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Jhajjar-Bahadurgarh News: आठ साल से कागजों में सिमटा महिला कॉलेज, दूरी के फेर में अटकी शिक्षा
Thu, 19 Sep 2024 06:55 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Thu, 19 Sep 2024 06:55 AM IST
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बेरी। करीब आठ साल पहले प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बेरी में विकास रैली के दौरान महिला महाविद्यालय बनाने की घोषणा की, लेकिन महिला कॉलेज बनाने की योजना अब तक सिरे नहीं चढ़ पाई। महिला कॉलेज स्टेडियम के पीछे 67 कैनाल 10 मरले जमीन पर बनाया जाना था। महिला कॉलेज बनवाने के लिए ग्रामीणों ने कई बार पंचायतें कीं, लेकिन कोई हल नहीं निकला।
महिला कॉलेज बनवाने की घोषणा कागजों में सिमटकर रह गई। महिला कॉलेज न होने से छात्राओं को काफी परेशानी का सामना करके उच्च शिक्षा के लिए झज्जर-रोहतक जाना पड़ता है। कई बार परिवहन विभाग की सेवा न होने से प्राइवेट वाहन में जाना पड़ता है, जिससे समय पर भी कॉलेज में नहीं पहुंच पातीं। बेरी से 5 किलोमीटर दूर दुजाना, बेरी से 7 किलोमीटर दूबलधन में कॉलेज होने की वजह से भी यह योजना सिरे नहीं चढ़ पाई, लेकिन शहर के लोग ही नहीं, खाप भी बेरी में कॉलेज खोलने की मांग कर चुकी हैं। संवाद
कॉलेज संघर्ष समिति ने सीएम को रैली के दौरान मांग पत्र सौंपा था
कॉलेज संघर्ष समिति के उपाध्यक्ष अत्तर सिंह कादयान ने बताया कि बेरी में सीएम की विकास रैली के दौरान संघर्ष समिति द्वारा क्षेत्र के 18 गांवों से मांग पत्र एकत्रित करके सीएम को सौंपा गया था। मांग पत्र के आधार पर बेरी में तत्कालीन सीएम ने महिला महाविद्यालय बनाने की घोषणा की थी। उन्होंने बताया कि राजनीतिक द्वेष के चलते हलके के साथ अन्याय हुआ है।
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महिला कॉलेज की जगह धर्मशाला बनने पर हुआ विरोध
कॉलेज की जगह पर नगर पालिका की धर्मशाला बनाने का कार्य शुरू होने की सूचना ग्रामवासियों को पता चली तो उन्होंने धर्मशाला बनने का विरोध किया। इसके बाद नगर पालिका अधिकारियों को धर्मशाला का निर्माण न करने का ज्ञापन दिया।
पांच बार हुई पंचायत, लेकिन कोई हल नहीं निकला
बेरी में तत्कालीन सीएम द्वारा महिला महाविद्यालय की घोषणा होने के बाद जब महाविद्यालय का निर्माण शुरू नहीं हुआ तो गांव के लोगों ने गोशाला में पांच बार पंचायतें कीं, लेकिन कोई हल नहीं निकला। पहली पंचायत गोशाला में 28 मार्च 2018 को, दूसरी पंचायत 25 मई 2018 को, तीसरी पंचायत 20 जनवरी 2019 को, चौथी पंचायत 23 अगस्त 2019 को, पांचवीं बार पंचायत 26 अगस्त 2019 को हुई थी।
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यह बोले लोग
बेरी में तत्कालीन सीएम की ओर से महिला विद्यालय की घोषणा के बाद जब निर्माण शुरू नहीं हुआ तो उनसे मुलाकात की, लेकिन उन्होंने साफ कह दिया कि बेरी के पास दूबलधन, दुजाना महाविद्यालय हैं, इसलिए बेरी में कॉलेज नहीं बनेगा, लेकिन यहां महिला महाविद्यालय नहीं है।
- सूबेदार धीर, बेरी निवासी
एक तरफ तो सरकार बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा दे रही है और बेरी की बेटियों को उच्च शिक्षा लेने के लिए झज्जर या रोहतक जाना पड़ता है। समय पर बस सुविधा न होने के कारण भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। महाविद्यालय की घोषणा को पूरा करना चाहिए, जिससे बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए दूर न जाना पड़े।
- भूप सिंह कादयान, पूर्व प्रधान, बेरी गोशाला
महिला कॉलेज बनवाने की घोषणा कागजों में सिमटकर रह गई। महिला कॉलेज न होने से छात्राओं को काफी परेशानी का सामना करके उच्च शिक्षा के लिए झज्जर-रोहतक जाना पड़ता है। कई बार परिवहन विभाग की सेवा न होने से प्राइवेट वाहन में जाना पड़ता है, जिससे समय पर भी कॉलेज में नहीं पहुंच पातीं। बेरी से 5 किलोमीटर दूर दुजाना, बेरी से 7 किलोमीटर दूबलधन में कॉलेज होने की वजह से भी यह योजना सिरे नहीं चढ़ पाई, लेकिन शहर के लोग ही नहीं, खाप भी बेरी में कॉलेज खोलने की मांग कर चुकी हैं। संवाद
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कॉलेज संघर्ष समिति ने सीएम को रैली के दौरान मांग पत्र सौंपा था
कॉलेज संघर्ष समिति के उपाध्यक्ष अत्तर सिंह कादयान ने बताया कि बेरी में सीएम की विकास रैली के दौरान संघर्ष समिति द्वारा क्षेत्र के 18 गांवों से मांग पत्र एकत्रित करके सीएम को सौंपा गया था। मांग पत्र के आधार पर बेरी में तत्कालीन सीएम ने महिला महाविद्यालय बनाने की घोषणा की थी। उन्होंने बताया कि राजनीतिक द्वेष के चलते हलके के साथ अन्याय हुआ है।
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महिला कॉलेज की जगह धर्मशाला बनने पर हुआ विरोध
कॉलेज की जगह पर नगर पालिका की धर्मशाला बनाने का कार्य शुरू होने की सूचना ग्रामवासियों को पता चली तो उन्होंने धर्मशाला बनने का विरोध किया। इसके बाद नगर पालिका अधिकारियों को धर्मशाला का निर्माण न करने का ज्ञापन दिया।
पांच बार हुई पंचायत, लेकिन कोई हल नहीं निकला
बेरी में तत्कालीन सीएम द्वारा महिला महाविद्यालय की घोषणा होने के बाद जब महाविद्यालय का निर्माण शुरू नहीं हुआ तो गांव के लोगों ने गोशाला में पांच बार पंचायतें कीं, लेकिन कोई हल नहीं निकला। पहली पंचायत गोशाला में 28 मार्च 2018 को, दूसरी पंचायत 25 मई 2018 को, तीसरी पंचायत 20 जनवरी 2019 को, चौथी पंचायत 23 अगस्त 2019 को, पांचवीं बार पंचायत 26 अगस्त 2019 को हुई थी।
यह बोले लोग
बेरी में तत्कालीन सीएम की ओर से महिला विद्यालय की घोषणा के बाद जब निर्माण शुरू नहीं हुआ तो उनसे मुलाकात की, लेकिन उन्होंने साफ कह दिया कि बेरी के पास दूबलधन, दुजाना महाविद्यालय हैं, इसलिए बेरी में कॉलेज नहीं बनेगा, लेकिन यहां महिला महाविद्यालय नहीं है।
- सूबेदार धीर, बेरी निवासी
एक तरफ तो सरकार बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा दे रही है और बेरी की बेटियों को उच्च शिक्षा लेने के लिए झज्जर या रोहतक जाना पड़ता है। समय पर बस सुविधा न होने के कारण भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। महाविद्यालय की घोषणा को पूरा करना चाहिए, जिससे बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए दूर न जाना पड़े।
- भूप सिंह कादयान, पूर्व प्रधान, बेरी गोशाला