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जाने इस गांव के लोगों ने क्यों नहीं डाले वोट

Thu, 16 Oct 2014 01:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, झज्जर बहादुरगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, झज्जर बहादुरगढ़ Updated Thu, 16 Oct 2014 01:07 AM IST
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Why not let the people of the village casts vote

गांव सिलानी के बाईपास पर मंगलवार को हुई दुर्घटना के बाद चौराहे का निर्माण किए जाने की मांग को लेकर मतदान के किए गए बहिष्कार के निर्णय पर सिलानी केशो के ग्रामीण अडिग रहे।

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इनका कहना था कि प्रशासन ने इनकी बात पर गौर नहीं किया, इसलिए ग्रामीणों ने मंगलवार रात को पंचायत कर बुधवार को होने वाले मतदान में वोट नहीं डालने का फैसला किया।
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दिनभर ग्रामीणों के वोट डालने और नहीं डालने को लेकर कयास लगते रहे, लेकिन ग्रामीण पंचायत में किए गए निर्णय पर डटे रहे।

सिलानी गांव की दूसरी पंचायत, सिलानी जालिम में मतदान का बहिष्कार तो नहीं हुआ, मगर यहां भी मतदान की रफ्तार सुस्त ही रही।

सुबह यहां साढ़े नौ बजे तक 1950 मतों से केवल 69 वोट ही डले। बाद में मतदान में कुछ तेजी आई और शाम तक यहां करीब 600 वोट डाले गए।

पंचायती तौर पर गांव के सरपंच रामकिशन की अध्यक्षता में लिए गए फैसले के अनुसार सुबह से ही यहां पोलिंग नहीं हुई।

हालांकि मतदान के लिए पार्टियां शाम को ही पहुंच चुकी थी और सुबह सब तैयारियां भी की थीं। मगर कोई भी मतदाता यहां वोट डालने के लिए नहीं आया।

हैरत की बात यह रही कि मतदान का बहिष्कार करने वाले इन लोगों को मतदान की प्रक्रिया में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित करने कोई नेता भी नहीं पहुंचा।

प्रशासन की ओर से ग्रामीणों को वोट डालने की अपील करने के लिए एडीसी जगदीश शर्मा, सीटीएम बिजेंद्र सिंह के अलावा डीएसपी भी गए और उन्हें वोट डालने का आह्वान किया, मगर ग्रामीण नहीं माने।
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तीन बूथों पर नहीं डले वोट
पान्ना केशो के बूथ नंबर 18 व 19 में मतदान की प्रक्रिया समाप्त होने तक केवल एक ही वोट डाला गया था।

बूथ नम्बर 18 में 1317 व बूथ नम्बर 19 में मतदाताओं की संख्या 1286 है। यहां बनाए गए एक अन्य आरक्षित मतदान केंद्र पर मतदान नहीं हुआ।

लिया यू-टर्न
पान्ना जालिम के बूथ नम्बर 20 व 21 में मतदान के शुरुआती दौर में मतदान की प्रक्रिया ढीली रही। दोपहर करीब साढ़े बारह बजे तक दोनों बूथों पर केवल 70 वोट ही डाले जा सके।

दोपहर बाद तक इन दोनों ही बूथों पर मतदान रुका भी रहा, लेकिन शाम चार बजे के करीब एक पार्टी ने दूसरी पार्टी पर मतदान किए जाने का आरोप लगाते हुए मतदान के बहिष्कार से यू-टर्न लेते हुए मत डाले। मतदान समाप्त होने तक इन दोनों ही बूथों पर 600 वोट डाले जा चुके थे।

प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी
मतदान वाले दिन सिलानी गांव के पान्ना केशो के ग्रामीण मतदान केन्द्र के इर्द-गिर्द तो घूमते रहे, लेकिन किसी ने भी मतदान केन्द्र के अंदर जाने की जहमत नही उठाई।

बाद में मतदान केन्द्र के थोड़ी ही दूरी पर ग्रामीणों ने एकत्र होकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। साथ ही फैसला लिया कि यदि प्रशासन उनकी मांग को पूरा नही करता है तो उनका आंदोलन ओर भी ज्यादा उग्र रूप धारण करेगा।


ये है मामला
सिलानी गांव के बाइपास के पास मंगलवार को हुई एक सड़क दुर्घटना में गांव के ही एक युवक की मौत हो गई थी, जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया था।

ग्रामीणों ने दुर्घटना से आक्रोशित होकर गांव से गुजरने वाले रिवाड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग को करीब 6 घंटे तक जाम भी कर दिया था।

ग्रामीणों की मांग थी कि अंडरपास न होने, सर्विस लाइन न होने व गोल चक्कर न होने की वजह से गांव में ही करीब 16 लोग दुर्घटना का शिकार हो चुके हैं।

लेकिन प्रशासन का बार-बार ध्यान दिलाए जाने के बाद भी उनकी मांग को पूरा नहीं किया जा रहा। इसी के चलते ग्रामीणोें ने बुधवार को मतदान के बहिष्कार का फैसला किया था।

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