृत स्तर पर पशु मल का सीवर लाइन में जाने से रोकने के लिए यह व्यवस्था बनाई जाती है। इसके तहत तीन-चार बड़े स्टोरेज टैंक बनाए जाते हैं। एक टैंक से मल दूसरे टैंक में जाता है। इससे अंतिम टैंक में सिर्फ तरल मल ही पहुंच पाता है और सीवर लाइन में कोई दिक्कत नहीं होती।
होती है परेशानी
पशुओं का मल सीवर लाइन में जाने से काफी परेशानी होती है। इससे मेन लाइन के साथ-साथ मेन लाइन में आने वाली छोटी लाइन भी बाधित होती हैं। शहर में सीवर के लिए यह सबसे बड़ी समस्या है। इसको लेकर कई बार नगर परिषद के अधिकारियों को पत्र लिखा जा चुका है, लेकिन कोई समाधान नहीं हो रहा है।
-बीपी शर्मा, एक्सईएन, जन स्वास्थ्य विभाग
डेयरियों को शहर से बाहर निकालने के लिए योजना बनाई जा रही है। प्रदेश के कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ की अध्यक्षता में कमेटी बनी है। ऐसे में हैबतपुर से निर्जन के रास्ते पर साइट देखी जा रही है, लेकिन इसके बारे में अभी सरकार से कोई सीधी सूचना नहीं आई है।
-पूनम सैनी, चेयरपर्सन, नगर परिषद, जींद
डेयरी संचालकों को होगी परेशानी
डेयरियां शहर से बाहर निकलाने से डेयरी संचालकों को काफी परेशानी होगी। फिलहाल डेयरी संचालकों के मकान भी डेयरियों के ऊपर ही बने हुए हैं। वहां प्लाट लेकर डेयरी बनाना बहुत महंगा होगा। हां, यदि दूध के दाम अच्छे मिलते हैं तो एक जगह जाने में भी कोई दिक्कत नहीं हैं। गोबर सीवर में नहीं बहाया जाता है।
राजेश पान्नू, प्रधान डेयरी एसोसिएशन