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Jhajjar-Bahadurgarh News: मेन बाजार स्थित कमेटी चौक पर दो दुकानदारों में नहीं थम रहा सीढ़ी लगाने का विवाद
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बहादुरगढ़। मेन बाजार स्थित कमेटी चौक पर दुकान नंबर पांच और छह के बीच स्थित सामूहिक जीना (सीढ़ी) को लेकर दो दुकानदारों के बीच हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब नया विवाद नगर परिषद ने खड़ा कर दिया है। नगर परिषद के अधिकारियों ने सीएम आवास पर हुए फैसले को दरकिनार करते हुए जीने को एक दुकानदार के नाम कर दिया है। नप के इस फैसले के खिलाफ दूसरे दुकानदार ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सिविल जज जूनियर डिवीजन सुमन की अदालत ने दुकानदार तरसेम जैन के दावे की सुनवाई करते हुए अंतरिम राहत दी है। अदालत ने मामले में अंतरिम निषेधाज्ञा देते हुए आदेश दिए हैं कि वादी पक्ष यानि दुकानदार तरसेम जैन को भी जीने का प्रयोग करने दिया जाए और इस मामले में प्रतिवादी पक्ष दुकानदार यशपाल और नगर परिषद से भी 31 जुलाई तक अपना पक्ष रखने के आदेश अदालत ने दिए हैं।
दुकानदार ने तरसेम जैन ने दिया नप के पत्र का हवाला, कोर्ट ने उसी आधार पर दिया फैसला
कमेटी चौक पर नौ दुकानों के लिए एक सामूहिक जीना दुकान नंबर पांच व छह के बीच बनाया गया था। दुकान पांच के किरायेदार यशपाल हैं और दुकान छह के तरसेम जैन। प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री शहरी स्थानीय निकाय योजना में 20 साल से अधिक समय से किरायेदार दुकानदारों को दुकानों का मालिकाना हक देने का निर्णय लिया था। इसमें कलेक्टर रेट में छूट के साथ दुकान की कन्वेंस डीड नगर परिषद की ओर से कराई जा रही है।
मेन बाजार के इस सामूहिक जीने को अपने नाम कराने के लिए तरसेम जैन और यशपाल के बीच वर्ष 2023 से विवाद चला आ रहा है। यह विवाद पहले निकाय मंत्री और फिर मुख्यमंत्री तक पहुंचा। दुकानदारों ने इसकी शिकायत सीएम को रखी थी तो नगर परिषद के अधिकारियों को सीएम आवास पर बुलाया गया था। सीएम आवास पर हुए फैसले से तत्कालीन कार्यकारी अधिकारी ने अपने पत्र क्रमांक 940 दिनांक 16 फरवरी 2024 के तहत दोनों दुकानदारों को अवगत कराते हुए अपनी-अपनी दुकान की कन्वेंस डीड करवाने के निर्देश दिए थे। इसमें बताया गया था कि जीना किसी भी दुकानदार के नाम नहीं कराया जाएगा। ऐसे में तरसेम जैन ने अपनी दुकान की डीड करवा ली थी लेकिन यशपाल को बार-बार पत्र लिखने के बाद भी उन्होंने कन्वेंस डीड नहीं करवाई थी।
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अब नप के फैसले से फिर उठा विवाद जो कोर्ट तक पहुंच गया
दुकानदार तरसेम जैन ने बताया कि जुलाई माह के तीसरे सप्ताह में नगर परिषद ने दुकानदार यशपाल यानी दुकान नंबर पांच के हक में फैसला करते हुए कन्वेंस डीड करवा दी। इस डीड में जीने की जमीन भी उनके नाम कर दी गई। नप अधिकारियों के इस कारनामे से मुझे गहरा आघात लगा। नप अधिकारियों ने मेरे साथ धोखा किया। मैंने मांग की थी या तो जीना दोनों दुकानदारों के नाम पर किया जाए या फिर सामूहिक रूप से छोड़ दिया जाए, मगर नप अधिकारियों ने भ्रष्टाचार में लिप्त होकर दुकान नंबर पांच के हक में जीने की जमीन की कन्वेंस डीड करवा दी। इस मामले में नप अधिकारियों ने सीएम के आदेशों को भी ठेंगा दिखाया है। मैंने कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर न्याय की मांग की है और कन्वेंस डीड को रद कराने की मांग की है।
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कमेटी चौक पर नौ दुकानों के सामूहिक जीने को एक दुकानदार के नाम कर दिया गया। नप अधिकारियों ने नियम ताक पर रखकर जीने की जमीन दुकान नंबर पांच के दुकानदार के नाम करवाई है। कोर्ट से हमें न्याय की उम्मीद है। फिलहाल कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए जीने के प्रयोग की अनुमति दी है। साथ ही 31 जुलाई को प्रतिवादी पक्ष से जवाब मांगा है। हम इसकी शिकायत भी उच्चाधिकारियों से करेंगे।
-एडवोकेट विरद चौधरी, वादी पक्ष के वकील।
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यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। मैं इस बारे में अधिकारियों से जवाब तलब करूंगी। मामले की जांच कराई जाएगी। जो भी दोषी होगा, उस पर कार्रवाई की जाएगी।
-सरोज राठी, चेयरपर्सन, नगर परिषद, बहादुरगढ़।
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दुकानदार ने तरसेम जैन ने दिया नप के पत्र का हवाला, कोर्ट ने उसी आधार पर दिया फैसला
कमेटी चौक पर नौ दुकानों के लिए एक सामूहिक जीना दुकान नंबर पांच व छह के बीच बनाया गया था। दुकान पांच के किरायेदार यशपाल हैं और दुकान छह के तरसेम जैन। प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री शहरी स्थानीय निकाय योजना में 20 साल से अधिक समय से किरायेदार दुकानदारों को दुकानों का मालिकाना हक देने का निर्णय लिया था। इसमें कलेक्टर रेट में छूट के साथ दुकान की कन्वेंस डीड नगर परिषद की ओर से कराई जा रही है।
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मेन बाजार के इस सामूहिक जीने को अपने नाम कराने के लिए तरसेम जैन और यशपाल के बीच वर्ष 2023 से विवाद चला आ रहा है। यह विवाद पहले निकाय मंत्री और फिर मुख्यमंत्री तक पहुंचा। दुकानदारों ने इसकी शिकायत सीएम को रखी थी तो नगर परिषद के अधिकारियों को सीएम आवास पर बुलाया गया था। सीएम आवास पर हुए फैसले से तत्कालीन कार्यकारी अधिकारी ने अपने पत्र क्रमांक 940 दिनांक 16 फरवरी 2024 के तहत दोनों दुकानदारों को अवगत कराते हुए अपनी-अपनी दुकान की कन्वेंस डीड करवाने के निर्देश दिए थे। इसमें बताया गया था कि जीना किसी भी दुकानदार के नाम नहीं कराया जाएगा। ऐसे में तरसेम जैन ने अपनी दुकान की डीड करवा ली थी लेकिन यशपाल को बार-बार पत्र लिखने के बाद भी उन्होंने कन्वेंस डीड नहीं करवाई थी।
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अब नप के फैसले से फिर उठा विवाद जो कोर्ट तक पहुंच गया
दुकानदार तरसेम जैन ने बताया कि जुलाई माह के तीसरे सप्ताह में नगर परिषद ने दुकानदार यशपाल यानी दुकान नंबर पांच के हक में फैसला करते हुए कन्वेंस डीड करवा दी। इस डीड में जीने की जमीन भी उनके नाम कर दी गई। नप अधिकारियों के इस कारनामे से मुझे गहरा आघात लगा। नप अधिकारियों ने मेरे साथ धोखा किया। मैंने मांग की थी या तो जीना दोनों दुकानदारों के नाम पर किया जाए या फिर सामूहिक रूप से छोड़ दिया जाए, मगर नप अधिकारियों ने भ्रष्टाचार में लिप्त होकर दुकान नंबर पांच के हक में जीने की जमीन की कन्वेंस डीड करवा दी। इस मामले में नप अधिकारियों ने सीएम के आदेशों को भी ठेंगा दिखाया है। मैंने कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर न्याय की मांग की है और कन्वेंस डीड को रद कराने की मांग की है।
कमेटी चौक पर नौ दुकानों के सामूहिक जीने को एक दुकानदार के नाम कर दिया गया। नप अधिकारियों ने नियम ताक पर रखकर जीने की जमीन दुकान नंबर पांच के दुकानदार के नाम करवाई है। कोर्ट से हमें न्याय की उम्मीद है। फिलहाल कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए जीने के प्रयोग की अनुमति दी है। साथ ही 31 जुलाई को प्रतिवादी पक्ष से जवाब मांगा है। हम इसकी शिकायत भी उच्चाधिकारियों से करेंगे।
-एडवोकेट विरद चौधरी, वादी पक्ष के वकील।
यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। मैं इस बारे में अधिकारियों से जवाब तलब करूंगी। मामले की जांच कराई जाएगी। जो भी दोषी होगा, उस पर कार्रवाई की जाएगी।
-सरोज राठी, चेयरपर्सन, नगर परिषद, बहादुरगढ़।