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Jhajjar-Bahadurgarh News: तुलसी के पौधे वितरित कर स्वयंसेविकाओं ने दिया हरित दिवाली का संदेश
Mon, 20 Oct 2025 01:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Mon, 20 Oct 2025 01:26 AM IST
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बहादुरगढ़। दिवाली को पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में वैश्य आर्य शिक्षण महिला महाविद्यालय ने एक प्रशंसनीय पहल करते हुए हरित दीवाली, स्वच्छ दिवाली अभियान के अंतर्गत जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया।
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. आशा शर्मा के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में एनएसएस इकाई, इको क्लब तथा वाईआरसी सेल की स्वयंसेविकाओं ने स्थानीय इंटर्नशिप स्कूल में जाकर विद्यार्थियों और आस-पास के समुदाय को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
कार्यक्रम की विशेष बात यह रही कि स्वयंंसेविकाओं ने तुलसी के पौधों का वितरण करते हुए लोगों से आग्रह किया कि वे इस दिवाली पटाखों की जगह दीयों और हरियाली को अपनाएं। स्वयंसेविकाओं ने कम धुआं, अधिक दीप के नारे के साथ प्रदूषण मुक्त और पारंपरिक दिवाली मनाने के लिए प्रेरित किया।
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प्राचार्य डॉ. आशा शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय की आवश्यकता है कि हम त्योहारों को मनाते हुए पर्यावरण के प्रति भी संवेदनशील बनें। मिट्टी के दीपक और तुलसी जैसे पौधे हमारी संस्कृति और प्रकृति दोनों की रक्षा करते हैं। हर नागरिक की छोटी पहल बड़े बदलाव ला सकती है।
महाविद्यालय की यह पहल न केवल युवाओं को पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रेरित करती है, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में भी सशक्त कदम है।
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महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. आशा शर्मा के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में एनएसएस इकाई, इको क्लब तथा वाईआरसी सेल की स्वयंसेविकाओं ने स्थानीय इंटर्नशिप स्कूल में जाकर विद्यार्थियों और आस-पास के समुदाय को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
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कार्यक्रम की विशेष बात यह रही कि स्वयंंसेविकाओं ने तुलसी के पौधों का वितरण करते हुए लोगों से आग्रह किया कि वे इस दिवाली पटाखों की जगह दीयों और हरियाली को अपनाएं। स्वयंसेविकाओं ने कम धुआं, अधिक दीप के नारे के साथ प्रदूषण मुक्त और पारंपरिक दिवाली मनाने के लिए प्रेरित किया।
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प्राचार्य डॉ. आशा शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय की आवश्यकता है कि हम त्योहारों को मनाते हुए पर्यावरण के प्रति भी संवेदनशील बनें। मिट्टी के दीपक और तुलसी जैसे पौधे हमारी संस्कृति और प्रकृति दोनों की रक्षा करते हैं। हर नागरिक की छोटी पहल बड़े बदलाव ला सकती है।
महाविद्यालय की यह पहल न केवल युवाओं को पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रेरित करती है, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में भी सशक्त कदम है।