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आंदोलन में महिलाओं ने निकाला मक्खन, बाजरे की बनाई खिचड़ी
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बाजरा कूटकर खिचड़ी बनाने की तैयारी करती महिलाएं।
- फोटो : Bahadurgarh
बादली। ढांसा बॉर्डर पर किसान आंदोलन स्थल पर अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया। महिलाओं ने आंदोलन की अध्यक्षता की और सरकार से तीनों कानूनों को रद्द करने की मांग की। महिलाओं ने हरियाणवी गीतों के माध्यम से सरकार पर जमकर प्रहार किए और उम्मीद जताई कि सरकार एक दिन किसानों की मांगों को जरूर पूरा करेगी और एमएसपी पर कानून बनाएगी। आंदोलन में पहुंची महिलाओं ने जहां दही से घी निकाला। वहीं बाजरे की खिचड़ी भी बनाई।
महिलाएं सोमवार की सुबह ही आंदोलनस्थल पर पहुंचनी शुरू हो गई। बादली से सुनीता गुलिया सहित दर्जनों महिलाएं स्वयं ट्रैक्टर चलाकर धरनास्थल पर पहुंची। महिलाएं घर से ही खाना बनाने के लिए खाद्य सामग्री लेकर पहुंची। जबकि कुछ महिलाएं पुरानी और हरियाणवी वेशभूषा पहनकर आंदोलन में आई। महिलाओं ने धरनास्थल पर बनाए गए चूल्हे पर खाना बनाया, जबकि कुछ महिलाओं ने दही से मक्खन निकालने का काम भी देसी अंदाज में किया। बाजरा कूटकर महिलाओं ने खिचड़ी भी बनाई। महिलाएं पूरा दिन गीतों पर झूमती रहीं। आंदोलन की अध्यक्षता करते हुए धनपति गुलिया ने सभी महिलाओं को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की बधाई दी। उन्होंने महिलाओं को संबोधित करते हुए किसान आंदोलन में महिलाओं की भूमिका जारी रहेगी और एक ही नहीं बल्कि अन्य दिनों में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़-चढ़कर रहेगी। उन्होंने कहा कि आंदोलन के आखिरी समय तक महिलाएं भाग लेंगी।
इस अवसर पर सुनीता बादली, रेनू बागपत, मुकेश दूबलधन, ममता बागपत, राजरानी, शीला, निर्मला ने संबोधित किया। जबकि सैकड़ों की संख्या में महिलाएं मौजूद रही। आंदोलन स्थल पर महिला दिवस पर बागपत से एक ही परिवार की तीन पीढ़ियां पहुंची रोशनी ने अपनी बहू मंजू और पौत्री दीक्षा के साथ किसानों को समर्थन दिया। बुजुर्ग महिला रोशनी ने बताया कि वह खेती बाड़ी का काम करती है और जिस प्रकार से कानूनों को बनाया गया है, उससे उनकी खेती बाड़ी करने के प्रति जोश कम हो रहा है।
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हरियाणवी गायक अजय हुड्डा के गानों पर थिरकीं महिलाएं
आंदोलनस्थल पर महिलाएं अजय हुड्डा के गाने पर मोदी जी थारी तोप कड़े सै हम दिल्ली आगे...और 52 गज का दामण पहर मटक चालूंगी... पर जमकर नाचते हुए मनोरंजन किया। पूरा दिन महिलाएं हरियाणवी गीतों पर झूमती रही। मंच पर थिरकती महिलाओं ने किसानों को संदेश दिया कि वह आंदोलन में कमजोर न हो, क्योंकि महिलाओं का साथ उनके साथ है और आगे रहेगा।
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महिलाएं सोमवार की सुबह ही आंदोलनस्थल पर पहुंचनी शुरू हो गई। बादली से सुनीता गुलिया सहित दर्जनों महिलाएं स्वयं ट्रैक्टर चलाकर धरनास्थल पर पहुंची। महिलाएं घर से ही खाना बनाने के लिए खाद्य सामग्री लेकर पहुंची। जबकि कुछ महिलाएं पुरानी और हरियाणवी वेशभूषा पहनकर आंदोलन में आई। महिलाओं ने धरनास्थल पर बनाए गए चूल्हे पर खाना बनाया, जबकि कुछ महिलाओं ने दही से मक्खन निकालने का काम भी देसी अंदाज में किया। बाजरा कूटकर महिलाओं ने खिचड़ी भी बनाई। महिलाएं पूरा दिन गीतों पर झूमती रहीं। आंदोलन की अध्यक्षता करते हुए धनपति गुलिया ने सभी महिलाओं को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की बधाई दी। उन्होंने महिलाओं को संबोधित करते हुए किसान आंदोलन में महिलाओं की भूमिका जारी रहेगी और एक ही नहीं बल्कि अन्य दिनों में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़-चढ़कर रहेगी। उन्होंने कहा कि आंदोलन के आखिरी समय तक महिलाएं भाग लेंगी।
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इस अवसर पर सुनीता बादली, रेनू बागपत, मुकेश दूबलधन, ममता बागपत, राजरानी, शीला, निर्मला ने संबोधित किया। जबकि सैकड़ों की संख्या में महिलाएं मौजूद रही। आंदोलन स्थल पर महिला दिवस पर बागपत से एक ही परिवार की तीन पीढ़ियां पहुंची रोशनी ने अपनी बहू मंजू और पौत्री दीक्षा के साथ किसानों को समर्थन दिया। बुजुर्ग महिला रोशनी ने बताया कि वह खेती बाड़ी का काम करती है और जिस प्रकार से कानूनों को बनाया गया है, उससे उनकी खेती बाड़ी करने के प्रति जोश कम हो रहा है।
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आंदोलनस्थल पर महिलाएं अजय हुड्डा के गाने पर मोदी जी थारी तोप कड़े सै हम दिल्ली आगे...और 52 गज का दामण पहर मटक चालूंगी... पर जमकर नाचते हुए मनोरंजन किया। पूरा दिन महिलाएं हरियाणवी गीतों पर झूमती रही। मंच पर थिरकती महिलाओं ने किसानों को संदेश दिया कि वह आंदोलन में कमजोर न हो, क्योंकि महिलाओं का साथ उनके साथ है और आगे रहेगा।