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झज्जर पहुंचा शहीद नायब सूबेदार का पार्थिव शरीर, सुबह होगा सैनिक सम्मान के साथ अंतिम संस्कार
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शहीद रविंद्र का फाइल फोटो।
- फोटो : Jhjhar
झज्जर। जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले के नौशेरा सेक्टर में शुक्रवार शाम पाकिस्तानी गोलाबारी के दौरान शहीद हुए नायब सूबेदार रविंद्र कुमार का पार्थिव शरीर शनिवार शाम को झज्जर पहुंच गया। परिवार और गांव के लोग दिनभर अपने लाडले के पार्थिव शरीर का गांव में आने के इंतजार में बैठे रहे। गांव में लोगों का शहीद के घर पर आना-जाना लगा रहा। परिवार के लोगों का कहना है कि मौसम खराब होने के कारण राजौरी से हेलिकाप्टर उड़ान नहीं भर पाया था, लेकिन शाम के समय शहीद का पार्थिव शरीर दिल्ली पहुंचा। उसके बाद पार्थिव शरीर को सेना की एंबुलेंस से झज्जर लाया गया। एक्स सर्विसमैन लीग के कार्यालय में शहीद लके पार्थिव शरीर को रात में रखा गया है। रविवार सुबह पार्थिव शरीर को काफिले के साथ शहीद के पैतृक गांव साल्हावास में ले जाया जाएगा।
बता दें कि शुक्रवार शाम पाकिस्तानी गोलाबारी के दौरान नायब सूबेदार रविंद्र कुमार शहीद हो गए थे। सेना की ओर से शहीद नायब सूबेदार रविंद्र की शहादत के बारे परिवार को सूचना दी गई। सूचना के बाद शहीद रविंद्र के घर और गांव में मातम छा गया। सूचना के बाद काफी संख्या में ग्रामीण रविंद्र के घर संवेदना व्यक्त करने पहुंचे। शनिवार को भी पूरा दिन गमगीन माहौल के बीच शहीद रविंद्र के अंतिम संस्कार की तैयारियां की गई।
गांव की पंचायती भूमि पर होगा अंतिम संस्कार
शहीद रविंद्र कुमार की शहादत पर पूरे साल्हावास के ग्रामीणों और क्षेत्र के लोगों को नाज है। ग्रामीणों का यह भी कहना था कि शहीद रविंद्र ने कारगिल युद्ध में भी दुश्मनों का मुकाबला करते हुए उनके छक्के छुटाए थे। जब ग्रामीणों को रविंद्र की शहादत की खबर मिली है तो पूरे गांव व क्षेत्र के लोगों को गर्व हुआ कि उनके लाडले ने देश के लिए कुर्बानी दी है। ग्राम सरपंच सुदेश का कहना है कि शहीद रविंद्र का अंतिम संस्कार भी उसी पंचायती भूमि पर किया जाएगा, जहां पहले भी गांव के तीन शहीदों का संस्कार किया गया था। इसके लिए ग्राम पंचायत ने उस जमीन की सफाई करा दी है।
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पिता भी थे सेना में, बड़ा भाई और भतीजा भी है सेना में कार्यरत
शहीद रविंद्र के पिता मीर सिंह भी सेना में कार्यरत थे। वे सेना की आर्मी सप्लाई कोर से वर्ष 1991 में सेवानिवृत्त हुए थे। जबकि उसका बड़ा भाई जितेंद्र भी ग्रेनेडियर रेजिमेंट में फिलहाल रुड़की में तैनात है। वहीं शहीद का भतीजा मंजीत भी 16 ग्रेनेडियर में रविंद्र के साथ ही तैनात है। वह शहीद रविंद्र के पार्थिव शरीर के साथ है।
अंबाला में रहते हैं पत्नी और बच्चे
शहीद नायब सूबेदार रविंद्र के दो लड़के हैं। एक नितिन कुमार अंबाला में बीए प्रथम वर्ष में शिक्षा ग्रहण कर रहा है, जबकि छोटा बेटा कार्तिक 12वीं कक्षा में अंबाला के निजी स्कूल में पढ़ता है। शहीद की पत्नी राजवंती बच्चों के साथ अंबाला में ही रहती हैं। शहीद का बाकी परिवार गांव साल्हावास में रहता है। अंबाला से सभी लोग साल्हावास पहुंच गए हैं। पूर्व लेफ्टिनेंट एमएस जाखड़ का कहना है कि रविंद्र एक ईमानदार, स्वच्छ छवि और मिलनसार प्रतिभा का धनी थे। गांव में भी और अंबाला में भी उनका घर पड़ोस में है।
शहीद का पार्थिव शरीर झज्जर पहुंच गया है। सुबह सम्मान के साथ पार्थिव शरीर को साल्हावास ले जाया जाएगा। सुरक्षा के लिए गार्द लगाई जा रही है।
- राजेश दुग्गल, एसपी, झज्जर।
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बता दें कि शुक्रवार शाम पाकिस्तानी गोलाबारी के दौरान नायब सूबेदार रविंद्र कुमार शहीद हो गए थे। सेना की ओर से शहीद नायब सूबेदार रविंद्र की शहादत के बारे परिवार को सूचना दी गई। सूचना के बाद शहीद रविंद्र के घर और गांव में मातम छा गया। सूचना के बाद काफी संख्या में ग्रामीण रविंद्र के घर संवेदना व्यक्त करने पहुंचे। शनिवार को भी पूरा दिन गमगीन माहौल के बीच शहीद रविंद्र के अंतिम संस्कार की तैयारियां की गई।
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गांव की पंचायती भूमि पर होगा अंतिम संस्कार
शहीद रविंद्र कुमार की शहादत पर पूरे साल्हावास के ग्रामीणों और क्षेत्र के लोगों को नाज है। ग्रामीणों का यह भी कहना था कि शहीद रविंद्र ने कारगिल युद्ध में भी दुश्मनों का मुकाबला करते हुए उनके छक्के छुटाए थे। जब ग्रामीणों को रविंद्र की शहादत की खबर मिली है तो पूरे गांव व क्षेत्र के लोगों को गर्व हुआ कि उनके लाडले ने देश के लिए कुर्बानी दी है। ग्राम सरपंच सुदेश का कहना है कि शहीद रविंद्र का अंतिम संस्कार भी उसी पंचायती भूमि पर किया जाएगा, जहां पहले भी गांव के तीन शहीदों का संस्कार किया गया था। इसके लिए ग्राम पंचायत ने उस जमीन की सफाई करा दी है।
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पिता भी थे सेना में, बड़ा भाई और भतीजा भी है सेना में कार्यरत
शहीद रविंद्र के पिता मीर सिंह भी सेना में कार्यरत थे। वे सेना की आर्मी सप्लाई कोर से वर्ष 1991 में सेवानिवृत्त हुए थे। जबकि उसका बड़ा भाई जितेंद्र भी ग्रेनेडियर रेजिमेंट में फिलहाल रुड़की में तैनात है। वहीं शहीद का भतीजा मंजीत भी 16 ग्रेनेडियर में रविंद्र के साथ ही तैनात है। वह शहीद रविंद्र के पार्थिव शरीर के साथ है।
अंबाला में रहते हैं पत्नी और बच्चे
शहीद नायब सूबेदार रविंद्र के दो लड़के हैं। एक नितिन कुमार अंबाला में बीए प्रथम वर्ष में शिक्षा ग्रहण कर रहा है, जबकि छोटा बेटा कार्तिक 12वीं कक्षा में अंबाला के निजी स्कूल में पढ़ता है। शहीद की पत्नी राजवंती बच्चों के साथ अंबाला में ही रहती हैं। शहीद का बाकी परिवार गांव साल्हावास में रहता है। अंबाला से सभी लोग साल्हावास पहुंच गए हैं। पूर्व लेफ्टिनेंट एमएस जाखड़ का कहना है कि रविंद्र एक ईमानदार, स्वच्छ छवि और मिलनसार प्रतिभा का धनी थे। गांव में भी और अंबाला में भी उनका घर पड़ोस में है।
शहीद का पार्थिव शरीर झज्जर पहुंच गया है। सुबह सम्मान के साथ पार्थिव शरीर को साल्हावास ले जाया जाएगा। सुरक्षा के लिए गार्द लगाई जा रही है।
- राजेश दुग्गल, एसपी, झज्जर।

झज्जर पहुंचा शहीद सूबेदार रविंद्र का पार्थिव शरीर। संवाद- फोटो : Jhjhar

शहीद के पार्थिव शरीर के साथ पहुंचे परिजन। संवाद- फोटो : Jhjhar