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Jhajjar-Bahadurgarh News: दशलक्षण पर्व पर हुई उत्तम आकिंचन्य धर्म की पूजा
Sat, 06 Sep 2025 02:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Sat, 06 Sep 2025 02:51 AM IST
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-फोटो 51 : अनाजमंडी स्थित पांडूशिला पर पूजा अर्चना करते हुए श्रद्धालु। स्रोत समाज
बहादुरगढ़। दशलक्षण महापर्व के नौंवें दिन सोमवार को जैन धर्मावलंबियों ने उत्तम आकिंचन्य धर्म उपासना की। गांधी चौक पास श्री पद्म प्रभ जैन मंदिर, अग्रवाल कॉलोनी स्थित जैन मंदिर, संत कॉलोनी स्थित जैन मंदिर और अनाजमंडी स्थित पांडूशिला पक्षीदाना स्थल पर पूर्व विधान के साथ जैन अनुयायियों ने उत्तम आकिंचन्य धर्म उपासना की।
पांडूशिला समिति प्रधान सुनील जैन ने कहा कि आकिंचन्य का अर्थ परिग्रह को छोड़ना है। मनुष्यों को केवल अपने सम्मान की परवाह नहीं करनी चाहिए बल्कि दूसरे व्यक्ति को आपकी बातों के कारण आत्म सम्मान पर ठेस नहीं पहुंचे, इसके लिए प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि अनाजमंडी पांडूशिला पर वार्षिक रथ यात्रा का पहुंचने पर स्वागत भी होगा और दोपहर 3 बजे यहां प्रसाद वितरण कार्यक्रम भी होगा। श्री दिगंबर जैन समाज बहादुरगढ़ के महासचिव अरविंद जैन कहा कि दूसरे व्यक्ति के दर्द को अहसास करने वाला व्यक्ति ही दूसरों की मदद कर सकता है।
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समन्वय सौभाग्य को आमंत्रण देता है। बुरी परिस्थितियों में संस्कारों की असली परीक्षा होती है। सार्वजनिक रूप से आपकी आलोचना करने वाले व्यक्ति कभी आपके शुभचिंतक नहीं हो सकते। परिग्रह मनुष्य की शांति को छीन लेता है।
उन्होंने कहा कि धन का लोभ दुख है और धन की प्राप्ति हो जाना दुख में वृद्धि है। मोक्ष मानव का अंतिम लक्ष्य है। मनुष्यों को 24 घंटे में कम से कम 2 घंटे भगवान की प्रार्थना, भक्ति एवं ध्यान के लिए निश्चित निकालना चाहिए।
सकल दिगंबर जैन समाज बहादुरगढ़ की ओर से रविवार 7 सितंबर को क्षमावाणी पर्व पर भव्य वार्षिक रथ यात्रा निकाली जाएगी। इसको लेकर समाज से जुड़े सभी लोग अपने-अपने स्तर पर तैयारियों में लगे हैं। बैंड बाजों, मनमोहक झांकियां के साथ यह वार्षिक रथ यात्रा शहर के विभिन्न मार्गों से निकाली जाएगी।
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पांडूशिला समिति प्रधान सुनील जैन ने कहा कि आकिंचन्य का अर्थ परिग्रह को छोड़ना है। मनुष्यों को केवल अपने सम्मान की परवाह नहीं करनी चाहिए बल्कि दूसरे व्यक्ति को आपकी बातों के कारण आत्म सम्मान पर ठेस नहीं पहुंचे, इसके लिए प्रयास करना चाहिए।
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उन्होंने बताया कि अनाजमंडी पांडूशिला पर वार्षिक रथ यात्रा का पहुंचने पर स्वागत भी होगा और दोपहर 3 बजे यहां प्रसाद वितरण कार्यक्रम भी होगा। श्री दिगंबर जैन समाज बहादुरगढ़ के महासचिव अरविंद जैन कहा कि दूसरे व्यक्ति के दर्द को अहसास करने वाला व्यक्ति ही दूसरों की मदद कर सकता है।
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समन्वय सौभाग्य को आमंत्रण देता है। बुरी परिस्थितियों में संस्कारों की असली परीक्षा होती है। सार्वजनिक रूप से आपकी आलोचना करने वाले व्यक्ति कभी आपके शुभचिंतक नहीं हो सकते। परिग्रह मनुष्य की शांति को छीन लेता है।
उन्होंने कहा कि धन का लोभ दुख है और धन की प्राप्ति हो जाना दुख में वृद्धि है। मोक्ष मानव का अंतिम लक्ष्य है। मनुष्यों को 24 घंटे में कम से कम 2 घंटे भगवान की प्रार्थना, भक्ति एवं ध्यान के लिए निश्चित निकालना चाहिए।
सकल दिगंबर जैन समाज बहादुरगढ़ की ओर से रविवार 7 सितंबर को क्षमावाणी पर्व पर भव्य वार्षिक रथ यात्रा निकाली जाएगी। इसको लेकर समाज से जुड़े सभी लोग अपने-अपने स्तर पर तैयारियों में लगे हैं। बैंड बाजों, मनमोहक झांकियां के साथ यह वार्षिक रथ यात्रा शहर के विभिन्न मार्गों से निकाली जाएगी।