{"_id":"617eef7125e43829d45eac32","slug":"the-way-to-go-two-and-a-half-feet-on-the-tikri-border-and-two-and-a-half-feet-is-going-on-smoothly-bahadurgarh-news-rtk6286902127","type":"story","status":"publish","title_hn":"टीकरी बार्डर पर ढाई फुट जाने का और ढाई फुट आने का रास्ता चल रहा सुचारू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
टीकरी बार्डर पर ढाई फुट जाने का और ढाई फुट आने का रास्ता चल रहा सुचारू
विज्ञापन
टीकरी बार्डर पर भले ही पैदल राहगीरों, दुपहिया वाहनों व एंबुलेंस के लिए केवल 5 फुट तक रास्ता खुल या, लेकिन इस तरह नाममात्र की व्यवस्था से स्थानीय लोगों व स्थानीय उद्यमियों में असंतोष है। उनके वाहन जब दिल्ली-हरियाणा में इस मार्ग से आ-जा नहीं सकेंगे तो पटरी से पूरी तरह उतरा उनका काम धंधा जोर नहीं पकड़ पाएगा। उद्यमी व अन्य राहगीर किसानों व पुलिस से आग्रह कर रहे हैं कि बार्डर के रास्ते एक तरफ से गाडिय़ों के आने-जाने दिया जाना चाहिए।
बता दें कि 11 महीने से बंद टीकरी बार्डर पर 5 फुट का रास्ता किसानों, दिल्ली पुलिस व झज्जर जिला प्रशासन के अधिकारियों के बीच हुई बैठक के बाद खोला गया है, लेकिन इतने रास्ते से केवल दुपहिया वाहनों के आने-जाने में व इमरजेंसी सेवाओं से जुड़ी एंबुलेंस के आवागमन को छूट दी जा रही है। कार व दूसरे वाहनों के लिए रास्ता नहीं खोला गया है। टीकरी बार्डर पर दुपहिया वाहनों व एंबुलेंस के लिए 100 फुट तक बैरिकेड की पतली गली बनाकर रास्ता तैयार किया गया है। एक तरफ बैरिकेड् के पास पुलिस व अर्द्धसैनिक बल के जवान भी तैनात है तो दूसरी तरफ आंदोलनकारी किसान।
रास्ता खोले जाने के लिए बहादुरगढ़ के उद्यमियों ने मानवाधिकार आयोग से लेकर न्यायालय तक शरण ली है लेकिन उसके बावजूद अभी भी उद्यमियों को खोले गए रास्ते से कोई राहत नहीं मिल पाई है। जो 5 फुट का रास्ता बनाया गया है उसमें अढ़ाई फुट का रास्ता दुपहिया वाहनों के जाने के लिए तैयार किया गया है तो दूसरी तरफ भी ढाई फुट रास्ता बनाकर आने वाले दुपहिया चालकों को राहत दी गई है। हालांकि एंबुलेंस के आने पर तुरंत बैरिकेड् को हटाकर रास्ता दिया जाता है। लेकिन निकलते ही बंद कर दिया जाता है। यह सब व्यवस्था सुबह 7 से शाम के 8 बजे तक ही निर्धारित की गई है। दिल्ली पुलिस व किसानों के इस फैसले से उद्यमियों में असंतोष भी है। कारों व अन्य वाहनों के आने-जाने को लेकर रास्ता दिया जाएगा या नहीं यह तो 6 नवंबर को संयुक्त किसान मोर्चा की मीटिंग के बाद ही हो सकेगा। फिलहाल 5 फुट का जो रास्ता टिकरी बार्डर पर तैयार किया गया है उससे सभी को राहत नहीं मिल रही।
विज्ञापन
दुकानदार मोहन, सुरेंद्र, कृष्ण, सुभाष, दिल्ली में काम करने वाले राजेश व मुकेश का कहना है कि टीकरी बार्डर पर जो रास्ता खोला गया है उसका समय निर्धारित नहीं होना चाहिए। जिन दुपहिया वाहन चालकों को सुबह जल्दी अपने काम धंधे के लिए जाना पड़ता है या फिर 8 बजे के बाद आना पड़ता है तो उन्हें तो परेशानी होगी ही। उन्हें फिर से बार्डर के साथ लगती गलियों में अंधेरे के बीच इधर-उधर से परेशान होकर ही निकलना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पिछले 11 माह से जिंदगी थम सी गई लगती है। दुकानदार नरेंद्र ने कहा कि यह प्रयास केवल दिल्ली पुलिस न्यायालय में अपना पक्ष रखने के लिए कर रही है। जैसे ही न्यायालय में जवाब दायर होगा फिर कोई न कोई विवाद का बहाना बनाकर इस रास्ते को बंद कर दिया जाएगा। यहां के लोगों को रास्ता खुलने से खुशी जरूर है लेकिन वे इसे स्थायी नहीं मान रहे। उनका मानना है कि यह पूरी कार्रवाई सिर्फ न्यायालय के लिए हुई है। व्यवसायी आरबी यादव का कहना है कि बार्डर का एक तरफ का पूरा रास्ता खोला जाना चाहिए ताकि यहां से आने-जाने वालों को कोई दिक्कतें न उठानी पड़े।
विज्ञापन
बता दें कि 11 महीने से बंद टीकरी बार्डर पर 5 फुट का रास्ता किसानों, दिल्ली पुलिस व झज्जर जिला प्रशासन के अधिकारियों के बीच हुई बैठक के बाद खोला गया है, लेकिन इतने रास्ते से केवल दुपहिया वाहनों के आने-जाने में व इमरजेंसी सेवाओं से जुड़ी एंबुलेंस के आवागमन को छूट दी जा रही है। कार व दूसरे वाहनों के लिए रास्ता नहीं खोला गया है। टीकरी बार्डर पर दुपहिया वाहनों व एंबुलेंस के लिए 100 फुट तक बैरिकेड की पतली गली बनाकर रास्ता तैयार किया गया है। एक तरफ बैरिकेड् के पास पुलिस व अर्द्धसैनिक बल के जवान भी तैनात है तो दूसरी तरफ आंदोलनकारी किसान।
विज्ञापन
रास्ता खोले जाने के लिए बहादुरगढ़ के उद्यमियों ने मानवाधिकार आयोग से लेकर न्यायालय तक शरण ली है लेकिन उसके बावजूद अभी भी उद्यमियों को खोले गए रास्ते से कोई राहत नहीं मिल पाई है। जो 5 फुट का रास्ता बनाया गया है उसमें अढ़ाई फुट का रास्ता दुपहिया वाहनों के जाने के लिए तैयार किया गया है तो दूसरी तरफ भी ढाई फुट रास्ता बनाकर आने वाले दुपहिया चालकों को राहत दी गई है। हालांकि एंबुलेंस के आने पर तुरंत बैरिकेड् को हटाकर रास्ता दिया जाता है। लेकिन निकलते ही बंद कर दिया जाता है। यह सब व्यवस्था सुबह 7 से शाम के 8 बजे तक ही निर्धारित की गई है। दिल्ली पुलिस व किसानों के इस फैसले से उद्यमियों में असंतोष भी है। कारों व अन्य वाहनों के आने-जाने को लेकर रास्ता दिया जाएगा या नहीं यह तो 6 नवंबर को संयुक्त किसान मोर्चा की मीटिंग के बाद ही हो सकेगा। फिलहाल 5 फुट का जो रास्ता टिकरी बार्डर पर तैयार किया गया है उससे सभी को राहत नहीं मिल रही।
विज्ञापन
दुकानदार मोहन, सुरेंद्र, कृष्ण, सुभाष, दिल्ली में काम करने वाले राजेश व मुकेश का कहना है कि टीकरी बार्डर पर जो रास्ता खोला गया है उसका समय निर्धारित नहीं होना चाहिए। जिन दुपहिया वाहन चालकों को सुबह जल्दी अपने काम धंधे के लिए जाना पड़ता है या फिर 8 बजे के बाद आना पड़ता है तो उन्हें तो परेशानी होगी ही। उन्हें फिर से बार्डर के साथ लगती गलियों में अंधेरे के बीच इधर-उधर से परेशान होकर ही निकलना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पिछले 11 माह से जिंदगी थम सी गई लगती है। दुकानदार नरेंद्र ने कहा कि यह प्रयास केवल दिल्ली पुलिस न्यायालय में अपना पक्ष रखने के लिए कर रही है। जैसे ही न्यायालय में जवाब दायर होगा फिर कोई न कोई विवाद का बहाना बनाकर इस रास्ते को बंद कर दिया जाएगा। यहां के लोगों को रास्ता खुलने से खुशी जरूर है लेकिन वे इसे स्थायी नहीं मान रहे। उनका मानना है कि यह पूरी कार्रवाई सिर्फ न्यायालय के लिए हुई है। व्यवसायी आरबी यादव का कहना है कि बार्डर का एक तरफ का पूरा रास्ता खोला जाना चाहिए ताकि यहां से आने-जाने वालों को कोई दिक्कतें न उठानी पड़े।