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Bahadurgarh: पेरिस पैरालंपिक में योगेश कथूनिया ने जीता रजत पदक, परिजन बोले- बीमारी को मात दे पाई कामयाबी

Tue, 03 Sep 2024 10:21 AM IST
नवीन दलाल संवाद न्यूज एजेंसी, बहादुरगढ़ (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, बहादुरगढ़ (हरियाणा) Published by: नवीन दलाल Updated Tue, 03 Sep 2024 10:21 AM IST
सार

योगेश को 2006 में पैरालिसिस हो गया था। परिजनों ने योगेश के वापस उठ खड़े होने की उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन योगेश ने हिम्मत नहीं हारी और व्हीलचेयर पर रहते हुए भी पूरे हौसले के साथ 2016 में खेलना शुरू किया।

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Yogesh Kathunia won silver medal in Paris Paralympics, family in said he was successful in defeating disease
सिल्वर मेडल जीत की खुशी में ढोल की थाप पर नाचते परिजन। - फोटो : संवाद

विस्तार

बहादुरगढ़ के बेटे योगेश कथूनिया ने पेरिस पैरालंपिक खेलों के डिस्कस थ्रो इवेंट में सोमवार को रजत पदक हासिल किया है। उन्होंने पैरालंपिक खेलों के डिस्कस थ्रो इवेंट में लगातार दूसरी बार रजत पदक हासिल किया है। इससे पहले योगेश ने टोक्यो पैरालंपिक गेम्स में भी सिल्वर पदक हासिल किया था। योगेश ने पेरिस में 42.22 मीटर दूरी के साथ सिल्वर मेडल जीता था।

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योगेश की माता मीना देवी का कहना है कि योगेश ने अपने सिल्वर मेडल का रंग बदलने का वादा किया था, लेकिन उनका बेटा व्हीलचेयर पर बैठकर भी सिल्वर मेडल हासिल कर रहा है। इससे भी मुझे संतोष है। उम्मीद है कि मेरा बेटा एक दिन पैरालंपिक गेम्स में स्वर्ण पदक जरूर हासिल करेगा।
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पिता बोले- बेटे पर फक्र, डेढ़ साल तक घर से दूर रहकर किया अभ्यास
पिता कैप्टन ज्ञानचंद को भी अपने बेटे पर फक्र है। योगेश की बहन पूजा का कहना है कि योगेश बहुत मेहनती है और सीधे-साधे स्वभाव का है। वह सरल तरीके से अपना जीवन व्यतीत कर रहा है और खेलों में उसे हिस्सा लेना बेहद पसंद है। अभ्यास के चलते योगेश एक-डेढ़ साल से घर नहीं आया है। पूजा का कहना है कि जब भाई घर लौटेगा तो उसका जोरदार स्वागत किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 9 सितंबर को योगेश दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचेगा। यहां से उसका स्वागत शुरू होगा और बहादुरगढ़ में भी परिजन उनका रोड शो निकालेंगे।
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बीमारी को मात दे पाई कामयाबी
योगेश को 2006 में पैरालिसिस हो गया था। परिजनों ने योगेश के वापस उठ खड़े होने की उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन योगेश ने हिम्मत नहीं हारी और व्हीलचेयर पर रहते हुए भी पूरे हौसले के साथ 2016 में खेलना शुरू किया। इसी का नतीजा है कि योगेश कथूनिया ने लगातार दूसरी बार पैरालंपिक खेलों में सिल्वर मेडल हासिल किया है। योगेश के दादा और पिता सेना में रहकर देश सेवा कर चुके हैं। अब योगेश पदक पर पदक जीतकर देश का नाम रोशन कर रहे हैं।

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